गुरुवार, 24 नवंबर 2011

ब्लॉग-बस्टर पखवाड़ा


सीर्सक देखकर आप लोग को बुझायेगा कि हमसे गलती से इस्पेलिंग मिस्टेक हो गया है. ईहो सोच सकते हैं आपलोग कि बिहारी त बिहारीये रहेगा. कुछ लोग, जिनके मन में हमरा कुछ इज्जत बचा हुआ है, उनको लगेगा कि ई भी हमरा कोइ इस्पेलिंग ईस्टंट है. मगर तनी डीपली घुस के सोचिये. एतना बोलने के बाद त आपका ध्यान सीर्सकवा से हट गया होगा, मगर सोचते होइएगा कि इधर त कोनो ब्लॉकबस्टर सिनेमा भी नहीं आया. ले दे के चर्चा में रॉकस्टार था अऊर रा-वन. उसके बारे में भी एतना देरी से लिखने के लिए कुछ बचा नहीं है.

तनी रुककर लौटते हैं सीर्सक पर. अपने पंडित जी, डॉ. अरविन्द मिसिर जी के ब्लॉग पर एगो कमेन्ट करने वाला/वाली आता/आती था/थी (बहुत कस्ट हो रहा हो इसलिए आगे ऊ कमेन्ट करने वाले का चर्चा में हम पुल्लिंग रूप प्रयोग करेंगे जिसे बिना कोनो भेद-भाव के, अगर ऊ महिला हों तो महिला-बाचक भी माना जाए). उनका नाम था गोस्टबस्टर. मगर पंडित जी कभी भी उनके कमेन्ट का जवाब में ई नाम नहीं इस्तेमाल किये. ऊ कहा करते थे भूतभंजक. ई नाम का सब्दानुबाद एतना पसंद आया हमको, जेतना ओरिजिनल भूतभंजक महोदय को नहीं आया होगा. कम से कम डेढ़ दर्जन लोग को हम ई नाम बताए! अऊर आज जब कुछ लिखने का फुर्सत मिला अऊर पिछला दस-पन्द्रह दिन का घटना देखे त लगा कि एही सीर्सक सूट करेगा.

अभी हाले में ब्लॉग गायब होना, कमेन्ट हवा में बिला जाना (विलीन होना), मेल उड़ जाना जैसा घटना से लगभग हर टॉप के ब्लॉगर को परेसान होना पडा. हमरे साथ त लास्ट ईयर सॉरी पार-साल हुआ था. दू-चार लोग से बेचैनी में पूछे तब पता चला कि आग उधर भी बराबर लगा हुआ है. जब अपना बारे में पता चला था त हम बहुत परेसान थे, मगर जब अऊर लोग का बारे में सुने त तनी इत्मीनान हुआ. आदमी का सोभाव है- चलो दोसरा भी दुखी है, त अपना दुःख तनी हल्का हो जाता है. 

ई बार त बिस्तार से पाबला जी के पोस्ट पर पढ़े पूरा गूगल-पाबला जुद्ध परकरण तब समझ में आया कि केतना भयानक समस्या था. पिछला आक्रमण के बाद से हम अपना पोस्ट का ड्राफ्ट बाहरी हार्ड-डिस्क में रखने लगे. अब हमरे पास त बचाने के लिए न कोनो बिग्यान है, न इतिहास है, न साहित्य, न आध्यात्म.. ले देकर कुछ पुराना याद है, जो खाली बच्चा लोग को दे जाने के लिए लिख रहे हैं. कहीं भुला गया, त दोबारा लिखने में जिन्गी खल्लास हो जाएगा.

खैर, ई बार जब हम बच गए (अभी तक त बचले हैं), तब बुझाया कि अटैक खाली टॉप के ब्लॉगर लोग पर था. हम त अपना आँख से देखे तब पता चला. संजय@ मो सम कौन का कमेन्ट हमको मेल में देखाई दिया, मगर पोस्ट पर नहीं. हम कमेन्ट त साट दिए पोस्ट पर, बाकी उनको मेल करके आगाह किए. उनका जवाब आया कि अली साहब के पोस्ट पर भी उनका कमेन्ट ओही गति को प्राप्त हो गया है.

हमारा नया पोस्ट बहुत से लोगो के ब्लॉग-फीड में बहुत दिन से अपडेट नहीं हो रहा है. एही बात पर केतना लोग से हम सीत-जुद्ध भी छेड़ दिए. का करें एक तो आदमी, उसपर ब्लॉगर. अब बुरा त लगबे करता है. देवेंदर पांडे जी मन लगाकर मस्त बनारसी गीत लिखे अऊर कमेन्ट नदारद. पता चला कि सब स्पैम नामक सुरसा के पेट में जा रहा है. एकदम परेसानी का माहौल बना हुआ है.

ब्लॉग-बस्टर का आतंक फ़ैल चुका था. फेस-बुक पर भी लोग खुलकर अन्ना के माफिक इस ब्लॉग-बस्टर से लड़ाई का मंत्र बता रहे थे. पंडित जी भी एगो पोस्ट लिखकर  अपना कस्ट बयान किये. ऊ त मान भी बैठे थे कि क्वचिदन्यतोsपि के जगह सुबहे बनारस के नाम से नया ब्लॉग सुरू करना पडेगा. मगर भला हो उनके जय और वीरू का, तीनों बच गए. अनुराग जी भी अमेरिका में बैठकर ओहाँ से लोग को मंत्र बता रहे थे. हर कोइ मंत्र का पर्ची छपवाकर बाँट रहा था, जैसे एक टाइम पर लोग संतोषी माता का पोस्टकार्ड भेजता था. फेसबुक पर भी ओही हाल था. लोग उपाय बताते थे और कहते थे कि सेयर कीजिये. पाबला जी के ताजा पोस्ट के मुताबिक़ अटल जी का बात याद आता है कि “अब चलने की वेला आई!” 

अभी तक सबसे अच्छा बात ई हुआ कि ब्लॉग-बस्टर के आक्रमण से अभी तक किसी ब्लॉग के सहीद होने का कोनो खबर सुनने को नहीं मिला. 

निसांत मिसिर जी का बात कहें तो
“प्रचंड तूफ़ान जब धरती से टकराता है तब वायु और वर्षा प्रलय मचाती हैं. वृक्ष जड़ों से उखड़ जाते हैं, नदियां मार्ग बदल लेती हैं, यहाँ तक कि बड़े-बड़े पर्वत भी बिखरने लगते हैं. फिर भी ऐसे प्रकोप एक-दो दिन से अधिक नहीं ठहरते. सर्वनाश की शक्ति लेकर धावा बोलनेवाले तूफानों को भी अपना डेरा-डंडा समेटना पड़ता है.
नोट: इस आलेख में किसी भी व्यक्ति, पोस्ट अथवा ब्लॉग का लिंक नहीं दिया गया है. ये सभी इतने स्थापित लोग हैं कि उन्हें परिचय की आवश्यकता नहीं)

57 टिप्‍पणियां:

  1. आज सुबह तो गूगल ने हमारा अकाउंट भी डिसेबल कर दिया. कुछ जुगत भिड़ाकर दोपहर में अकाउंट सक्रिय हुआ तो जान में जान आई. फ़ौरन अपनी कुछ ज़रूरी सेवाओं को दुसरे अकाउंट पर मोड़ दिया जो सर्वथा अनुपयुक्त ही रहता है. उसे बनाया ही इसी उद्देश्य से है कि किसी गंभीर स्थिति में अपना ब्लौग आदि बचे रहें.

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  2. यह खबर कुछ ऐसी है जैसे यह कि 2012 में दुनिया ही समाप्‍त होने वाली है। पिछले दो तीन दिन में विभिन्‍न ब्‍लागों पर कमेंट करने में समस्‍या तो आ रही है, लेकिन मेरे अपने ब्‍लाग में मुझे अभी तक कोई समस्‍या नहीं दिखी।
    अब तो अपन केवल इंतजार ही किया जा सकता है।

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  3. जौन हो रहल हौ तौन
    ठीके समझ
    गरीबी में आटा गीला हो रहल हौ
    ठीके समझ
    ई उत्पात ना होत त का घरे का बात बतियाइत हमने.. ?
    इक दूजे क सहयोग मिलत हौ, चौचक प्रेम बढ़त हौ..
    ठीके समझ।
    ....सब उपाय तो कर लिये। अनुराग जी ने समझाया तो बैक अप ले लिये। गिरिजेश भाई ने पाबला जी का लिंक दिया और उसी के अनुसार दूसरा जी मेल बनाकर ब्लॉग को जोड़ दिया। वर्ड प्रेस वाला डोमेन लेने में मुद्रा वाली बात आड़े आ रही है। फोकट वाला शौक अधिक मजेदार लगता है हम बनारसियों को। पैसे के चक्कर में कविताई का तिया-पांचा न हो जाय:-)वैसे भी ब्रॉड बैण्ड का खर्चा झेल ही रहे हैं। अब सोच रहे हैं कि कौनो दिन फुर्सत मिले तो कुल का प्रिंट आउट निकलवाकर धर लें अपने पास। फिर जो होगा निपट लेंगे।

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  4. सलिल जी,
    एक ब्लॉग शहीद हो चुका है....शिल्पा मेहता का ब्लॉग 'रेत का महल'
    पहली बार गायब होने के चार घंटे बाद मिल गया...पर दुबारा गायब होने पर आज तक वापस नहीं आया...शिल्पा भी बहुत बिजी हैं..इसलिए इधर ध्यान नहीं दे पा रही हैं...कहती हैं....वापस नहीं आया तो एक महीने के बाद नया ब्लॉग बनायेंगी.

    मेरी तो कुछ पुरानी पोस्ट के कमेन्ट स्पैम में पड़े थे...और लोगबाग नाराज़ चल रहे थे कि उनके कमेंट्स मॉडरेट कर देती हूँ...शिकायत भी कर डाली...कहीं और..:)

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  5. 'रेत के महल' इस ब्लॉग-बस्टर में ढह गए लगते है, या शहीद हो गए
    शुभकामना मंत्र जाप करते है सभी ब्लॉगरों के लिए

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  6. अइसा नहीं है दाऊ कि इ गड़बड़ झाला खाली मशहूरे आदमी लोग के ब्लाग पर हो रहा है…॥ हमरे जैसा पार्ट-टाइमर भी झेल रहा है इ सब… और सबसे दुख का बात एही है…

    अब देखिये मशहूर लोग के पोस्ट पर 100 कमेन्ट में से दु-चार गो बिला भी गया तो जादे फ़र्क नहीं पड़ेगा पर हमारे जैसा छुटभैया के साथ अइसा हो जाये तो "नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या " :P :P

    नमन !

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  7. हे भारतवंशी पीड़ित ब्लोगर बंधुओ ! ( संबोधन में भगिनी शब्द डेलीबिरेटली नहीं लिखा गया है ) गूगल मुनि के कोप से स्थायी मुक्ति का कोई उपाय विचारिये ..न हो तो एक और समुद्र मंथन कर डालिए. अभी हमारी जानकारी में शिल्पा जी के रेत के महल पर मुनि जी का कोप हुआ है. उनका ई.मेल भी हड़प लिया गया है. पीट्स बर्ग वाले शर्मा जी की पोस्ट भारत के बस्तर तक आते-आते कहीं लुप्त हो जा रही है.
    किन्तु इस घोर संकट की घड़ी में सलिल भैया ने एक सहानुभूति वाली बात कहके कुछ राहत देने का प्रयास किया है. ...यह कि ऐसा कोप नामी-गिरामी ब्लोगर्स के खाते में ही जा रहा है ......अर्थात मुझे भी चने के झाड़ पर चढ़ने का अवसर सुलभ करवा दिया है उन्होंने........इस कोप के हम भी दो बार भुक्त भोगी रह चुके हैं.....अर्थात हमारी गणना भी "टॉप के " ब्लोगर्स में हो गयी है. किन्तु यह मूल्य कुछ अधिक नहीं प्रतीत हो रहा ?

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  8. अभी-अभी याद आया, ऊ का है कि हम लोगों को महान होने का बड़का चस्का लग गया है. अब ई जो फर्मूला सलिल भइया लीक आउट कर दिए हैं न ......तs समझिये के अंधे के हाथ एगो बटेर लग गया. एगो हैं ....नमवा नहीं बताएँगे......काल्ही से देखिएगा वहां भी चिल्ल-पों सुरू हो जाएगा "...अरे सुनो..... है कोई .....हम भी टॉप के ब्लोगर हो गए हैं हमारा भी ब्लॉग गूगल मुनी जी खा गए हैं ...डकारो नहीं लिए हैं अभी तक ..."

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  9. ek din mera blog bhi gayab ho gaya tha.....ganimat hai ....mil gaya.post kafi achchi lagi.

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  10. नया ब्लोगर हूँ. ब्लॉग-बस्टर के साथ साथ ब्लॉग की दुनिया की चहल पहल से परिचय हुआ. सुन्दर

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  11. कुछ सप्ताह पहले गूगल बाबा की कोप दृष्टि से हमको भी शापित होना पड़ा। लेकिन धैर्य और दोस्तों का आशीर्वाद काम आया।

    आज कल त हमहूं प्रवचन दे देते हैं।

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  12. सत श्री अकाल सलिल भाई !
    कल मेरा ब्लॉग गायब होगया था , भला हो पाबला जी का जिनके सिखाये अनुसार गूगल पर अपना मोबाइल रजिस्टर्ड करा रखा था सो गूगल मियाँ ने तुरंत बापस कर दिया मगर एक बार तो पसीने छूट गए की अब मुझे भी सुबहे नॉएडा शुरू करना पड़ेगा !
    शुभकामनायें आपको !

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  13. salil ji aapne upar kahin likha hai ki लगभग हर टॉप के ब्लॉगर को परेसान होना पडा....main itminaan se hun ki main is shreni me nahi aati to ye bhoot mujhe nahi daryega.

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  14. माफ़ कीजियेगा दादा ... इस से पहले आया तो था पर आपके नियमित पाठक के रूप में नहीं बल्कि आपकी ही दी हुयी एक ज़िम्मेदारी का निर्वहन करने !

    आजकल गूगल लगभग सब को थोडा बहुत दुखी किये हुए है ... वैसे पाबला जी की माने तो ब्लागस्पाट भी अब बंद होने वाला है ! देखते है क्या होता है !

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  15. जी पिछले हफ्ते मेरा ब्लॉग भी उड़ गया था फिर काफी कोशिशें करके वापस लाया गया.और टिप्पणी कि आँख मिचोली जारी है अभी..देखिये आपके ब्लॉग पर भी यह मेरा दूसरा कमेन्ट है पहला वाला जाने कहाँ उड़ गया :(

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  16. :)
    हम गोस्टबस्टर को भूतमारकर "डब" किये थे। का है कि हम लिखे-पढे वाले न होकर कहे-सुने में यकीन रखने वाले हैं। इसीलिये आज तक दोहा-सायरी का मात्रा नहीं सीख सके। "रेत के महल" अभी तक ऑफ़-लाइन चल रहा था। कौशलेन्द्र जी का बात भी काबिले-गौर है, लौ जलेगी तो चिराग तले छाया बनने का सम्भावना भी रहता है। नाराजगी भी इंसानी खूबी है। ब्लॉगर इसलिये नाराज है कि उन्हें पाठक का कमेंट दिखा नहीं, पाठक इसलिये नाराज़ है कि ब्लॉग पर उनका कमेंट छपा नहीं। मगर सबसे दुखी प्राणी वाला स्रेणी तीसरा ही है।

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  17. पता नहीं चल रहा है कि कौन किसके पीछे पड़ा है।

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  18. एक दिन काम करते हुए ही ब्‍लाग बन्‍द हो गया। जीमेल भी बन्‍द हो गया। तब पासवर्ड बदला तो सबकुछ वापस आ गया। दिग्‍गी बाबू के हिसाब से तो संघ और भाजपा का हाथ लगता है। लेकिन हमें लगता है कि विदेशी हाथ ह‍ै। अब आप बड़े लोग ही जानो इस समस्‍या को। बन्‍द हो जाएगा तो अपनी दुकानदारी बन्‍द समझेंगे और वैसे भी अब तो छोटे दुकानदार टिकेंगे ही कहाँ, बड़ी वालमाल्‍ट के आगे?

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  19. मेरे साथ भी यह हुआ था एक दिन लेकिन कुछ क्षण में सब ठीक हो गया ...!

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  20. अन्ना ने कहा की जो शराब का नशा करे उसे बांध कर पीटो नशा छुड़ाओ गूगल अन्ना भक्त जान पड़ता है जिनको ज्यादा ब्लॉग का नशा हो गया है उन्हें इस तरह पिट का चेतावनी दे रहा है की, भईया मौका है सुधर जाओ उसके गुलाम न बनो नहीं तो बांध कर अच्छी मानसिक धुलाई कर देंगे और अगली बार जो ब्लॉग गया तो कब्बो वापस न मिलेगा | खुद का कहू तो चाय तक का नशा नहीं करती पर अभी परोसो ही पता चला की हम भी टिपियाने के , हर बात पर अपनी बात कहने के गुलाम हो गए है इस मुई ब्लॉग के कारण | ब्लॉग के लिए समय नहीं मिल रहा था रॉक स्टार देखी और कुछ कहने के लिए मन कुलबुलाने लगा और दस मिनट की फुरसत निकाल कर सोचा की इससे जुडी पोस्ट बस पढ़ भर लू भूखे को दो बूंद पानी ही काफी लेकिन इ क्या इधर पढ़ा और उधर अपने आप उंगलिया चलने लगी और धड़ धड टिप डाला फिर पता चला की भूखे को दो बूंद पानी तो और खतरनाक होता है अगले दिन सब कम धंधा छोड़ पोस्ट भी लिखा डाली | तब पता चला की की लो जी जीवन में हम भी बन गए इस नशे के गुलाम अब तो हर हाल में इससे पीछा छुड़ाना है | मेरी मानिये गूगल के इशारो को समझिये गुलामी से मुक्ति पाइये | उस पर राज कीजिये उसे खुद पर राज मत करने दीजिये |

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  21. हमको तो गोसाईं बाबा का रमैन याद आ गया,"जे न मित्र दुःख होहि सुखारी....!"

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  22. गँगा में न उतरो, तो पता ही नहीं चलता पानी कितना ठंडा है।
    पढता हूँ कुछ इस पर कि माजरा क्या है?

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  23. दुनिया आनी जानी है ,
    ब्लॉग भी भक्तो,फ़ानी है.

    जब तक चलता है चलाये जाओ.

    सलिल bhaaee , ग़म गुसारी के लिए शुक्रिया.

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  24. दुनिया आनी जानी है ,
    ब्लॉग भी भक्तो,फ़ानी है.

    जब तक चलता है चलाये जाओ.

    सलिल bhaaee , ग़म गुसारी के लिए शुक्रिया.

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  25. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  26. ई गुगलवा का टेरर हम जैसे छोटे ब्लोगेर पर भी हो रहा है ... बहत सा टिपण्णी नज़र नहीं आता ... भला हो पीटसबर्ग वालों का स्पैम से टिप्पणियों को तो खींच लाये पर ब्लॉग क तो भगवान ही राखा है ...

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  27. आदमी का सोभाव है- चलो दोसरा भी दुखी है, त अपना दुःख तनी हल्का हो जाता है.

    बहुत गज़ब बात लिख दिए हैं आप...

    नीरज

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  28. हम तो सोचते थे इस तरह के मामले में डाक तार विभाग की ही मोनोपोली है। हम गलत थे ... गूगल महाराज भी घालमेल के एक्सपर्ट हैं!! ...आपसे ही पता लगा था कि आपकी ई -मेल का हमने जवाब ही नहीं दिया, जो हमे कभी मिली ही नहीं।

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  29. आदमी का सोभाव है- चलो दोसरा भी दुखी है, त अपना दुःख तनी हल्का हो जाता है.
    क्या बात कही है:) मनोवैज्ञानिक पक्ष उजागर कर दिया आपने तो!
    आपकी लेखनी की मधुरता यूँ ही बनी रहे!

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  30. आदमी का सोभाव है- चलो दोसरा भी दुखी है, त अपना दुःख तनी हल्का हो जाता है.

    यह बात सटीक कही है .. बहुत से ब्लॉग से मेरी टिप्पणियाँ भी गायब हो रहीं थीं .. बाद में पता चला की स्पैम में जा रही हैं .. मैंने भी अपने ब्लॉग की कुछ टिप्पणियाँ स्पैम से बाहर निकालीं .:):)

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  31. वर्मा साहिब,
    आप त नीमन-नीमन लोगन के पोस्ट रूपी बाल पर छक्का जड़ देत बानी। हमरा हाथ में पॉवर रहित त आपको व्लॉग-सम्राट के उपाधि से अलंकृत कर दीहती । हमार पोस्ट पर अईनी एकरा खातिर हम रऊआ के धन्यवाद देत बानी । कृपा दृष्टि वनवले रहब।

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  32. अरे बिहारी बाबू ,ई भूत भंजक का काहें याद दिला दिए आप ? कहाँ बिलाई गए भूत भंजक भैया -हम बहुत पसंद करत रही ओनका..वैसे जैसन राऊर क -कहीं राउर ही त...... :) धन्य भाग हमरे ....
    बाकी त धुआंधार लिखत बिहारी बाबू ..बलि बलि जाऊं .......
    निशांत भैयवा का बात बड़ी नीक लाग हो !शुक्रिया !

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  33. अरे चचा पिछले हफ्ता तो एक दिन मेरा भी ब्लॉग गायब हो गया था..पांच मिनट के लिए..मेरा तो सर चकरा गया था..फिर ब्लॉगर अकाउंट खोले तो दिखाया की अकाउंट डिसेबल हो गया...खैर पन्द्रह बीस मिनट के कोशिश के बाद ठीक हो गया..
    और गूगल तो पता नहीं क्या खुन्नस है मेरे से...जहाँ भी कमेन्ट करते हैं तो वो सीधा स्पैम फोल्डर में चला जाता है..

    देखिये ये वाला कमेन्ट अभी पोस्ट होता है या नहीं...की स्पैम में चला जाता है..

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  34. पता नहीं कब क्या हो ..मेरी तो आवाज ही पहचान है ...गर याद रहे...

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  35. बहुत बढ़िया और रोचक पोस्ट! शानदार प्रस्तुती!

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  36. बहुत रोचक और सुंदर प्रस्तुति.। मेरे नए पोस्ट पर (हरिवंश राय बच्चन) आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  37. आदमी का सोभाव है- चलो दोसरा भी दुखी है, त अपना दुःख तनी हल्का हो जाता है...
    एशियन मानसिकता कह लें ...
    रोचक रहा आपकी भाषा में गूगल बाबा की कारिस्तानी पढना !

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  38. कुछ ऐसा ही हमारे ब्लॉग पर भी हो चुका हैं... रवि रतलामी जी का कमेन्ट प्रकाशित होने के तुरंत बाद गायब होकर स्पैम में पहुँच गया...

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  39. नहीं हुआ हमारे साथ ऐसा कुछ।
    यानी हम अभी स्थापित नहीं हैं।

    इति सिद्धम् :)

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  40. अंत भला तो सब भला। बताते हैं कि अंग्रेजों ने हिंदुस्तानियों को चाय और वनस्पति घी की आदत डालने के लिये शुरू में मुफ़्त में खिलाया पिलाया था। चीन की अधिकाँश आबादी को अफ़ीम का आदी बना दिया था। प्रलोभन देकह आदी बनाने के बाद मुनाफ़े का खेल चलाना कोई नई बात नहीं है। देखते हैं कि सुज्ञ जी के मंत्रजाप से क्या लाभ होता है..।

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  41. टिप्पणी का स्पैम बन जाना...यह समस्या बूंद-बूंद इतिहास पर प्रेम सरोवर और मनोज जी की टिप्पणियों के साथ हुआ...जिसे आपका आलेख पढ़ने के बाद मैंने स्पैंम में पाया।

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  42. मैने कभी देखा ही नही कि सपैम मे भी कमेन्ट होता है। आज कोशिश करती हूँ\ और भई कैसे हो ? आशीर्वाद।

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  43. बहुत सुद्नर पोस्ट लिखी है आपने , अभी हाल में करीब करीब सभी ने इसका अनुभव किया है ... लेकिन इससे कुछ नए अनुभव भी हुए है . लेकिन पाबला जी ने कुछ रास्ता बताया . हम तो यही कहना चाहेंगे कि किसी न किसी तरह ये ब्लॉग की गाडी चलते रहे .

    बधाई !!
    आभार
    विजय
    -----------
    कृपया मेरी नयी कविता " कल,आज और कल " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/11/blog-post_30.html

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  44. कुछ नया मशाला नही पढ़ने को नही मिल रहा है । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है ।

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  45. बहुत अच्छी जानकारी....ज्ञानवर्धन के लिए आभार.। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  46. .। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  47. लोग बड़े परेशान हैं , गीता सार पढ़ें

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  48. आपके नए पोस्ट के इंतजार में..........!!!!!!!!!!
    मेरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  49. बात-बात में आप अच्छा शीर्षक चुन लेते हैं। ब्लॉग-बस्टर काफी रोचक और सुखद लगा।

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  50. ब्लॉग-बस्टर , जितना कमाल का नाम उतनी कमाल की पोस्ट |

    सादर

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