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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

हार की जीत की हार


बचपन में एगो कहानी पढ़े थे. अब हम कोनो अनोखा बच्चा त थे नहीं, आपलोग भी बच्चा रहे होंगे अऊर ओही कहानी आप भी पढ़े होंगे. कहानी था श्री सुदर्शन का ‘हार की जीत’. एतना ब्यौहारिक कहानी कि आज समाज से सम्बेदना मर जाने के बाद भी ऊ कहानी ओतने प्रासंगिक मालूम देता है. एगो डाकू, एगो साधु से भिखारी अऊर लाचार का भेस बनाकर उनका घोड़ा चोरा लेता है. साधु बाबा जाते-जाते उससे एही कहते हैं कि ई घटना का जिकिर तुम किसी से मत करना, नहीं त लोग का भरोसा गरीब लाचार पर से उठ जाएगा. डाकू का हिरदय परिबर्तन होता है अऊर ऊ चोराया हुआ घोड़ा वापस कर देता है. साथ में दू बूँद जिन्दगी का भी छोड़ जाता है – आँख का आँसू!

तीन-चार साल पहिले जब ब्लॉग के दुनिया में बड़े अरमान से पहिला कदम रक्खे थे, तब जो लोग का लिखना अच्छा लगता था, उनका अस्थान हमरे लिये कोनो सेलेब्रिटी से कम नहीं होता था. जइसे एगो बच्चा को साइकिल चलाना आ जाए, त ऊ घर के सामने वाली चाची के एहाँ भी साइकिले से जाता है, ओइसहिं जिसके ब्लॉग पर फोन नम्बर मिल जाता था उनसे बतियाने का भी मन करता था अऊर बात होने पर लगता था कि अमिताभ बच्चन से बतियाकर आए हैं.

एही बीच तनी खेल का नियम भी समझ में आने लगा अऊर ऊ सेर है न
कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नये मिजाज़ का शहर है, ज़रा फासले से मिला करो!
का मतलब भी बुझाने लगा. बहुत सा लोग का असलियत भी समझ में आया. अऊर आखिर में हम भी ओही सतरंज का एगो मोहरा बन गये. फरक बस एतना था कि हमरा बिसात अपना था अऊर गेम का रूल भी. लोग बेनामी-फेनामी कहते-कहते नाम से जानने लगा अऊर धीरे-धीरे पहचान बनता चला गया. कोसिस एही किये कि हमको हमेसा ई याद रहे कि आदमी जब चढता है त सीढी से अऊर जब उतरता है त टप्प से लिफ्ट से नीचे आ जाता है.

कुछ लोग हमको बहुत सम्मान दिया अऊर कुछ लोग को हम बहुत सम्मान दिये. जिनको हम सम्मान दिये उनसे मिलने, बतियाने का लालसा तब भी रहता था अब भी रहता है. सतीश सक्सेना जी, पण्डित अरविन्द मिश्र, जनाब अली सैयद साहब, अनूप शुक्ल, निशांत मिश्र, संजय अनेजा, अनुराग जी... एहाँ तक कि समीर लाल जी, मनोज कुमार जी, अऊर बहुत सा लोग. स्वप्निल से पहले बतियाना अऊर बाद में मिलना हमरे लिये गोल्डेन मोमेण्ट से कम नहीं था.

ऊ टाइम में महिला ब्लॉगर को लेकर एतना हंगामा चलता था कि कुछ लोग का सम्मान करते हुये भी बतियाते हुये डर लगता था. कभी-कभी चैट पर कोई मिल गया त बतिया लिये. एही दरमियान अब याद नहीं का बात था लेकिन कोई बात को लेकर हमको एगो प्रतिष्ठित महिला ब्लॉगर से बतियाने का जरूरत महसूस हुआ. मगर उनका नम्बर नहीं था. उनके करीबी लोग में से दू लोग हमरे भी बहुत अच्छे दोस्त थे. ऊ दुनो से अलग-अलग चैट पर बतिया रहे थे एक रोज. याद आया त हम पूछ लिये कि अगर उनका नम्बर हो तो मुझे दो. एगो से उत्तर मिला कि हमरे पास नहीं है अऊर दोसरका ब्लॉगर चैट लाइन काट दिहिन. तब हमको लगा कि हम कुछ जादा इमोसनल हो रहे हैं. काहे कि एतना अक्किल त भगवान देबे किये हैं कि समझ जाते कि ऊ लोग बताना नहीं चाह रहा है. बात खतम हो गया अऊर हमारा सम्बन्ध ऊ लोग के साथ ओइसहिं बना रहा.

करीब एक साल के बाद ओही महिला ब्लॉगर का फोन हमको आया. हमारा नम्बर उनको उन्हीं से मिला था जो हमको उनका नम्बर देने से मना कर दिये थे. ऊ पहिला बात हमसे एही बोलीं, “एक रोज आपने हमारा नम्बर माँगा था, तो आपको नहीं मिला था, देखिए आज हम आपका नम्बर लेकर आपको फोन कर रहे हैं. आपको निमंत्रण देना है.” हम गये उनके घर, सबसे मिले अऊर हमारा रिस्ता आज भी बना हुआ है.

अइसहिं दीदी गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी के एगो कबिता का समीच्छा मनोज जी के ब्लॉग पर “आँच” में परकासित हुआ था. मगर ऊ सूचना देने के बाद भी नहीं आईं, त हम सोचे फोन से सूचित कर दें. ऊ दिन डेढ दर्जन कुलश्रेष्ठ का नम्बर नेट से खोजकर निकाले मगर दीदी का नम्बर नहिंए मिला. फिर याद आया उनका “एकलव्य” अऊर बड़े भाई राजेश उत्साही. उनको पूछे त ऊ बोले कि पता लगाकर एस एम एस करते हैं. खैर नम्बर मिला, दीदी से बात हुआ, पता चला कि ऊ सहर से बाहर हैं एही से नहीं देख पाईं. अब त घरेलू रिस्ता हो गया है उनसे.

अइसहिं एगो पुरुस ब्लॉगर, एगो महिला ब्लॉगर से उनका फोन नम्बर माँगा था. ऊ महिला भी अपना नम्बर दे दीं बाबा भारती के तरह उस पर भरोसा करके. उसके बाद एगो लम्बा सिलसिला चला टॉरचर का. ऊ महिला ब्लॉगर का परिबार बिखर गया. घर के अन्दर अदृस्य दीवार खड़ा हो गया. और पिछला दू साल से ई हाल है कि उनका जिन्नगी घर में बिछावन, हस्पताल में आई.सी.यू., नर्स, इंजेक्सन, दवाई, बेहोसी, लाचारी अऊर कमजोरी के बीच पिसकर रह गया है. हम जब फोन करते हैं त उनका एक्के रट रहता है – फ़ोन कर लिया करो बीच बीच में. अच्छा लगता है!

कहाँ आजकल मिलता है डाकू खड़गसिंह जो बाबा भारती के ई कहने पर कि ई बात किसी को मत बताना नहीं तो कोई भी महिला ब्लॉगर कोनो पुरुस ब्लॉगर को अपना फोन नम्बर देने में हजार बार सोचेगी- अपना आँख से दू बूँद आँसुए गिरा देता ताकि ऊ औरत जो हर पल अपना मौत का इंतजार कर रही है, उसको एगो आसान मौत मिल पाता!! 

(परमात्मा उनको लम्बी उम्र दे!)