शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

बाद मरने के मेरे

ई आभासी दुनिया का एगो सबसे बड़ा खासियत एही है कि इसमें घूमने वाला लोग बास्तबिक है. हर कोई का आपस में तार जुटा हुआ है. एही लोग से समाचार मिलता रहता है कि सब ठीक-ठाक है या अमुक के साथ अइसा हो गया. अभी कुछ रोज पहिले अचानक निर्मला कपिला जी (निम्मो दी) का मेल मिला अऊर उसमें ऊ बताईं कि उनको बहुत सीरियस बीमारी हो गया है अऊर ऊ एकदम बेड-रेस्ट में हैं. मनोज जी के एगो पोस्ट से पता चला कि संगीता स्वरुप जी को कार दुर्घटना में चोट लगा. पाबलाजी के साथ जो पर-साल दुर्घटना हुआ था उसका खबर भी अइसहीं पंडित अरविंदमिसरा जी के माध्यम से लगा था.
अब थोड़ा सा अऊर सीरियस बात करें त डॉ. अमर कुमार के स्वर्गबास के बारे में अऊर हमरे फेसबुक दोस्त हिमांशु मोहन जी के निधन के बारे में भी अइसहीं आभासी दुनिया के बास्ताबिक लोग के मार्फ़त पता चला. अइसने कोनो अबसर के लिए निदा फाज़ली साहेब एगो सेर कहे होंगे:
उम्र होने को है पचास के पार,
कौन है किस जगह पता रखना.
मगर केतना लोग अइसा भी होगा जिनके साथ, केतना तरह का दुर्घटना, अच्छा-बुरा घटता होगा, मगर उनका किसी के साथ कोनो संपर्क नहीं. हम जान भी नहीं पाते हैं ऊ लोग के बारे में. जानना जरूरी नहीं, मगर जानने में हरज भी नहीं. तनी ढाढस हो जाता है अऊर का!! बेचारा सोचता है कि एतना लोग है हमरे साथ.
एही सब बुरा अऊर बहुत बुरा समाचार के दौर में हमरी बिटिया सोनी का एस.एम्.एस. हमको मिला एक रोज. उसमें लिखा था
बाबूजी, बताइए!
अगर आपको मेरे मरने की खबर मिले
तो कितने दिनों में आप मेरा नंबर अपने मोबाइल से
डिलीट कर देंगे!
अभी साल भर पहिले नया जिन्नगी सुरू की है अऊर ई सब बात... फोन करके हम उसको डाँटे. बोली, हमसे कोइ पूछा था तो हम सोचे कि आपसे भी पूछ लें. इमैजिनरी सवाल का बास्ताबिक जवाब दीजिए. गोस्सा में हम बोले कि पागलपन वाला सवाल का हम जवाब नहीं देते हैं. ऊ समझ गयी कि कुछ बात मजाक से बाहर होता है!
मगर ओही दिन के बाद से हम अपना बारे में भी सोचने लगे कि अच्छा है हमरे साथ चैतन्य आलोक हैं. हमरे ब्लॉग का पासवर्ड उनके पास है अऊर हमरे हर साँस का हिसाब भी उन्हीं के पास है. अगर कभी हमरा साँस रुक जाए तो कम-से-कम एक ठो आदमी तो है जो हमरे नहीं होने का खबर आप लोग तक पहुंचा सकेंगे, एक दम फर्स्ट हैंड इनफोर्मेसन. काहे से कि हम त ग्रुप में ब्लॉग लिखते नहीं हैं, इसलिए ई खबर देने के लिए ग्रुप का लोग भी नहीं है हमरे पास.
एक रोज एगो मजाक करने का मन किया कि चैतन्य जी को बोलकर एगो पोस्ट लिखवाते हैं अपने मृत्यु का सूचना देने के लिए. देखते हैं लोग का-का कहता है हमरे बारे में. सायद अपना मृत्यु का सोक-संदेस अपने से पढने वाला पहिला आदमी होंगे हम. ऐसे भी कोइ बुरा तो बोलेगा नहीं, मगर भला के भेराईटी का फ्लेभर त देखने को मिलेगा ना! बाद में बता देंगे कि हम मजाक किये थे.
बाकी इसमें एगो नोकसान हो सकता है कि जदी सच्चो में कोनो दिन ई खबर मिलेगा आप लोग को तब???? तब त ई पोस्ट पढने वाला सबलोग समझेगा कि १४.१०.२०११ का रीठेल किया हुआ पोस्ट है. उस दिन कमेन्ट में सबलोग इस्माइली बनाएगा, लिखेगा कि बहुत अच्छे जा रहे हो, लगे रहो, आप भी बहुत अच्छा मजाक कर लेते हैं, अच्छी लगी आपकी मरने की खबर भी, हम तो दुबारा इस खबर को पढकर हंसते-हंसते बेहाल हो गए, हा हा हा, क्या कहने है आपकी मौत के!!
मगर एगो राज का बात बताएं, सच में हम एही चाहते हैं कि जब आप लोग को अलविदा कहें तो इसी तरह का कमेन्ट आप लोग से सुनने को मिले. आज तक आपलोग से कुछ नहीं मांगे हैं (टिप्पणी तक नहीं), कम-से-कम ई इच्छा तो पूरा करना बनता ही है!! वादा कीजिये!

61 टिप्‍पणियां:

  1. आँखों में , पट्टी बाँध
    कर, गाड़ी चला रहे !
    टकरायेंगे , कहाँ पर ?
    हमें खुद पता नहीं !
    जब तक जियेंगे, हम भी जलाये रहें दिया !
    कब आसमान रो पड़े ? हमको पता नहीं !

    लोगों का क्या है रस्म
    निभाकर निकल पड़े
    मौत आएगी मिलन
    को , हमें ही पता नहीं
    कब जायेंगे घर छोड़ कर, सोंचा नहीं सनम ,
    मरने का समय तय है, पर हमको पता नहीं !

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  2. पागलपन वाला सवाल का हम जवाब नहीं देते हैं. ऊ समझ गयी कि कुछ बात मजाक से बाहर होता है!
    ..बिटिया समझ गई आप नहीं समझे! समझाने वाले समझते क्यों नहीं?

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  3. नाहक ही मौत से आप परेशान हैं
    जिन्दा कहाँ है आप जो मर जायेगें :)?
    महराज वैसे भी ऐसे मजाक मुझे कतई अच्छे नहीं लगते :(
    सपोज आपके दुशमन मरे हों !

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  4. सलिल भइया ! एक बार हम भी सोचे के अगर कभी कउनो दुर्घटना मं हम टें बोल दिए त ओकरे बाद का दृस्य कइसा होगा.
    हमरी माटी आँगन मं धरी है आ पतनी रो रही है. लोग-बाग़ टिकटी बनाने का तयारी मं लगे हैं. कुछ लोग खुस हैं ...कुछ लोग निरबिकार हैं ...त दू-चार लोग दुखी भी हैं के बेचारा चला गया फोकट मं सब काम कर देता था चाहे सर्टीफिकेट हो चाहे प्रिस्क्रिप्सन ...अब थोड़ा मुस्किल हो जाएगा.
    हम फेर पलट के पतनी के मनः स्थिति के बारे मं सोचे .....ओहकऐ रोलाई के कल्पना मं हम एतना डूब गए के पतए नहीं चला के लोर कब बहने लगा.
    तभिये पतनी जी आ गयीं, देखीं त बोलीं, अरे का हो गया है अकेले मं बइठे-बइठे काहे रो रहे हैं? हम कहे, कुछओ नहीं...बस तुमको रोते देखा नहीं गया. अब ऊ हैरान, पर हम कहाँ रो रहे हैं ? हम बोले, हमरी मौत पर देखे थे तुमको रोते हुए. ऊ घबरा गयीं, बोलीं चलो, मनोरोग बिसेसग्य के पास चलते हैं ........

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  5. बरहाल ये मजाक के बाहर है पोस्ट आपकी .फिर भी बता दें कि आपके पास एक तो आदमी तो है सूचना देने को.यहाँ तो एक भी नहीं...:)

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  6. @ कौशलेन्द्र जी!
    डॉक्टर साहेब! खड़े होकर हम, झुकाए हुए हैं माथा आपके इस कमेन्ट पर.. आज उम्र का कोई भेद नहीं!! नतमस्तक हैं!!

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  7. @ शिखा जी हम भी आप जैसे ही है ... सेम पिंच ... ;-)
    @ सलिल भाई ... निदा साहब ने जो कहा सो कहा ... हम तो ३४ के पार हुए है ... पर अभी से इसी जद्दोजहद में लगे हुए है ...

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  8. बहुत बढ़िया |
    बधाई ||
    http://dineshkidillagi.blogspot.com/

    मर-मर के जी रहे हैं सालों से मित्र हम तो-
    वो मौत क्या अलहदा कुछ और कष्ट देगी ||
    जब आग में जलेगा, नब्बे किलो का लोथा-
    पानी-पवन गगन यह धरती भी अंश लेगी ||

    मोबाइल हुआ जो स्थिर, तेरह दिनों तक देखा --
    तो फोन का वो गाना फिर ना सुनाई देंगा |
    जो काल ना करेगी, वो काल वो करेगा --
    बस ब्लॉग जो ये छूटे, सच की रुलाई देगा |
    नम्बर मिटेगा खुद से, पहले मिटें तो यादें,
    वो मौत फिर न मौका, करने विदाई देगा ||

    आशा है की इस तुरंती पर तुषारा-पात नहीं करंगे आप ||

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  9. सलिल भाई, आपके द्वारा सुझाये वाकमैन को खरीदने के बाद से सुबह की सैर करने जाते समय उसे सुनना शुरु किया था। और पिछले दिनों ओशो के प्रवचन "मै मृत्यु सिखाता हूं" सुनें।
    और अब आपकी यह पोस्ट (जिसे सुन तो मै दोपहर में ही चुका था) : पहली बात तो ये मेरा देह में होना कैसे इतना पक्का मान लिया आपने ? हम तो "बारदो" ध्यान करने वाले पागल हैं और खुद को चिता पर डालने का अभ्यास अभी से शुरु कर दियें हैं। किस की खबर किसने और किसे देनी है सब अबूझ ही तो है, सलिल भाई। ये नाम और पहचान सब संयोगिक ही है :( पंडित अरविन्द मिश्रा जी की बात भी ठीक है जिन्दा कौन है ?
    ओशो कहते हैं कि "यह महायात्रा:स्वमं को दावं पर लगाने का सहास है"।
    खैर! अंतरजाल के इस जगत से जीवन की क्षणभंगुरता और स्पष्ट हो जाती है, बस एक डिलीट बटन और आउट आफ साईट !
    पर जब तक यह महफिल सजी है जश्न मनता रहे, शो मस्ट गो आन ! Love you !!

    चैतन्य आलोक

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  10. ऐसा मजाक अच्छा नहीं.......और क्या कहूं ?

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  11. aisa bhi koi post hota hai bhala... is post me aap hansayen bhi aur bahut immotional bhi kar diye.. aur ee ka..chaitnya sir kab se benaami ho gaye hain....

    aur haan hamari or se chaitnya sir se bada LOVE YOU hai... :)

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  12. @ ".......आज उम्र का कोई भेद नहीं!! नतमस्तक हैं!!"

    सलिल भैया ! आयुष्मान भव ! ! ! कल्याणमस्तु ! ! ! जुग-जुग जिओ .......

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  13. @ रविकर जी:
    आभार आपकी अभिव्यक्ति का!! तुषारापात का तो प्रश्न ही नहीं होता!!
    @ चैतन्य जी:
    बरसों पहले कोई "एक सपना छोडकर गया था", आज आपने भी एक सपना दिया!!

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  14. जो अपनी मौत का यूं मजाक बना सकता है...वही वस्तुत: मृत्यु के मर्म को समझता है।

    ...पर हमें तो यह महा-पागलपन लगा जी...

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  15. हमारे यहाँ कहते है की जीतनी अपने मरने की बात करो जितने ज्यादा लोगो से करो , सपने में खुद को या किसी को मरा देखो या अपने मरने की झूठी खबर फैलाव उतनी उम्र बढ़ती जाती है तो खूब अपनी उम्र बढ़ा रहे है बढ़िया है :)

    ये भी कहते है की जितना मोह ममता करो उतनी ही उम्र भी बढ़ती है, दिख रहा है की ब्लॉग जगत के लोगो से कितना मोह बढ़ गया है तो लो और उम्र बढ़ी बढ़िया है :)

    और आखरी बात कल करवा चौथ है क्या पत्नी को दिखाया है की आप ऐसी पोस्ट लिख रहे है वो भी आज के दिन कही पत्नी से झगडा तो नहीं हुआ है उसे ऐसी मेंटल बाते पढ़ा कर सेंटी बनाना चाह रहे है | कहे की ऐसी बातो से पत्निया बढ़ी जल्दी सेंटीमेंटल हो जाती है :)))

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  16. जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय
    जुग जुग जियो भाई साहब!

    आप की पोस्ट पढकर हमें भी प्रेरणा मिली है ... जब टिप्पणी और पोस्ट न आये और विश्व के किसी कोने में ... तो समझो .... मामला गड़बड़ है :) उस स्थिति में आपसे इतना रिक्वेस्ट है कि हमरा बचत खाता बन्द करवा के ओवरड्राइंग का डिमांड हमरे भाईसाहब को भिजवा दिया जाये।

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  17. हाल फिलहाल की दुखद खबरों के बाद इस तरह की बातें मन में आना स्वाभाविक है लेकिन उसे इत्ता भी सीरियस न लिया जाय।

    अंशुमाला जी ने पोस्ट की टाइमिंग के बारे में बहुत सटीक सवाल किया है कि आखिर क्या सोचकर करवा चौथ के मौके पर ऐसी पोस्ट लिखने की सोची :)

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  18. कल जिन्हें कल ने सताया था बहुत ही
    आज वे ही आज को ललकारते हैं।
    एक क्षण के झूठ की खातिर यहां तो
    उम्र भर के सच को हम दुत्कारते हैं।

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  19. सलिल भाई,
    आज तो आपने हम जैसे लोगों को emotional blackmail कर ही दिया.
    बिटिया ने बहुत ही गंभीर विषय को आसानी से समझा दिया.
    मरना तो मैं भी चाहता हूँ,पर बेखबर सा.
    कोई ख़बर न दे,कोई ख़बर न हो.
    किसी को पता न चले,बस गायब हो जाऊं.

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  20. ब्लॉग जगत की ख़बरें मिल ही जाती हैं ... आपने भी अपनी पोस्ट के मध्यम से कुछ सूचनाएं तो दे ही दीं हैं ... निर्मला जी के बारे में जान कर दुःख हुआ ..ईश्वर उनको शीघ्र स्वस्थ करें ..

    कभी कभी सच ही सोचती हूँ कि मरने के बाद जान पायें कि लोग क्या सोचते हैं हमारे बारे में .. पर यह संभव नहीं ... बिटिया ने गहन बात पूछ ली .. यह संसार ही मिथ्या है फिर भी लोग जीते जी इसका मोह नहीं त्याग पाते ...
    वैसे ..झूठी खबरें फैलाना सख्त माना है ..

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  21. हम समझ रहे हैं, भैया!

    आजकल ओशो-ओशो बहुत हो रहा है...

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  22. हे भगवान ....ये सब क्या है...ऐसी बातों से मन और खराब होता है...:(

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  23. विधि की विडंवना को टालने की हिम्मत हम सबके पास नही है । सत्य तो सत्य ही रहता है । हम इससे विमुख होकर नही जी सकते । जिंदगी में परम सत्य को स्वीकार करना सबके बस की बात नही है । धन्यवाद ।

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  24. सलिल भाई जी,
    बेहतरीन ! जिस सत्य से लोग जीवन-भर भागते रहना चाहते हैं,उस सत्य को इतने हलके में लेना अच्छा लगा.आपके इस आलेख ने अनायास ही खुशवंत सिंह की याद दिला दी.अगर जीवन को इस दिलेरी और दार्शनिक अंदाज में लिया जाए तो मौत तो सचमुच नींद का विस्तार मात्र होकर रह जायेगी.बहुत खूब कहा आपने.

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  25. सबसे पहले पढ़ी थी आपकी यः पोस्ट \
    इतनाही कहूँगी
    आइये बहार को हम बाँट ले
    जिन्दगी के प्यार को हम बाँट ले
    मिलके रोये मिलके मुस्कुराये हम
    अपनी जीत हार को हम बाँट ले .......\
    जो सत्य है वही तो जिन्दगी है |

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  26. क्या सोच के आए थे?
    के सरदार खुस होगा? सबासी देगा?
    क्यों?


    बिटिया समझ गई आप नहीं समझे!

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  27. यह पोस्‍ट आपने ही लगाई है न, चैतन्‍य आलोक जी की ओर से प्राक्‍सी तो नहीं. (माना जाता है कि मृत्‍यु की चर्चा से आयु बढ़ती है.), जीवेत् शरदः शतम्.

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  28. धन्य-धन्य यह मंच है, धन्य टिप्पणीकार |

    सुन्दर प्रस्तुति आप की, चर्चा में इस बार |

    सोमवार चर्चा-मंच

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  29. परसों पढ़ा था तो एक बार तो बहुत गुस्सा आया था, दो तीन बार कमेंट लिखा और डिलीट कर दिया। बाद में आराम से सोचा तो गुस्सा ठंडा हो गया है। मजाक मजाक में आपने दो तीन बार मुझे कहानी आईडिया चुरा लेने वाली बात कही है, मैं सीरियसली कह रहा हूँ कि जब से ’मधुशाला’ पढ़ी थी तभी से अपने बारे में ऐसी कल्पनायें करता रहा हूँ, बिल्कुल ऐसी ही कामनायें करता रहा हूँ, जैसी आपने की है। आपका एक इल्जाम लौटा रहा हूँ।

    युधिष्ठिर से पूछे गये यक्ष प्रश्नों में ’किमाश्चर्यम’ यही मौत महबूबा ही तो थी, आध्यात्म का एक पथ खुद को जीते जी मरना सिखाने का भी है। योगियों का समाधि अवस्था में जाना अपनी आत्मा को समेट कर ब्रह्म में लीन कर लेना, वह सब इसी श्रेणी में ही तो आता है।
    राही हम सभी एक ही राह के हैं, कोई आगे है और कोई पीछे।

    और हाँ सलिल भाई, आप ऐसे पहले व्यक्ति नहीं है बल्कि पहले ब्लॉगर भी नहीं हैं। अवधिया जी की एक ऐसी पोस्ट मैंने पढ़ रखी है, ऐसा ध्यान आता है। मेरी पुरानी ब्रांच के सुरक्षा कर्मी के एक हमनाम स्टाफ़(दूसरी शाखा का सुरक्षा कर्मी) का देहावसान होने पर हमारे वाले गार्ड साहब के घर क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ़ से शोक-संदेश चला गया था। आगे क्या हुआ, वो कहानी फ़िर सही..।

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  30. पढ़ते ही सबसे पहले ध्यान में आया... किमाश्चर्यम! और आश्चर्य नहीं है कि संजय जी ऊपर लिख गए हैं।
    मैं नाराज़ नहीं हूँ, राहुल जी कि तरह कहूँगा जीवेत् शरदः शतम्।
    वैसे पाबला जी की टिप्पणी लाख टके की है। :)

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  31. आपके शीर्षक से एक कविता याद आ गई -

    बाद मरने के मेरे कब्र पे उगाना बैंगन
    मेरी 'वो' को भुरता बहुत पसंद है..

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  32. हमारा भी कोई समूह नही है तो खबर नहीं लग पाएगी। सब लोग सोचेंगे कि बन्‍द कर दिया होगा ब्‍लाग। पाबलाजी कुछ मदद नहीं कर सकते है क्‍या कि वह मरण दिवस भी ब्‍लाग पर डाल दे। सावधान करती आपकी पोस्‍ट है।

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  33. सलिल जी
    अभी अभी मेरा एक एक्सीडेंट हुआ था. मृत्यु से प्रत्यक्ष सामना हुआ था. बाइक पर था मैं और कार की टक्कर के बाद जब मैं हवा में उछला था तब एक एक कर सैकड़ो काम याद आ गए जो अधूरे रह गए थे.... जैसे हर तीन महीने पर माँ बाबूजी की दवाई पार्सल से भिजवाना..... और सबसे पहले यही अधूरा काम याद आया था...... फिर माँ बोली थी कि दसहरा में जरुर आना.... सो भगवान जी से कहा कि हे भगवान... कुछ करना तो दसहरा बाद करना... खुद ही उपस्थित हो जाऊंगा...जहाँ कहोगे वहां...और सचमुच पंद्रह फुट ऊपर उछल कर फुटपाथ पर गिर कर केवल मामूली चोट आये.... यह असंभव सा था... मैं उठ खड़ा हुआ.... अपनी खरोच... मांशपेशियों के फटने और हेयर लाइन फ्रैक्चर की परवाह किये बगैर.... उठ कर ओफ़ीस गए... फिर अपनी पत्नी को बताये... भाई को बताये... माँ को नहीं बताये.... जिंदगी चलती जरुर है किसी के भी जाने के बाद लेकिन एक खालीपन के साथ..... कोई दर्शन इस खालीपन को दूर नहीं कर सकता.... मेरी कविताओं पर जो आपकी टिप्पणी है... उसको तो जरुर मिस करूँगा... आपके साथ कुछ कॉफ़ी को जीवन पर्यंत याद रखूँगा... और वादा करता हूं... बाराखम्बा मेट्रो स्टेशन पर कभी नहीं जाऊंगा आजीवन .... बहुत हौसला वाला पोस्ट है यह.... आपके दीर्घायु होने की कामना करता हूं....

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  34. सलिल भाई, फैज़ साहब फरमा गए हैं:
    नेमते-जीस्त का ये क़र्ज़ चुकेगा कैसे
    लाख घबरा के ये कहते रहें, मर जायेंगे
    सो एक जाम, जिंदगी के नाम!

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  35. या रब मेरे दुश्मन को सलामत रखना
    वरना मेरे मरने की दुआ कौन करेगा

    जब तक दुश्मन हैं तब तक आप कौनो चिंता न करें...खबर फैला ही देंगे...कि टपक गया ससुरा...बिटिया के सवाल ने सच में हिला दिया हमें...हम खुद किसी के गोलोक गमन की सूचना मिलने पर उसका नाम जो डीलीट कर देते हैं...फिर हमरी सूचना पर लोग क्यूँ हमरा नाम डिलीट नहीं करेंगे? वो चाहे तुरंत करें या एक महीना बाद का फरक पड़ता है...डिलीट करेंगे ये पक्का है...क्यूँ के ये ही संसार का नियम है.

    नीरज

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  36. Aapki post padhke maine apna sir peet liya! Waise,aisa mazaq karne ka moh to zaroor hota hoga....taki pata chale log apne bare me,apne baad kya kahte hain! Lekin keejiyegaa nahee aisa mazaaq kabhee!

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  37. मृत्यु को मजाक बनाना भी एक कला हैं पर इसकी वास्तविकता उतनी ही भयावह ।

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  38. जरूरी कार्यो के कारण करीब 17 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  39. बहुत बढ़िया! शानदार पोस्ट!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  40. ऐसन बात ठीक नहीं है ... आशा की बात करें ... आने वाले समय की मंसूबों की बात करें ... इ का प्रपंच ले बैठे हैं आप ...

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  41. mai to maut se panga le rahi hoon itani aasani se use jindagi se khelane nahin doongi. mujhe pataa hai aur koi jo bhi kahe lekin aap mujhe jaroor vahi sandesh denge jo khud ke liye chahate hain. lekin ek ichha jaroor hai ki meri maut par mere blogger saathi meri arthi ko kandha jaroor den. kam se kam aap to denge hi . aasamaan me jaa kar bhi blogging karana chahati hoon.kyon ki un sab ne mujhe jeene ke liye bahut urja aur himmat di hai. sabhi kaa dhanyavad aur shubhakamanaayen.

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  42. अरे भाई ई गजब मती करना वर्ना सब लोग हमको कोसेंगे। कहेंगे कि फ़ुरसतिया से मिले थे १३ अक्टूबर को। सदमे के चलते निकल लिये। :)

    बाकी मस्त रहा जाये। :)

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  43. जीवन के वास्तविक सत्य का भान कराती पोस्ट,आपने गंभीर तथ्य को आसानी से सामने रखा जो आपके आध्यात्मिक चिंतन को दर्शाता है
    आपको दीपावली एवं नववर्ष की सपरिवार ढेरों शुभकामनाएं !

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  44. एक अच्छी और गहन रचना. की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  45. क्षमा कीजिये बाऊ जी , लेकिन मुझे पसंद नहीं आयी ये रचना , ज़रा भी नहीं |
    न तो मैं यहाँ उपस्थित लोगों जितना परिपक्व हूँ न ही इतना समझदार हूँ की हर पोस्ट को पढ़ने के बाद दिमाग से फैसला करूँ , मैं तो एक साधारण सा बच्चा हूँ और बड़ी से बड़ी रचनाओं को दिल से पढ़ जाता हूँ , बिना दिमाग लगाए , पढ़ने के बाद दिल से दो ही आवाज निकलता है - वाह और आह .
    ये पढ़ने के बाद न तो मेरे दिल से वाह निकली (लेकिन आह बहुत जोर से निकली) और न ही मेरा अब आगे पढ़ने का मन कर रहा है (क्षमा),
    ऐसा लगा कि कल रात से जिसके साथ बैठकर मैं बतिया रहा था , अपना सुख - अपने दुःख , वो अचानक ही खडा हुआ और जाने को कहने लगा|
    कल किसने देखा , जाना तो सभी को है , क्या पता आपसे पहले मैं चला जाऊं , तब ??
    जब जाना होगा तब तो सभी चला जायेगा , पहिले से काहे हल्ला मचाकर हमको परेशान कर रहे हैं ?

    ईश्वर से आपके स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए |

    सादर
    -आकाश

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