रविवार, 15 जनवरी 2012

मगध का रंगयात्री


नाम के बारे में त का मालूम केतना लोग केतना तरह का बात कह गया है. मगर हम त एक्के बात जानते हैं कि नाम का असर इतना जबरदस्त होता है कि उसको सुनने के साथ ही दिमाग में फोटो खींच जाता है. हमरे साथ एक बार अइसहीं हुआ कि निम्मो दी (श्रीमती निर्मला कपिला) से मुलाक़ात हुआ, हम उनका पैर छुए अऊर ऊ हमको आसिरबाद भी दीं. पहिला बार मिले थे इसलिए नाम भी बताए,” सलिल!” मगर उनके चेहरा पर कोनो अपनापन नहीं देखाई दिया. बाद में हम सिकायत किये तब ऊ बोलीं कि हम तो चला बिहारी के नाम से जानते थे इसलिए भूल हुआ! अब बताइये नाम धरा का धरा रह गया अऊर पहचान बना बिहारी से!

फ्लैस – बैक
आठ-नौ साल के उम्र में जब आकासबानी पटना से बतौर बाल-कलाकार जुड़े, तब बहुत से कलाकार से परिचय हुआ. हर नाम के साथ पूरा ब्यक्तित्व जुड़ा हुआ. रोमांटिक हीरो प्यारे मोहन, अखिलेस्वर प्रसाद अऊर सतीस आनंद, अभिनेत्री सत्या सहगल अऊर पुष्पा दी, कोमेडी माने सिराज दनापुरी अऊर निर्देसक तथा बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार भगवान साहू. ई सब के साथ-साथ एगो नाम जो हमरे दिमाग में बचपन से लेकर आज तक बना हुआ है ऊ नाम है श्री चतुर्भुज. खाली एक सब्द का नाम.

आकासबानी के गलियारा में एगो कमरा के सामने लकड़ी के तख्ती पर सफ़ेद पेंट से लिखा हुआ नाम “चतुर्भुज”. बिहार परदेस, जहाँ नाम से जादा महत्व जाति-सूचक नाम का होता है, ओहाँ खाली एक सब्द का नाम. आकर्षित हो गए हम ई नाम से. एगो मामूली से आदमी, पाँच फीट से बस तनी सा अधिक ऊंचाई, एकदम गोल चेहरा, मोटा फ्रेम का चश्मा, माथा पर बाल कम, मुस्कुराते हुए जब बात करते मुँह के अंदर छोटा-छोटा दाँत का कतार साफ़ देखाई देता था अऊर पान खाए हुए मुँह से उनका मुस्कराहट का रिफ्लेक्सन, उनके आँख में नजर आता था. आप कह सकते हैं कि ऊ पूरा चेहरा से मुस्कुराते थे.

अब सस्पेंस के साथ बात करना हमरा इस्टाइल है. इसलिए आप पूछियेगा कि जब हम ऊपर सब कलाकार का नाम बताए त इनका नाम काहे नहीं बोले. असल में इनका पहचान सबसे अलग है. इनका नाम सुनते ही आज भी बुद्ध, अशोक, मीरजाफर, शकुंतला, रावण, झांसी की रानी, बहादुर साह जफ़र सब याद आ जाते हैं. दरअसल चतुर्भुज जी अकेले अइसे नाटककार थे जो ऐतिहासिक नाटक के लिए जाने जाते थे. आकासबानी पटना, रांची, भागलपुर, दरभंगा कहीं भी अगर कोनो ऐतिहासिक नाटक का बात हो, त समझ जाइए कि बात इन्हीं से सुरू होकर, इन्हीं पर खतम हो जाने वाला है. रेडियो अऊर मंच पर अगर कोई भी इतिहास के पन्ना से निकलकर आपके बीच में चलता अऊर बोलता नजर आ रहा हो, त समझ जाइए कि उसके हाथ में चतुर्भुज जी का स्क्रिप्ट होगा. बिहार में रंगमंच पर अगर कोई ब्यक्ति इतिहास को दोबारा ज़िंदा करने का साहस कर सका है त ऊ केवल अऊर केवल चतुर्भुज जी रहे हैं. सही माने में उनके नहीं रहने पर ही इतिहास, इतिहास हुआ; नहीं तो ऊ इतिहास को कभी बर्तमान से पीछे जाने ही नहीं दिए.

अपने बारे में उनका सोच अऊर नाटक के प्रति लगाव कइसा था इसका अंदाज़ आप उनका कहा हुआ बक्तब्य से लगा सकते हैं:
“मेरी रंगयात्रा वैसी जीवनयात्रा से कुछ अलग है। मैं बचपन से ही रंगमंच से जुड़ा रहा। आज तक जुड़ा हॅूं। मैंने यह अनुभव किया कि मुझे जीवन में जो कुछ भी मिला, वह रंगसेवा की बदौलत। मैं मघ्यम वर्गीय परिवार से आता हॅूं। जीवन में सुख कम देखा, दुख-दारिद्र्य-अभाव अधिक देखा और भोगा। कई तरह की नौकरी की। एक नौकरी से अलग होता, दूसरी का दामन थामता। परिवार को भूखे रहने की भी नौबत आई।
इन सब के बीच एक बात जो बराबर बनी रही। एक सूत्र जो बराबर मेरे साथ रहा, वह है नाटक। नाटक की दुनिया अद्भुत है। नाटक ने मुझमें बराबर ऊर्जा दी, बराबर उत्साह दिया। ग़म को भूलने की शक्ति दी.”
स्वयं पाली भाषा में स्नातकोत्तर, नाट्य-शास्त्र में पी.एच-डी. तथा नाट्यशास्त्र के प्राध्यापक तक रहे. बहुत समय तक आकासबानी में रहे, ओहीं से रिटायर हुए. उनके बारे में एगो अऊर बात जो हमरे लिए आदर्स के जैसा रहा ऊ था उनका चरित्र. उनका लम्बाई-चौड़ाई लाल बहादुर शास्त्री जी के जैसा था अऊर चरित्र भी. आकासबानी में रहते हुए उनके साथ के केतना लोग अपने सपूत लोग को ओहीं के नौकरी में एडजस्ट करते चले गए. मगर चतुर्भुज जी कभी इसका सहारा नहीं लिए. उनका सब बच्चा लोग आज भी अपना बदौलत उच्चाधिकारी है.

फ्लैस-बैक समाप्त:
आज चतुर्भुज जी हमारे बीच नहीं हैं, मगर हमरे लिए आज भी लिजेंड से कम नहीं हैं. पारसी थियेटर से लेकर आधुनिक रंगमंच तक, नाटक लिखना, नाटक का निर्देसन करना अऊर अदाकारी करना. जो रोल बिधाता उनके लिए लिखता गया ऊ अदा करते गए. कभी भगवान से कुछ नहीं मांगे, मांगने के लिए कुछ था भी नहीं. जिन्नगी रंगमंच है अऊर हम लोग केवल कलाकार है जो अपना-अपना रोल निभाकर चले जाते हैं – ई बात सबके लिए त सेक्सपियेर का डायलोग होगा, मगर चतुर्भुज जी के लिए हकीकत था. उनका जीवन सचमुच रंगमंच था, जिसपर उनका जीवंत अभिनय देखने का मौक़ा मिलना हमरा सौभाग्य था.
आज पन्द्रह जनवरी को उनका जन्मदिन है!! हैप्पी बर्थ डे, बाबूजी!

पुनश्च:
चतुर्भुज जी के लिखे नाटक, उनका जीवन परिचय और उनके जीवन की झलकियां इस वेबसाईट पर उपलब्ध हैwww.chaturbhujdrama.com

48 टिप्‍पणियां:

  1. स्वाभिमानी जीवन!! बहुत ही जानदार व्यक्तित्व से परिचय करवाया। आभार

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  2. मगध के इस कलाकार को हैप्पी बर्थ डे...

    चतुर्भुज जी के माध्यम से आपने बिहार में रंगमंच की परम्परा का खाका खींच दिया है।

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  3. चतुर्भुज बाबू के बारे मा बहुत बखान किहो है .बड़ा रोचक और प्रेरक है उनका रंगमंचीय जीवन !

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  4. ज्‍यों फिल्‍मों में सोहराब मोदी.

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  5. Aapkee lekhan shailee itnee rochak hotee hai ki, bas padhtehee chale jate hain!
    Chaturbhuj ji ko janamdin mubarak ho!

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  6. चतुर्भुज जी के बारे में जानकर मन प्रफुल्लित हो गया। आप भाग्यशाली हैं जो ऐसे व्यक्तित्व का दिग्दर्शन मिला।

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  7. चतुर्भुज जी से इस परिचय के लिए आपका धन्यवाद।

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  8. चतुर्भुजजी जैसे व्यक्तित्व अपने परिवेश के स्तम्भ बन कर सबको सहारा देते हैं, ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।

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  9. जिविट ... स्वाभिमानि ... आभार आपका इस परिचय के लिए ...

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  10. सलिल दादा ... आप के माध्यम से आज हम सब को इस महापुरुष के बारे में जानकारी मिली ... आपका बहुत बहुत आभार ... साथ साथ चतुर्भुज जी और आपको प्रणाम !

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  11. सलिल भैया,
    चतुर्भुज जी के लिए विनम्र प्रणाम !!
    वे नहीं भी हैं तो क्या हुआ, तुम्हारे इस लेख और स्नेहिल सम्मान के जरिये वे हमेशा के लिए अमर हो गए हैं...
    मुझे नहीं लगता जिस आत्मीयता से, इस लेख में उनका शब्द चित्रण किया गया है उतने मन से, कभी भी, किसी ने लिखा होगा !
    मगध के इस रंग यात्री के लिए कोटि कोटि प्रणाम एवं श्रद्धांजलि !

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  12. मुझे अपने पुत्र का मित्र नहीं पुत्र ही समझते थे. अपनी पुस्तक कारागार की एक प्रति भेंट करते हुए उन्होंने मुझे 'कवि-लेखक' कहकर सम्बोधित किया. मेरी कहानी पढकर बोले,''बहुत हाई लेवल की खानी लिखते हो, भाई तुम तो.'' मैं धन्य हुआ सुनकर...नमन.

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  13. unke saath ek aur khasiyat thi....jitna samay rangmanch ko diya utna samay pariwaar ko bhi diya....pariwaar ko hamesha saath aur ekjoot rakhte rahe....salil Ji, aapne is anokhe andaaz me aaj unhe yaad kiya isliye hum apke bhi abhaari hain.....magadh ka rangyatri hamesha hamare hridya me basa rahega....thanx once again

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  14. सलिल भाई, आपकी तो रचनाएँ ही आपकी पहचान है! अभी आपसे मुलाक़ात नहीं हुई... पता नहीं कभी मिलना हुआ तो क्या होगा? कौन सी पहचान किस पर भारी पड़ेगी?? बहरहाल मगध के रंगकर्मी के सफर में हमसफर बन कर हम गदगद हुए। ऐसी नायाब शख्सियत को हमारा भी सलाम पहुंचे!!

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    1. @ कौन सी पहचान किसपर भारी पड़ेगी..
      त्यागी सर!
      'भार' का तो प्रश्न ही नहीं उत्पन्न होता.. हम तो 'आभार' व्यक्त करते हैं आपका कि आपके स्नेह-पात्र बन सके!! आशीष दें!

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  15. चतुर्भुज जी जैसे विशिष्ट व्यक्तित्व से परिचित करवाने के लिए आभार !

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  16. बहुत ही जानदार व्यक्तित्व से परिचय करवाया। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।

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  17. चतुर्भुज जी जैसे व्यक्तित्व वाले लोगों पर ही शायद ये दुनिया कायम है.
    बहुत शुक्रिया उनसे परिचय करने का.हैप्पी बर्थडे टू हिम

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  18. सिराज़ दानापुरी , ये नाम जाने कितने बरसों बाद आंखों के नाम से गुज़रा है । मैं दानापुर में जिन दिनों रहा करता था तब ये बहुत करीब नाम था । आपकी पोस्ट ने आंखें नम कर दी और दर्द को और बढा दिया । टीसता तो मन रहता ही है हमेशा ।

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  19. जिनका बरनन किए हैं, उनमें से केतना लोगों को एटीज़ में मंच पर अभिनय करते देखे थे। आकासबानी पर त सुनबे करते थे। सत्तर, अस्सी, नब्बे के दसक का एक जुग याद आ गया।

    बढ़िया पोस्ट, चतुर्भुज जी कि नमन, विनम्र श्रद्धांजलि।

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  20. एक युग को जी गया जब सत्तर-अस्सी-नब्बे के दशक में इन महानुभावों को मंच पर देखा करता था।
    आह!
    श्री चतुर्भुज जी को नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।

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  21. मुझे विश्वास है कि चतुर्भुज जी की मरणोत्तर आयु अभी चार युगों तक और शेष रहेगी।

    आपके संस्मरण में श्री चतुर्भुज जी का चरित्र-चित्रण पढ़कर ऐसा लगा कि यह मेरे सपनों का आदर्श था। मैं भी ऐसा ही करना चाहता था। मैं भी ऐसा ही बनना चाहता था। लेकिन "हर किसी को मुकम्म्ल जहां नहीं मिलता.... !" रंगमंच से पैदाइशी लगाव अभी तक जिन्दा है। ऐतिहासिक नाटक सर्वाधिक प्रिय रहे हैं। रोटी की लड़ाई में अपने शौक से कुछ दूर जरूर निकल आया हूँ किन्तु विश्वास है कि एकदिन ’घर’ जरूर लौटूँगा !

    साधु संस्मरण के लिये धन्यवाद !

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  22. चतुर्भुज जी को हमारा प्रणाम और पुण्‍य स्‍मरण।

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  23. चतुर्भुज जी से परिचय के लिए आपका धन्यवाद...मामा जी

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  24. चतुर्भुज जी से पहली बार परिचय हुआ .. नमन .

    आपका आभार

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  25. चतुर्भुज जी जैसे व्यक्तित्व से परिचित करवाने के लिए आभार !

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  26. बहुत कुछ याद हो आया....बहुत ही जाना-पह्चाना नाम था ये आकाशवाणी पटना का...पर उनके समग्र व्यक्तित्व का परिचय आज ही मिला..

    आभार आपका

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  27. चतुर्भुज जे से परिचय करवाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! बहुत बढ़िया लगा! उनको मेरा शत शत नमन!

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  28. ऐसे लोग बिरले ही होते है जी , प्रभावी व्यक्तित्व .
    अच्छी जानकारी.

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  29. वे पूरे चेहरे से मुस्कराते थे---क्या बात है । ऐसे कलाकार और उन्हें इतनी जीवन्तता के साथ सामने लाने वाली लेखनी ,दोनों को ही नमन ।

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  30. एक और प्रभावी व्यक्तित्व के बारे में आपके माध्यम से जाना। नमन करते हैं चतुर्भुज जी को।
    हमारा कमप्यूटर आज ही थोड़ा बहुत सही हुआ है, आपको बधाई भी यहीं दिये देते हैं:)

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  31. चतुर्भुज जी जैसे शानदार व्यक्तित्व से परिचय करने के लिए आभार.....अभी साईट पर भी पढ़ रहा हूँ उनके बारे में

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  32. आप जवने अंदाज अऊर भाषा-शैली में लिखते हैं पढ कर बहुत अचछा लगता है । चतुर्भुज जी के बारे में जानना अच्छा लगा ,भाई साहब,। हमरे पोस्ट पर समय निकाल के अईतीं त हमार मन बड़ा खुश होईत । धन्यवाद ।

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  33. मगध के इस अद्भुत रंगयात्री को सादर नमन।

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  34. सलिल जी!!!चतुर्भुज रचनावली के तीनों खंड किस प्रकाशक के यहां प्रकाशित हुए हैं,कृपया सूचित करें...ताकि मैं इनका अध्ययन कर सकूं.

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  35. बहुत संदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट " डॉ.ध्रमवीर भारती" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  36. बहुत सुन्दर प्रस्तुति यथार्थ को कहती हुई .

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  37. kabhi suna nahi tha, kyonki iss kshetra me kabhi mera jara bhi lagao nahi raha... par aapne bataya to iska matlab hai.. wo pujniya hain.. dil se naman!!

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  38. चतुर्भुज जी परिचय करने के लिए शुक्रिया... मुझे हमेशा याद रहेगा चतुर्भुज जी का जन्मदिवस क्योंकि मेरा एक दिन पहले ही तो है....

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  39. चतुर्भुज जी को जन्मदिन का हार्दिक बधाई |
    ऐसे लोग सचमुच एक आदर्श होते हैं जिनके शौक उनका पेशा नहीं उनकी प्रेरणा होता है |

    सादर

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