हम सोच रहे थे कि हमरे परिवार के सब सदस्य आकर हमको अपना संदेस दिए,लेकिन हमरे मन से जुड़े हुए दिगम्बर नासवा जी का अभी तक कोनो संदेस नहीं आया है. आम तौर पर हमको मेल भेजकर टिप्पणी देने के लिए कहने का आदत पसंद नहीं है. लेकिन जब दिगम्बर जी नहीं आए , त खैरियत लेने के लिए उनको मेल कर दिए.
अभी अभी उनका जवाब आया है जो आपके सामने प्रस्तुत हैः
नमस्कार सलिल जी
आज बहुत समय बाद मेल खोला तो आपका मिल देखा .....
दरअसल २८ जुलाई को मेरे बड़े भाई का फरीदाबाद में अचानक ह्रदय गति रुक जाने से देहांत हो गया इस वजह से कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा था, मन उचाट सा हो गया है ....... धीरे धीरे रोज़मर्रा के जीवन में वापस आने का प्रयास कर रहा हूँ .... अभी तो १२ तक फरीदाबाद में ही हूँ ....
आपके याद रखने का आभारी हूँ ....
दिगम्बर
दिगम्बर नासवा जी हमारे लिए परिवार के तरह हैं. इसलिए हमने सोचा कि आप लोगों को भी इस बात से अवगत करा दें.
हमने इस पीड़ा के छन में उनका हिम्मत बँधाया है!! जो उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़े होंगे, हो सकता है उनको खबर भी होगा. उनके इस सोक में हम बराबर के सरीक हैं!!
