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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

Diamonds are forever!!


कभी-कभी हमको अपना ऊपर बहुत गोस्सा आता है कि जहाँ पढा-लिखा लोग-बाग, अपना बात कहने के लिये गीता-पुरान, उपनिसद अऊर ग्रंथ का उदाहरन देता है, हम सिनेमा का उदाहरन देकर अपना बात कहते हैं. मगर जाने दीजिये मतलब त बात कहने से अऊर समझ में आने से है. कुच्छो हो, सिनेमा त ऐसहूँ हमरे रग-रग में बसा हुआ है.

ऊ का है कि तब तक सिनेमा में आतंकबाद नहीं आया था. अपराध माने स्मगलिंग - ऊ भी हीरा का. रॉबर्ट एगो काला रंग का पोटली निकालकर लॉयन को थमाता है अऊर उसके अन्दर से ढेर सा हीरा निकलकर चमकने लगता है. हीरा से जादा चमक लॉयन के आँख में देखाई देता है. ऊ घूमकर गोली चलाता है अऊर रॉबर्ट ओहीं जमीन पर गिरकर ढेर हो जाता है. लॉयन अपना बाकी आदमी से बोलता है, कफन में जेब नहीं होती, मगर इस मुर्दे की जेब भी है और असली हीरे उसमें ही हैं. निकाल लो हीरे और इसकी लाश को माहिम की खाड़ी में फेंक दो!
बहुत बड़ा मकान था. तिनमहला था मगर बहुत लम्बा-चौड़ा. फाटक के जगह पर बड़ा-बड़ा लोहा का ग्रिल, बीच में छोटा सा दरवाजा, एक आदमी के जाने भर, पीछे एगो गार्ड हाथ में बन्दूक लिये हुये. सीढी चढकर, जैसहिं हम दरवाजा खोले कि घूमने वाला कुर्सी के पीछे से आवाज़ आया, आइये साहब!
सामने पूरा देवाल पर टीवी स्क्रीन लगा हुआ था अऊर फाटक से लेकर एहाँ तक हमरा एक-एक कदम निगरानी में था. एही नहीं, तिनमहला मकान के हर कमरा पर एहीं से निगरानी रखा जा रहा था. हमको सामने वाला कुर्सी पर बइठने का इसारा हुआ.
बोलिये साहब क्या लेंगे, ठण्डा या गरम, चाय या कॉफी?
बस ठण्डा पानी.
क्या साहेब! पहली बार आये हैं तो सिरिफ पानी कैसे चलेगा...  ठण्डा आपो (लाओ)!
ठण्डा नहीं, चाय चलेगी!
जबतक चाय आता, हम अगल-बगल सीसा का कमरा में नजर दौड़ाये. टेबुल के ऊपर लैम्प जलाकर सैकड़ों जवान लड़का सब टेबुल में मूड़ी गड़ाये हुये काम में मगन था.
देखिये साहब! यही हमारा छोटा सा काम है!
एतना बात बोलते हुये ऊ कागज का पुड़िया निकाला अऊर हमरे सामने एक मुट्ठी हीरा निकाल कर रख दिया. सामने चमचमाता हुआ हीरा देखकर हमको भी अजीब तरह का सिहरन होने लगा. याद आया कि बचपन में जब हमरा छोटा भाई दादा जी के ऑफिस जाता था (माँ-पापा के साथ), त दादा जी उसको पोस्ट ऑफिस का तिजोरी खोलकर देखा देते थे जिसमें नोट भरा रहता था. हमरे भाई का आँख देखने लायक होता था ऊ समय. ऊ मम्मी को कहता था कि दादा जी से पैसा माँगने पर मना कर देते हैं अऊर सब पैसा ऑफिस में रखते हैं.
फिर ऊ आदमी हमको पूरा फैक्टरी घुमाने ले गया. मामूली गन्दा पत्थर, एकदम सेन्धा नमक का ढेला जइसा, मगर लेजर से काटने अऊर पॉलिस करने के बाद जब ऊ चमक लेकर हमलोग के सामने आता है त इतिहास गवाह है कि केतना लोग का नीयत खराब हो जाता अऊर केतना खून-खराबा हो जाता है.

पिछला तीन-चार महीना से एतना परेसान रहे हैं कि का बतायें. घर-ऑफिस का रोज का परेसानी के साथ-साथ एगो जरूरी दस्तावेज हमसे पहिले वाला आदमी लेना भुला गया अऊर पकड़ा गया हमारे टाइम में. सबको मालूम था, लेकिन जिम्मेवारी हमरा था. नौकरी में दाग, अनुसासनिक कार्रवायी अऊर पता नहीं का का होता. टेंसन अइसा कि कोई मदद करने वाला नहीं.

एक रोज एगो आदमी मिलने आया अऊर उसको हम मदद के लिये अपना समस्या बताये कि अगर कोई जान-पहचान से दस्तावेज मिल जाये तो हम अपना पइसा खर्च करके कलंक से त बच सकेंगे. ऊ बोला, साहब! आपके लिये हम इतना भी नहीं कर पाये तो लानत हम पर और आप जैसे नेक आदमी को यहाँ परेसानी हो,  ये हमसे बर्दाश्त नहीं होगा. आप मेहमान हैं हमारे. आपका पैसा नहीं खर्च होगा. तीन रोज में ऊ आदमी कागज लेकर हमारे सामने आया अऊर बोला, साहब! आप हंसते हुये अच्छे लगते हैं!

हम परेसानी के लेजर किरन के आँच में कटते अऊर रगड़ाते हुये अपना चेहरा का चमक बचा सके अऊर ई सोचकर खुस थे कि परमात्मा तकलीफ नहीं दे त इंसान हीरा कैसे बनेगा. एही अनजान सहर में ऊ हीरा जइसा आदमी हमको भेंटा गया.

अमित जी त रोज कहबे करते हैं, बाकी आज त हम भी आप लोग को कहेंगे कि
खुसबू है एहाँ के हर बात में,
अरे, कुछ दिन त बिताइये गुजरात में!