गुरुवार, 28 अक्तूबर 2010

ब्लॉग, बच्चे और बेचारा बिहारी ब्लॉगर


दिन ऑफिस से आए तनी मूड ऑफ था, काम के कारन. हमरे साथ एगो बहुत अच्छा बात है कि ऑफिस के दरवाज़ा से बाहर निकलते ही हम भुला जाते हैं कि अभी हमरे पीछे जो बिल्डिंग है, वहाँ हम दिन का आठ से दस घण्टा बिताकर निकले हैं. बस एक्के खयाल मन में रहता है कि घर पर हमरा कोई इंतजार कर रहा है. केतनो थकान हो दिन भर का, जब मुस्कुराते हुए दरवाजा खोलती हैं हमरे लिए अऊर जब बेटी गला में बाँह डालकर झूल जाती है, सब थकान गायब हो जाता है.
इसलिए जब हम मूड ऑफ किए हुए घर में घुसे सबको तुरते समझ में गया कि मामला सीरियस है. तुरते चली गईं किचन में चाय बनाने अऊर बेटी पानी लेकर गई सामने. हम चुप चाप जूता उतारने में लगे थे.
पानी पीने के बाद जब ग्लास बेटी को पकड़ाए हमसे पूछ बैठी, “क्या बात है डैडी, आज की पोस्ट पर कमेंट कम आए हैं क्या?” उसका सवाल सुनते ही हमरा हँसी छूट गया. भुला गए कि हम कौन परेसानी से परेसान थे. अऊर तब लगा कि हमरा ब्लॉग का पागलपन का असर पूरा परिवार पर हो गया है. अब एतना बड़ा घटना हो जाए अऊर हमरे चैतन्न बाबू को खबर नहीं हो होइए नहीं सकता था. अभी हम सोचिए रहे थे फोन मिलाने के लिए कि बेटी फिर बोल दी, “मुझे पता है! आप ये बात चैतन्य अंकल को फोन करके बताएँगे!
कमाल का सर्लॉक होम्स हमरे घर में पल रहा है अऊर हमको पते नहीं था. मन का बात भी जान जाता है. खैर, हम चैतन्न जी को फोन लगाए, बिटिया का बात बताने के लिए. अऊर बिस्वास नहीं कीजिएगा कि उधर से चैतन्न जी छूटते पूछ लिए, “कितने कमेंट आए थे उसपर?” अब हमरा हँसी रुकिए नहीं रहा था. काहे कि हम अगर उनको जवाब देते पाँच, बेटी को पाँच का मतलब समझने में देर नहीं लगता कि हम उनको कमेंट का गिनती बता रहे हैं.  
चैतन्न जी बोले, “क्या बात है, हँसे जा रहे हैं? कुछ कहिए भी.
अऊर हमरे बोलने के पहले ही हमको बैकग्राउण्ड में उनकी बिटिया आशी का आवाज सुनाई दिया कि अंकल हँस रहे हैं तो इसका मतलब है किसी ने कमेंट में पंगा नहीं किया है. उसके बाद हम दोनों आदमी फोन पर बस हँसते रहे,किसी को कुछ बताने का जरूरते नहीं रहा.
बच्चा लोग हम लोगों का बातचीत सुनकर इस आभासी दुनिया के बारे में बहुत कुछ जानने लगा है. जब कभी हम दोनों दोस्त कुछ उत्तेजित होकर तनी गरमी से बात करने लगते हैं, बच्चा लोग अपना अपना मम्मी को कहता है कि लगता है डैडी आज फलाने का पोस्ट के बारे में चर्चा कर रहे हैं. अरे जब पसंद नहीं है तो क्यों पढ़ते हैं उनका पोस्ट. पढ़ेंगे भी और बाद में बहस भी करेंगे.
उधर चंडीगढ़ में भासन चालू रहता है- “लगता है कि उसके पोस्ट पर किसी ने कमेंट कर दिया है. और आप गुस्से में हैं. ये उन दोनों के बीच का मामला है आप क्यों उलझ रहे हैं.
 अब हाल हो गया है कि फोन का घण्टी बजते ही बच्चा लोग दुनो तरफ सचेत हो जाता है अऊर ध्यान से सुनता है सब बात. एगो खराबी भी है हम लोग में कि छिपाकर बात करिये नहीं सकते हैं. सब टर्मिनोलोजी भी समझता है बच्चा लोग अऊर डाउट होने पर पूछ लेता है. एक रोज का सवाल सुनिये. हम सुबह चाय पी रहे थे कि हमरे सामने आकर बिटिया रानी खड़ी हो गईं. पूछने लगीं, “डैडी! ये मॉडरेशन क्या होता है?कल आप अंकल को कह रहे थे कि उसने मॉडरेशन लगा दिया है.
पहले हम घबरा गये कि कईसा सवाल है, फिर सम्भल कर जवाब दिए, “मॉडरेशन मतलब किसी के कमेंट को रोककर रखना और बाद में अप्रूव करके अपनी मर्ज़ी से छापना.
लोग ऐसा क्यों करते हैं?”
पता नहीं बेटा! हमलोग नहीं करते.
बिलकुल ग़लत! आपने भी तो मॉडरेशन लगा रखा है.
नहीं तो! हमारे दोनों ब्लॉग पर मॉडरेशन नहीं है. जो तुम चाहो लिख दो, तुरत छप जाएगा.
क्या बात करते हैं. पिछले दस दिन से कहा है आपको कि मुझे स्टेफ़नी मेयेर की बुक न्यू मूनदिलवा दीजिए, मगर मेरी यह फरमाइश आपने मॉडरेशन में डाल दी है. पता नहीं कब अप्रूव करेंगे.
हई देखिये, अबके हमसे मतलब पूछी अऊर तुरते हमरे ऊपर पोस्टर जईसा लगा भी दी. बेटी ताना मारकर चली गई, हम का करते. मुस्कुराते हुये बगल में पड़ा हुआ मोबाईल उठाये अऊर नम्बर मिलाने लगे.

43 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई ब्लागिंग एक बीमारी है, बहुत दिनों से इसे कम करने की सोच रहा हूँ ! आप दोनों दोस्त कोई तरीका बताओ जिससे इससे पीछा छूटे !
    मुझे लगता है कमेन्ट बक्सा बंद करना ठीक रहेगा मगर क्या बिना कमेन्ट बक्सा नींद आ पाएगी ???
    इस पर रिसर्च करो न भाई लोग ! एक तरीका और ढूँढना , ऑटोमेटिक तरीके से रोज १०० ब्लाग पर कमेन्ट करने का ...बड़ा आराम मिलेगा ! लम्बी पोस्ट पढ़ नहीं पाते ..और पढ़ते हैं तो समझ नहीं आती , सो उसी के कमेन्ट बाक्स से आखिरी और पहले कमेन्ट को मिलकर कमेन्ट करने में भी १० मिनट लग जाते हैं ! फिर ऐसे कमेन्ट बिहारी जैसे लोग ताड़ जाते हैं ...क्या करें बड़ी मुश्किल है :-))

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  2. hahaha...ek dum jirdar post ba .....han i baat to sahi ahi ki blogging ego bemari jaisan ho gaya hai...hum bhi giraft me aane wale the lekin samay rahte bacha liye khud ko ...hehehe ....dhun sawaar ho jata hai ek dum ..... aur i post padh ke hum chandigarh aur noida duno taraf ka scene imagine kar liye ...hehehe

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  3. अच्छी भावनात्मक सच्ची प्रस्तुती ...ब्लोगिंग एक भावनात्मक रिश्ता ही है आभासी दुनिया के लोगों से और ईमानदारी व संवेदनशीलता का प्रभाव यहाँ भी है साथ-साथ धोखाधरी ,तिकरमबाज और एक चेहरे पे कई चेहरे लगाये लोग भी हैं यहाँ ..हाँ आप जैसे लोगों की उपस्थिति से ही ब्लोगिंग में जान है और इसके प्रति आकर्षण भी ...

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  4. थोड़ी जल्दी आया आपके पोस्ट पर.. आज ख़ुशी है इस बात की.. ये आभासी दुनिया है ना बहुत कमाल का है.. ऐसा अपने वश में करता है जैसे सच हो.. मेरे दफ्तर में एक लड़की है अनू.. खेत कभी देखि नहीं लेकिन फसबूक पर खेती में लगी रहती है और किसान जैसा ही परेशानी उसे भी रहता है.. मेरे तीन साल के बेटे को अपने स्कूल में इंग्लिश पोएम प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था.. बोला आप कम्पूटर पर कविता लिखते हैं ना मुझे भी राइम लिख दीजिये.. स्कूल में बोलना है.. और उसकी माँ ने सिखा दिया कि बोलो दिस पोएम इज इटें बाई माय फथर ... अपने क्लास में वो सेलेक्ट हो गया है और इंटर क्लास में भी आशा है अच्छे से रिसाईट करेगा... पोएम था...
    "I am newspaper, I am newspaper
    Go to every home
    I have news from all over the world
    Be it Paris or Rome "...बच्चे जब आपके आभासी दुनिया को शेयर करते हैं .. वह आभासी कहाँ रह जाता है.. सुंदर पोस्ट..

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  5. बताईये, अब बच्चे भी हम लोगों की कमजोरी से खेलने लगे।

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  6. आ मर बढनी के ... हर घर में एक्के खिस्सा।
    हमरो केतना बात मॉडरेशन में लटका है। तनी अप्पन भाईओ के समझा दीजिए, नहीं त टिप्पणी का ऑप्शन बंद कर दिया जाएगा।

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  7. आपने तो पूरे परिवार को ही ब्‍लागमय बना डाला है। अच्‍छा है सबकुछ सांझा ही रहना चाहिए परिवार में। बिटिया बहुत सयानी लगती है उसे प्‍यार कहें।

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  8. अगर आज शोले फिल्म बनती तो गब्बर कहता ........
    "अरे ओ रे साम्भा, तनिक देख कर बतायीओ आज ठाकुर कि पोस्ट पर कित्ते कोमेंट्स आये"
    "सरदार ९८"
    और हमरी पोस्ट पर
    "सरदार ८९"
    अरे ई तो बड़ी ना-इंसाफी है रे.......
    तुरंत बेनामी ११ कमेंट्स और ठेले जाएँ.........


    हा हा हा हा हा
    हमरा घर, रिश्तेदारी सब को ब्लोगर बनाने कि सोच रहे है..... कम से कम अपने लोग होंगे तो कमेंट्स के लिए दूसरे का मुहं तो नहीं देखना पड़ेगा.......


    पोस्ट गज़ब लिखी आपने..........

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  9. बढिया व्यंग्य।

    खूब जानते है बच्चे कि हम ब्लोगिया चुके है।

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  10. हा हा हा .अब जब बीमारी बच्चा लोग पकड़ लिए हैं तो इलाज भी वही करेंगे न .

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  11. :) :) बेटी को किताब दिलवा दीजिए ...कम से कम वहाँ का मोडरेशन तो हटेगा ...बढ़िया और रोचक पोस्ट

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  12. हा हा...बकिया तो सज्जी ठीक है..बिटिया रानी को स्टेफ़नी मेयेर की बुक ‘द न्यू मून’ काहे नहीं लाकर दे रहे हैं?? आज लेते आईयेगा..

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  13. ऑनलाईन टेस्ट का ज़माना है। इसलिए,बच्चों का कंप्यूटर से जुड़ना ठीक है। उन्हें भिन्न प्रकार की ब्लॉगिंग सिखाइए। वे चाहें,तो अपने नोट्स बनाकर ब्लॉग पर रख सकते हैं। शहर से बाहर जाने पर भी,बस्ता छूटने की फ़िक्र नहीं रह जाएगी।

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  14. अरे ई आज कल का बच्चा लोग..सरलक होम से बढ़कर होता है...

    वैसे ई आप बहुत बढ़िया करते हैं कि ऑफिस को ऑफिस छोड़ कर आते हैं...ऐसे ही जहाँ का बात तहां छोरने का आदत पक्का कर लिए त ई ब्लागिंग में भी निर्लिप्त हो सकेंगे.वैसे ई एतना भी सरल नहीं हैं ...नहीं???? काहे कि हम भी बहुत समय से इस परयास में हैं,मगर पूरा सफलता नहीं पाए हैं अभीतक..

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  15. यह तो बहुत अच्छी बात है कि आप ऑफिस का टेंशन घर नहीं लाते...
    और घरवालों से सारी बातें शेयर करते हैं...
    बस यही ब्लोगिंग में भी अपना लीजिये...शट डाउन किया और कमेन्ट,पोस्ट,झगडे की सारी चिंताएं भी शट डाउन :)
    बिटिया बड़ी सयानी है...और बड़ा अच्छा लगा जान कि 'पुस्तक प्रेमी ' भी है...बस वहाँ से मॉडरेशन का ऑप्शन हटा दीजिये :)

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  16. @ कुमार राधारमणः
    आपका सीख नोट कर लिए हैं...बहुत कीमती सलाह है... अऊर नायाब भी!!

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  17. हा हा....इसलिए न कहा जाता है की ये "स्मार्ट जेनरेसन" :)

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  18. सलिल भाई आप भी बातों बातों में मतलब की बात कह ही जाते हैं।

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  19. ई देखा अब तै ई बच्चा लोग भी आपन चुटकी पै उतर आये। बहुत बढिया...

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  20. Mujhe bahut achha laga ki,ghar jane ke liye aap itne utsuk rahte hain! Aur bitiya kee khushnumaa baaten aur harkaten! Chashme-bad-door!
    Wah! Maza aa gaya padhke!

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  21. हा हा हा……… खूब बन्हिया बात कहे हैं सर जी ! बड़ा खराब बीमारी है ब्लॉगिंग अउर कौमेन्ट खोजने का…… जब तक 25-50 आदमी "वाह वाह… क्य बात कही है" ना कह दे तब तक बेचैनी का कीड़ा कुल्बुलाते ही रह्ता है……

    अउर अब त लगता है आपका बात पढ के कि ई बीमारी त इन्फ़ेक्सन वाला भी है…… घर का लोग भी ब्लोगोमेनिएक हो रहा है……

    बहुते देर तक पेट पकड़े हँसते रहे बिटिया की बातों पर !

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  22. बड़े भाई परमात्‍मा ने हमें खुशबूदार फूल बनाया है, क्‍या हम यह खुशबू सब तक नहीं फैला रहे हैं (ब्लोगिंग के द्वारा)!! बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    विचार-नाकमयाबी

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  23. सलिल साहब, एक बात का इत्मीनान हो गया कि कभी आपके दौलतखाने पर पहुंचे और आप न हुये तो नाम बताने पर बिटिया जान जायेगी कि पापा के समर्थन वाले चाचा हैं, चाय नाश्ता मिलेगा आपके लौटने तक, हा हा हा।
    आपके माडरेशन का हम विरोध करते हैं। बिटिया को ’द न्यू मून’ दिलवाई जाये नहीं तो दोस्ती सस्पेंड।

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  24. @मो सम कौनः
    अरे भाई! हम बिहारी हॉस्पिटैलिटी के लिए ऑल इण्डिया में वर्ल्ड फेमस हैं...ई बात अऊर है कि लोग हॉस्टैलिटी के नाम से बदनाम किए हुए है! अऊर आतिथ्य हमरा परम्परा है,इसलिए चाय,नाश्ता, खाना सब मिलेगा...न्यू मून दिलवा दिए हैं.

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  25. .
    ऎ सलिल भाई, जरा एहरो सुनिये तऽ !
    31 लोग का बुड़बक बना दीये तऽ हमको भी बनाइए तबे जानेंगे ।
    अफ़िसवा का टेन्सन घरे कईसे लाएँगें जी..
    घर में एगो बड़का टेन्सन तऽ पहिलेहिन से है,
    तऽ फीज़ीक्स का नियम कहता है कि
    लो कैटगरी का टेन्सन खुदै हाई टेन्सन में बिला जाता है ।
    सोझे ई कहीए न कि भौज़ी के डरे भूतो भाग जाता है, ई टेन्सनवा का चीज है ?
    आब एगो दोसरका बात...
    काल्ह हमारी मैडम जी रद्दीवाला से भिड़ी हुई थी, ऊ ससुरा कहता था के हम मुचड़ा बदरँग अखबार सब नहीं तौलेंगे,
    चिकनका कागज़ सब दिजीएगा तबहिन ईहो धरायेगा । मैडम अलगे गोस्सा रहि थीं कि, खुदै घँटी बजा कर हल गये हो कि जेतना बन सके दे दिजीए, अभी बोहनी नहिं हुआ है, जगा कर डीस्टर्ब कीए, आऽ अब लँतरानी बतियाता है ।
    हम मौज़िया गये, बोलेंगे का भाई.. ई सब रोज देखबे करते हैं, सो मुँह से निकलिये त गया.." अबे ब्लॉगिंग करता था का बे ? "
    मुला इसको मॉडरेशन से बरोबरी लगा के मत देखीएगा.. ई रीकुयेस्ट है !

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  26. 4/10

    सहज हास्य नहीं ला पाया लेखन
    सब कुछ जबरदस्ती का उपजाया हुआ लगा.
    लेकिन आपके स्टाईल मुस्कान ला ही देती है.

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  27. जो झूठे बदनाम करते हैं, हम अपनी गली से देश निकाला दे देंगे जी उन्हें।
    अच्छा किया कि न्यू मून दिलवा दिये आप, दोस्ती रीइंस्टेट।
    शुक्रिया हमारी तरफ़ से कबूल कीजिये, बिटिया की फ़रमाईश मानने का।

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  28. हा हा हा ...तो ब्लॉग बुखार ज़ोरों पर है.. आपकी पोस्ट पढ़ना बहुत आनंद देता है हमेशा ही :)
    बिटिया बहुत होशियार है. डिमांड तो बहुत अच्छी ही की है और मनवाने का तरीका भी जबरजस्त निकाली है .....नेक्स्ट जनरेशन इज़ आलवेज़ इस्मार्टर :)

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  29. Bhai saheb raur comment aur likhal hamara bahut niman lagela.Hamra pas kauno shavd naikhe
    ki raua khatir ka likhi phir bhi man ke rok na paila aur kuchh kah debe ke man kar dela.Raur post dil ke BHojpuri mati se hamara ke jod dela-bas yahi kaphi ba. Ghar me sabka ke pranam kahab.samay mili tab dil khol ke baat hoi. Good Morning.

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  30. @डॉ. अमर कुमारः अब आप त हमरा सब भेदे खोल दिए... बहुत मोस्किल से एस्टैब्लिस किए थे थिओरी ऑफ टेंसन:स्मॉल एण्ड बिग वंस... बाकी आपका आगमन, सब सार्थक कर दिया. मेहरबानी है कि कबाड़ी वाला के गोहार पर भऊजी ई नहीं कहीं कि ई घर पर नहीं हैं, बाद में आना... सब आसीस है आपका!
    @उस्ताद जीः आपको कैसे लगा कि यह कोई हास्य या व्यंग्य रचना है...!नम्बर तो आपने ठीक दिए पर हास्य वाली बात उचित नहीं है!

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  31. हा हा हा ये बच्चे भी कमाल हैं लगता है बिटिया भी बहुत बडी ब्लागर बनेगी। अभी से सब नुक्ते सीख रही है। हंसी बन्द नही हो रही। शुभकामनायें

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  32. आपकी फोन पर पोस्ट के विषय पर चैतन्य भाई से बात करने की आदत के बारे में तो उस दिन देख कर ही सब समझ बुझ लिए थे ! वैसे और ज्यादा क्या कहे ... इस बीमारी के तो बीमार हम भी है !

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  33. ब्लॉग की चर्चा हम ब्लॉगरों के बीच इस कदर प्रवेश कर गई है कि जिंदगी का अनिवार्य अंग सा हो गया है यह, जब तक कुछ लिख न लें या टिप्पिया न लें चैन ही नहीं पड़ता । बच्चों के मुख से आपने इस पोस्ट के माध्यम से बहुत कुछ समझा दिया है ।

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  34. अभी तक मैं उस उचित शब्द की तलाश में हूँ जिससे आपका यथायोग्य संबोधन कर सकूँ , अभी तक आपको चचा बोल रहा था क्यूंकि इसमें अपनापन झलकता है , लेकिन पता नहीं क्यूँ इस शब्द में भी वो बात नहीं है , बाऊ जी कैसा रहेगा ??
    .
    .
    हाँ, ये ज्यादा अपना है , यही ठीक है |
    और रही पोस्ट की बात , तो आपकी सुपुत्री भी जल्द ही आपकी जगह लेने के लिए तैयार खड़ी हैं |
    शुभकामनायें

    सादर

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