मंगलवार, 29 मई 2012

अब तो सचमुच चला बिहारी!!


एगो बहुत मसहूर कहावत है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है. लेकिन तेरह साल का टाइम कोनो एतना बड़ा टाइम नहीं है कि उसको इतिहास जईसा कहा जाए. फिर भी जो हुआ ऊ एकदम हू-ब-हू दोहराने वाला खिस्सा हो गया. आस्चर्ज त नहिंये हुआ उसपर, अफ़सोस बहुत हुआ. मन को समझा लिए कि ओशो कहते हैं कि दुःख को पलट कर देखियेगा त उसमें खुसी देखाई देगा. जादातर आदमी पलट कर नहीं देखता है एही से दुःख, दुःख मालूम पड़ता है.

तेरह साल पहिले कलकत्ता में एगो अस्टाफ के बिआह में हमारा पूरा ऑफिस गया हुआ था. हमरे बॉस भी थे. ग्रुप में एन्ने-ओन्ने का बात चल रहा था. अच्छा बात एही था कि ऑफिस का बात कोई नहीं बतिया रहा था. बात होने लगा रेलगाड़ी में सफर करने का अऊर ओही में बात निकल आया गाड़ी के डिब्बा में सामान चोरी होने का. हमरे बॉस के पास भी एगो अनुभव था जब उनका गया जंक्सन इस्टेसन पर कोई सामान चोरा लिया. ई दुर्घटना सुनाने के बाद ऊ जो कन्क्लूजन बताए ऊ तनी डायलॉग में सुनिए.
“अरे, आपलोगों को क्या पता, बिहारी चोर होते हैं!”
“नहीं सर! रेलवे स्टेशन की चोरियों का नेचर पूरे देश में एक जैसा होता है!”
“आप तो बोलेंगे ही वर्मा जी! मगर जो कहिये, सारे बिहारी चोर होते हैं!”
पहिले “बिहारी चोर” अऊर बाद में “सारे बिहारी चोर” सुनकर त हमरे देह में आग लग गया. हम भी आव देखे न ताव अऊर बिना आगा-पीछा सोचे तड़ से बोल दिए, “मगर इंटरनेशनल क्रिमिनल्स की लिस्ट में अगर भारत के टॉप टेन क्रिमिनल्स का नाम देखा जाए तो उनमें पाँच आपके अंचल के हैं, कहिये तो नाम गिनाऊँ! और संजोग से उसमें बिहारी कोई नहीं!”
माहौल अचानक सीरियस हो गया.

आगे बताने का जरूरत नहीं होना चाहिए कि हमारा ट्रांसफर ऑर्डर दू-चार दिन में हमरे सामने आ गया. ऊ समय पिताजी का तबियत बहुत खराब था. ट्रांसफर रोकवाने का बहुत कोसिस किये. जेतना लोग हमको जानता था, हमारा काम सराहता था, सबको बोले. सबलोग बोला कि कोई मोसकिल काम नहीं है, मगर अफ़सोस लौटकर खुसखबरी सुनाने कोई नहीं आया. खुसखबरी का, ईहो कहने कोई नहीं आया कि सौरी हम आपका मदद नहीं कर सके! हमरे साथ हुए सोलह लोग के ट्रांसफर में से पन्द्रह लोग को मन मुताबिक़ पोस्टिंग मिल गया, बस हमको छोडकर!  बिहारी जो ठहरे!

आखिरी उम्मीद था हमरे पुराने बॉस श्री माधव राव पर. मुम्बई में उनको फोन लगाकर बताए अपना मजबूरी अऊर बोले कि ‘हाँ’ या ‘ना’ जो भी हमको बता दें ताकि हम झूठा उम्मीद पर नहीं रहें. दू दिन बाद उनका फोन आया. आझो उनका बात हमरे कान में गूंजता है.
“सौरी, वर्मा जी! आई कान्ट हेल्प यू आउट!! लेकिन बड़े होने के नाते एक बात कहूँगा कि परमात्मा की इच्छा के विरुद्ध मत जाइए. हो सकता है उसने आपके लिए कुछ और भी अच्छा सोच रखा हो.”

हमको लगा कि सांत्वना दे रहे हैं. हम जाकर ज्वाइन कर लिए. दू महीने के अंदर पिताजी का देहांत हो गया अऊर साल भर के अंदर हमरा सेलेक्सन बिदेस में पोस्टिंग के लिए हो गया. हम घर के लोग को खुसखबरी सुना रहे थे कि माधव राव साहब का बात याद आया. रात को उनका फोन आया बेंगलोर से. “वर्मा जी! कोंग्रचुलेशंस!! डू यू रेमेबर माई वर्ड्स!” अऊर हमरे मुंह से कोनो बात नहीं निकल सका. हम बस “थैंक्स सर” कह पाए!!

आज तेरह साल के बाद फिर से ओही परिस्थिति में एक महीना से घुट रहे हैं. बेटी का दसवां का बोर्ड है अगिला साल अऊर हमरा ट्रांसफर सताईस लोग में सबसे दूर कर दिया गया है. सब लोग के आगे मजबूरी बताकर देख लिए, गिडगिडाकर, समझाकर देख लिए. मगर मदद करने का भरोसा दिलाकर जो गया ऊ दोबारा लौटकर नहीं आया.

बस दू दिन बाद ई सहर से दाना-पानी उठ जाएगा. नया जगह, नया जिम्मेवारी के साथ पता नहीं आप लोग से एतना रेगुलर रूप से मिलना हो पायेगा कि नहीं. सायद नहीं, चाहे कभी-कभी! आँख बंद करके एही सब सोचते हुए माधव राव सर का बात दिमाग में आ रहा था. किताब का पन्ना फडफडाने का आवाज से आँख खुला, किताब बंद करने चले त देखे कि लिखा है:
मैं लोगों के बीच से गुज़रता हूँ और आँखें खुली रखता हूँ. मैं उनलोगों के सद्गुण नहीं अपनाता इसके लिए वे मुझसे नाराज़ हैं. वे मुझसे बेहद नाराज़ हैं, क्योंकि मैंने उन्हें बता दिया है कि छोटे आदमियों के लिए, छोटी मर्यादाएं ही ज़रूरी होती हैं. नाराज़ लोग आग के चारों ओर बैठकर कहते हैं, देखो यह भयानक आदमी और क्या विपत्ति लाता है. उन्हें बौनी मर्यादाओं से डर नहीं लगता. उनके साथ वे सहज ही हिलमिल जाते हैं. अपने मन में वैसे वे सिर्फ एक बात ही चाहते हैं कि उन्हें कोई चोट न पहुंचाए. हालांकि वे इसे सद्गुण मानते हैं मगर वह दरअसल कायरता है. मैं उनके बीच से गुज़रा और मैंने अपने कुछ शब्द वहाँ गिरा दिए. उनकी समझ में नहीं आया कि वे उन शब्दों को फेंक दें या वहीं पड़ा रहने दें. तब मैंने उन्हें ललकार कर कहा – तुम अभिशप्त हो कि कायर हो. जरथ्रुष्ट्र का कोई ईश्वर नहीं, इसलिए वह बुरा नहीं है. मैं ईश्वरहीन हूँ इसलिए सच कहता हूँ और सत्य को तुम्हें भी सुनाता हूँ. अगर मेरे शब्द बेकार गए तो तुम अपने छोटे-छोटे सद्गुणों और नन्हें-नन्हें गुनाहों के साथ नष्ट हो जाओगे!
(नीत्शे – जरथ्रुष्ट्र ने कहा)

71 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सहमत,
    काश लोग आत्मनुशासन को महत्व दें

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  2. नयी जगह पर सफ़ल होने के लिये मंगलकामनायें। घर परिवार में सबको शुभकामनायें।

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  3. दिस इज़ गोइंग टू बी अ परसनल लॉस टू मी।

    जब से आपका टरानसफ़र का खबर सुने हैं दिल्ली न जाने का केतना बहाना बना चुके हैं। अ‍उर आप एतना दूर जा रहे हैं, कि उधर जाने का प्रोग्राम बनते-बनते बनेगा।

    बाक़ी फॉर्मलिटी बाला लाइन न हमको बोलने आता है, न बोल पाएंगे।

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  4. नयी जगह में सब मनोनुकूल हो...
    शुभकामनाएं!
    Hope that soon everything will get set and we will get to read your wonderful posts as often as possible!
    Regards,

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  5. ओशो कहते हैं कि दुःख को पलट कर देखियेगा त उसमें खुसी देखाई देगा. जादातर आदमी पलट कर नहीं देखता है एही से दुःख, दुःख मालूम पड़ता है.
    .
    नई जगह भावनगर है,भावनगर में भावों पलट कर देखिएगा.
    .
    वे मुझसे बेहद नाराज़ हैं, क्योंकि मैंने उन्हें बता दिया है कि छोटे आदमियों के लिए, छोटी मर्यादाएं ही ज़रूरी होती हैं. नाराज़ लोग आग के चारों ओर बैठकर कहते हैं, देखो यह भयानक आदमी और क्या विपत्ति लाता है.
    .
    ये लोग नहीं जानते कि ये क्या कर रहें हैं। हे प्रभु!!!इन्हें माफ़ करना.
    .

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  6. कृपया भावों को पलट कर देखिएगा,पढ़िए.

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  7. सलिल जी, आपको अपने ब्लॉग का नाम बदलकर "रुका बिहारी ब्लॉगर बनकर" कर लेना चाहिये था। खैर मज़ाक एक तरफ़, समाचार जानकर दु:ख हुआ। ठिकाना बदलने की तकलीफ़ और बच्चों की पढाई का हर्ज़ा वाकई माता-पिता का दिल दुखाने की बातें हैं। फिर वह बोधकथा भी याद आती है जिसमें भले लोगों के जगह-जगह घूमने की बात की गयी है ताकि अच्छाई ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँच सके। नये स्थान के लिये शुभकामनायें!

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  8. जाईये कहाँ जाईयेगा
    लौट के फिर यहीं आईयेगा
    इस तुनक भरी उम्मीद पर कायम रहूँगा !

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  9. आपने यह पोस्ट लिखकर अपने मन को हल्का कर लिया,अच्छा रहा.
    ...बाकी यह हमारे लिए किस्मत की बात थी कि आपका तबादला यहाँ हुआ,पर ज़्यादा दिन आपके साथ मेल-मुलाक़ात नहीं कर पाया,इसका ज़रूर अफ़सोस रहेगा.

    ...एक जगह से दूसरी जगह जाना हमारी नियति में है,ज़रूरी यही है कि हम जगह से तो भले जांय,दिल से नहीं.कतील शिफाई जी याद आ रहे हैं....
    "वक़्त के साथ है मिटटी का सफर सदियों से.
    किसको मालूम कहाँ के हैं,किधर के हम हैं"

    नई जगह पर पहुंचकर हाल देना,लिखा कम समझना ज़्यादा,प्रणाम !

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  10. वर्मा साहब,
    आप अपने पोस्ट में रोचक बातों का जिक्र करते हैं जिसे पूरा पढ़े बिना संतोष नही होता है । मानता हूं इतिहास दुहराता है लेकिन घटनाओं को दर्ज करना तो उसकी नियति है । खैर, इसमें चिंता का बात नईखे । पुराने लोग त ईहे कहते हैं कि जहवां का दाना-पानी लिखा होता है,आदमी के ओहीजे जाएके परेला । ई त जिंनगी के चक्र बा । हमार सुझाव बा कि जिनगी में आईल एह परिवर्तन के तहे-दिल से स्वीकार करके आगे बढ़ींष हमार शुभकामना रऊरे साथ हमेशा रही । धन्यवाद ।

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  11. जब परिस्थितियाँ अपने हाथ मे हो ही नहीं तो ईश्वर पर आस्था रखना ही श्रेयस्कर है ...!!नई जगह ,नये काम के लिये बहुत शुभकामनायें |आशा है जल्दी ही आप नियमित लेखन पुनः प्रारम्भ कर पायेंगे ...!!

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  12. उन्हें अपनी बौनी मर्यादाओं के साथ जीने दीजिए ! हालात कठिन सही पर हौसला बनाये रखिये ! सब शुभ होगा !

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  13. मैं उनके बीच से गुज़रा और मैंने अपने कुछ शब्द वहाँ गिरा दिए. उनकी समझ में नहीं आया कि वे उन शब्दों को फेंक दें या वहीं पड़ा रहने दें. तब मैंने उन्हें ललकार कर कहा – तुम अभिशप्त हो कि कायर हो.

    इसके बाद भी कुछ समझाना समझना शेष रह जाता है ?

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  14. सम्भावित प्रयास किए जाने चाहिए पर अन्ततः माधव राव का लॉजिक भी व्यवहार्य है।
    शुभामानाओं सहीत!!

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  15. हमारी आभासी दुनियाँ से कोई कहीं आता जाता नहीं। ज़ख्म लगते हैं तो सहानुभूति सभी जताते हैं लेकिन मरहम कोई लगा पाता नहीं। सभी को अपने कष्ट अपने व्यक्तिगत संबंधों के द्वारा प्राप्त उर्जा से ही सहन करना होता है। इस उम्र में और बच्चों की पढ़ाई के दौर में उनसे दूर रहना कितना कष्टकारी है इसे वही महसूस कर सकता है जिसे इसका सामना करना पड़ता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी वैचारिक रिश्तेदारी यूँ ही चलती रहेगी। हाँ कुछ समय आपको इस आघात से संभलने में लगेगा। हम दिल थामे बाबा विश्वनाथ से आपको नए स्थान पर व्यवस्थित करने और परिवार को बिछोह की इस पीड़ा को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना ही कर सकते हैं। एक वर्ष तो बिटिया के कारण आपको अलग रहना ही पड़ेगा।

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  16. बने बनाये ढर्रे में थोड़ी सी परेशानी, पूर्व नियोजित कार्यक्रमों में परिवर्तन, नयी जगह शिफ़्ट होने का झंझट ...फिर भी कुछ अच्छा ही होने वाला है।
    आप चाहें तो परिवार को दिल्ली में ही छोड़कर एक बरस के लिये नयी जगह जाकर छात्र जीवन की यादें ताज़ा कर लें। आख़िरी में एगो सनीमा का गाना ...."जहाँ जाइयेगा हमें पाइयेगा..."

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  17. शुभकामनाएं, अच्‍छी खबरों की आशा सहित.

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  18. एक बेहद सड़ी हुयी व्यवस्था में रहने वाले लोग धीरे धीरे कांक्रोच सरीखे हो जाते हैं!

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  19. हम पूरा देश घूम चुके हैं। जहाँ औरों ने सोचा था कि हम कष्ट में रहेंगे, हमने सबसे अधिक आनन्द उठाया..

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  20. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, काले धन की धुलाई वाले सरकारी सफाईघर हैं, जहां की नालीयां कांक्रोचों से भरी हैं ...
    इन्हे "सरवाईवल आफ फिटेट्स्ट" का तमगा देकर इनकी कांक्रोचियत को नाभकीय बम के हमले से बच जाने की क्षमता वाला बना दिया गया !!

    वाय मी? कांक्रोचों को ऐसे सवाल नहीं पूछने चाहिये !!

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  21. इस व्यवस्था मे कुछ सरकारी साड़ भी बसते हैं, जिनकी अय्याशी देश-काल-परिस्थिति से परे होती है!!

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  22. बड़े भाई , अब जो सर पर आ गया है उसे खुशी खुशी स्वीकार करिये . आप गुजरात जा रहे हैं . मेरे मन में गुजरात की जो स्मृतियाँ है , उन्हें भुलाना मुश्किल है . दस साल रहा वहाँ और किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं हुई . बहुत सीधे सरल ईमानदार लोग हैं वहाँ . भावनगर में बड़े भाव से स्वागत होगा आपका . चिंता न करें वहाँ भी आप इतने ही सक्रिय रहेंगे जितने यहाँ हैं . मेरा एक फंडा है हम जिस भाषा - संस्कृति में जाएँ उसे दिल से अपनाएँ , फिर वहाँ के लोग भी हमें अपनाने में देर नहीं लगाते . હવે ધોખ્લા , ખમણ , ભાખરી અને ગરબા નાં મઝા લેજો સાહબ . ગુજરાત તમારી પ્રતિક્ષા માં છે . દેર ન કરજો મિત્ર . ગરવી ગુજરાત નાં રાસ ગરબા તમારા સ્વાગત માટે આતુર છે .

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  23. एंथनी डिएंजेलो ने कहा था - आप जहां भी जाएं, चाहे कोई भी मौसम हो, अपनी धूप हमेशा अपने साथ ले कर जाएं।
    तो सकारात्मकता के साथ नई जगह जाएं... हो सकता है कोई बड़ा अवसर आपका इंतजार कर रहा हो।

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  24. theek hai ke waqti taur pe aap kuch pareshan/adhik pareshan honge, naye jagah nai vyavastha me lekin,
    aapka d n a culture hai......o aapko hum logon ke
    madhya hi rahega aisa 'asha hi nahi poorn viswas hai'

    anuj hoon....adhik kya kahoon, agar aap in galiyon me
    na dikhai denge to bahut mayusi hogi.....

    bakiya, aap jahan bhi rahenge.....jamana udhar hi abad rahega....


    pranam.

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  25. आप चिंता न करें सब ठीक होगा ... बाकी ब्लॉग जगत से आप कहीं नहीं जा रहे है ... हाँ यह जरूर है कि एक ब्रेक जरूर ले रहे है आप वो भी कुछ ही दिनो का ...

    बाकी फोन पर !

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  26. ओशो कहते हैं कि दुःख को पलट कर देखियेगा त उसमें खुसी देखाई देगा. जादातर आदमी पलट कर नहीं देखता है एही से दुःख, दुःख मालूम पड़ता है.
    ओशो के माध्‍यम से कितनी सटीक बात कही है आपने ...
    नई जगह पर भी जब आप चाहेंगे ब्‍लॉग जगत आ‍पको वैसा ही दिखाई देगा जैसा आपके लिए आज है ...
    अनंत शुभकामनाएं आपकी वापसी के लिए

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  27. कोनो दिक्कत का बात नहीं कहना आसान है सलिल भाई , जब उम्मीद से आदमी आँखें इधर उधर घुमाता है तो सच्चाई का सन्नाटा बहुत कुछ सिखाता है !
    पहली घटना पर यही कहेंगे कि - " यह तबादला तो बिहार का सम्मान है , अब जो जो बोले ...... हम तो निहाल "

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  28. सलिल जी ,
    बिटिया की पढाई के लिए चिंता करना लाज़मी है .....लेकिन हर परिवर्तन में कुछ न कुछ अच्छाई छिपी होती है .....ऐसे अवसर पर मुझे एक कविता अक्सर याद आती है ---

    ज्यों निकल कर
    बादलों की गोद से
    थी एक बूंद आगे बढ़ी ,,,

    आपका स्थानांतरण कहाँ हुआ है ? इसकी जानकारी नहीं मिली

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  29. हमरा दिमाग खराब हो रहा है। आप किलियर बताते काहे नहीं हैं कि कहाँ/किस सहर में जा रहे हैं। ‘स्मृति शिखर से...’और देसिल बयना फिर से लिखने का पिलान बना रहे थे... मगर "का पर करब सिंगार पिया मोरा आँधर रे...!"

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  30. ऊपर किसी ने टिप्‍पणी में सही कहा कि आप इस आभासी दुनिया से तो कहीं नहीं जा रहे हैं। मैं तो कहता हूं कि राहुल सांकृत्‍यायन जी की पंक्तियां याद करें - सैर कर दुनिया की गाफिल....।
    बहरहाल नई जगह पर सब कुछ सिरे से जमाना,समय तो लगेगा ही। बच्‍चों की पढ़ाई की चिंता भी रहेगी ही।
    आपके ब्‍लाग के हैडर पर जो पंक्तियां लिखीं हैं उन्‍हें कट पेस्‍ट करके यहां लगा रहा हूं। इन पंक्तियों को अपने काम के संदर्भ में रखकर पढ़ लें।
    *
    दोस्त लोग के जिद में आकर हमको ई ब्लॉग फ्लॉग के चक्कर में पड़ना पड़ा.बाकी अब जब ओखली में माथा ढुकाइए दिए हैं, त देखेंगे कि केतना मूसर पड़ता है हमरा मूड़ी पर...
    *

    शुभकामनाएं साथ हैं हीं और हम सब भी यहीं हैं।

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  31. अरे इतनी उदासी भरी पोस्ट!!!!!
    राव साहब की बात ध्यान रखें ...कुछ बेहतर अवश्य होगा......
    देखना बिटिया दसवीं में टॉप करेगी...

    एक बार हमारे पापा का भी भोपाल से जगदलपुर तबादला हुआ था.....तब बड़ा दुखी थे पर वहाँ बिताये ३-४ साल उनके सर्विस पीरियड के बेहतरीन साल थे.........
    सो चिंता मुक्त हो जाइए ....
    लिखते रहिये....
    ढेरों शुभकामनाएँ आपके साथ हैं ही.....
    :-)

    सादर
    अनु

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  32. जाइए आप कहाँ जायेगें,ब्लोगिंग की दुनिया से दूर न रह पायेगें,,,,,,,

    RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, ऐ हवा महक ले आ,,,,,

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  33. बहुत कुछ छोडते हुए ,बहुत कुछ साथ लेजाकर कहीं जमने में कठिनाई (भावनात्मक भी ) तो होती ही है । एक जगह से उखाड कर दूसरी जगह रोपे गए पौधे की तरह ही । लेकिन जल्दी ही उसमें नई कोंपलें मुस्कराने लगतीं हैं । इसलिये आप जहाँ भी रहेंगे अच्छा ही होगा ।
    और अपने प्रति इतना अडिग विश्वास रखने वाला ही असल में सबसे बडा आस्तिक होता है ।

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  34. और हम विदेशियों पर नक्सली होने का इल्जाम लगाते हैं. सबसे ज्यादा जातिवाद तो हमारे अपने देश में है.
    सलिल जी ! आपके बॉस की ही तरह मेरा भी यही मानना है कि जो होता है कुछ अच्छे के लिए ही होता है. आपकी इस समय की तकलीफ समझ सकती हूँ परन्तु यकीन मानिये विपरीत परिस्थितियों में दुनिया भर में स्थान परिवर्तन किये हैं और हमेशा सुख पाया है.इत्मीनान रखिये सब अच्छा ही होगा.

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  35. Aapko aneko shubh kamnayen detee hunAap kis daurse guzar rahe honge ye mai apne anubhav se jantee hun.

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  36. मुझे तुम्हारी कमी यहाँ बहुत खलेगी सलिल ,

    बहुत कम समय में बहुत नज़दीक आने की क्षमता बहुत कम लोगों में होती है ऐसे असाधारण क्षमता के धनी लोग, विपरीत परिस्थितियों में भी, अपना स्थान बना लेते हैं !

    बाकी बिहारी हर जगह लिखता रहेगा तुम्हारी कलम के जरिये हम रोज बातें करेंगे हमें ऐसा विश्वास है !

    इतने कम समय में तुम्हारी लेखनी और प्यारे दिल ने इतना प्यार पाया है कि किसी को भी इर्ष्या होने लगे !

    हमेशा तुम्हारे साथ चाहे कही भी रहो ...

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  37. मेरे लिए एक अभिभावक का दूर होने जैसा है... और क्या कहूँ...

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  38. घटना के दुहराव की तरह राव साहब की बात भी अपना प्रभाव दुहरावे.... आमीन।
    सादर।

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  39. अच्छे लोगों को इस दुनिया में कुछ ज्यादा ही कष्ट झेलने पड़ते हैं।

    कुछ दिनों के लिए भले दूर रहें लेकिन इस आभासी जगत में मिलना-जुलना जारी रहेगा।
    शुभकामनाओं के साथ।

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  40. प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।
    आजकल तो इतना साधन हो गया है कि बात होने में दिक्कतें नहीं हैं। बच्चे समझदार हैं। हो सकता है आपकी अनुपस्थिति में वे आपकी भी जिम्मेदारी बखूबी निभाएँ और आशातीत सफरता प्राप्त करें। ईश्वर से यही मेरी प्रार्थना है। क्योंकि मैं भी ऐसी परिस्थितयों से गुजर चुका हूँ। आपने जो नीत्से का उल्लेख किया है, वह पढ़कर अद्भुत साहस का संचार हुआ। बहुत-बहुत आभार नयी जगह पर आपके सुख, समृद्धि और ओज की वृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना के साथ।

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  41. बिटिया के दसवीं में होने से चिंता तो लाज़मी है...पर सही है....परमात्मा ने कुछ अच्छा ही सोच रखा होगा...शुभकामनाएं .

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  42. ईश्वरम यत्करोती, शोभनमेव करोति| trust me when I utter it, my personal experience confirms it.

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  43. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    पोस्ट साझा करने के लिए आभार!
    शुभकामनाएँ!

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  44. जगह तो बता देते प्रभु कहाँ जा रहे हैं... नई जगह के लिए आपको शुभकामनाएं...
    और हाँ एक वादा तो आपको करना ही पड़ेगा- जहाँ भी जा रहे हैं हम लोगों से मिलने के लिए वक़्त जरुर निकालिएगा...

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  45. राव साहब जो कह रहे थे शायद सच ही था ... आशा के साथ हर चीज़ कों लेना ही सुखकर होता है ... जीवन चलने का नाम है ...
    आशा करते हैं संपर्क बना रहेगा आप जहां ही रहें खुश रहें ... मस्ती से रहें ... बहुत बहुत शुभकामनायें हैं हमारी ...

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  46. सलिल जी , पोस्टिंग तो सर्विस में लगी ही रहती है. आशा करता हूँ की पहले की तरह यह पोस्टिंग भी आपके लिए शुभ हो और ढेर सारी खुशियाँ ले आये.... शुभकामनायें.

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  47. हमारे लिए तो आप कहीं नहीं जा रहे, जहां थे वहीं हैं! आपको पढ़ेंगे तो हम फिर भी उसी मीठी मीठी भोजपुरी/बिहारी मे ही....मुमकिन है और ज्यादा बड़ी रेंज में!!

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  48. बहुत दिनों से मैं भी अस्‍तव्‍यस्‍त हूं और वर्तमान में पुणे में हूं तो नेट से ही तकरीबन दूर हूं। लेकिन आज आपकी पोस्‍ट पढ़ी, आपको शुभकामनाएं। जहां भी रहेंगे वहीं से हमारे करीब रहेंगे।

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  49. ईश्वर ने कुछ अच्छा ही सोच रखा हो ...
    शुभकामनायें !

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  50. सलील वर्मा जी,
    मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि एक जगह पर रहते-रहते मन ऊब जाता है ।दूसरा जगह मन में एक परिवर्तन लाता है । नए दोस्त मिलते है एवं मिलता है एक नया परिवेश । प्रभु से मेरी कामना रहेगी कि नए जगह पर आप सपरिवार सानंदपूर्वक रहें । मुझे आशा है कि दूर रहकर भी आप हम सबके बहुत करीब रहेंगे । मेरे नए पोस्ट "बिहार की स्थापना के 100 वर्ष" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  51. थोडा निराश जरूर हुआ पर ये सब तो चलता रहता है
    नई जगह ,नये काम के लिये बहुत शुभकामनायें.....मामा जी

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  52. अब तक तो शायद नयी जगह आ ही गए होंगे।
    छोटा हूँ, बस शुभकामनाएँ दूँगा।

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  53. वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  54. डेराये के कौनो बात न बा अभी तक अच्छा भईल बा त अगवो अछे होई|

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  55. जौन है की तौन ई टरान्स्फरवा से तो हमहूँ भोत परेसान बा ,मगर का करी नौकरी जो है .

    बहुत बहुत शुभकामनायें .

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  56. बोस इज आलवेज राइट. अगली पोस्टिंग के लिये शुभकामनायें. और बिटिया के उज्वल भविष्य के लिये भी.

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  57. कहाँ हो प्रभु दर्शन तो दो.... ०९८९३०७२९३० पर तो मीठे बोल ही सुना दो...

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  58. दूसरी जगह मन में एक परिवर्तन लाता है । नए लोग मिलते है एक नया परिवेश मिलता है,,,,
    बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई..सलिलजी,,,,

    रक्षाबँधन की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    RECENT POST ...: रक्षा का बंधन,,,,

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  59. सलिल भाई कहाँ चले गये???????????? सच म्4ए ब्लागजगत मे आपके जाने से सुनसान सा लगता है। अब लौट आओ। बहुत बहुत आशीर्वाद। राखी की हार्दिक शुभकामनायें। भगवान आपको सपरिवार सदा सुखी रखे।

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  60. गोजब का लिखले बानी राउर एकदम्मै ठीक बा नीचवा वाला नीत्शे की केयन कौन वाला तानी मोसकिल बा पूरा बात पकड़ात नइखे एको दू हाली औरो पढ़े के चाहत रहे देखीं बताइब

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  61. बाऊ जी , माफ कीजियेगा , मेरे अनुभव आप लोगों की तुलना में बहुत कम हैं और सीधे ये लिख देना कि जो होता है अच्छा होता है मुझे यकीन है , बहुत आसान है ,लेकिन मैं ऐसा नहीं कहूँगा , मैं कहूँगा कि मुझे पूरा अनुभव है इस बात का और उसी से मेरे भीतर ये विश्वास आया है कि जो होता है सर्वश्रेष्ठ होता है (ऐसा अनुभव जिसने हमारा जिंदगी बदल दिया) , अब तो ईके पीछे हम बहुते सालिड लोजिक भी बना लिए हैं "मैं भगवान से कहता हूँ कि प्रभू हम टॉप मार दें तो मजाइ आ जावे क्यूंकि हमें लगता है कि फिलहाल हमारा टॉप मारना ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ होगा लेकिन कोई हमसे ऊपर है(अगर आप भगवन को मानते हैं), जिसको हमारा बीता हुआ कल याद है , वर्तमान दिख रहा है और आने वाला कल मालूम है , वो ज्यादा अच्छे से जानता है कि हमारे लिए क्या जरुरी है ठीक वैसे ही जैसे बच्चा तो दिन भर अपने पिता से टॉफी खिलाने की जिद करता है लेकिन उस पिता को मालूम है कि बच्चे को कितनी टॉफी खिलानी हैं और कितनी नहीं"

    सादर

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