शनिवार, 27 अगस्त 2016

मुर्गी, कबूतर और हैप्पी बर्थ-डे झूमा!!

PROLOGUE:
चौक से चलकर, मंडी से, बाज़ार से होकर
लाल गली से गुज़री है काग़ज़ की कश्ती
बारिश के लावारिस पानी पर बैठी बेचारी कश्ती
शहर की आवारा गलियों से पूछ रही है
कश्ती का साहिल होता है –
मेरा भी क्या साहिल होगा??

एक मासूम से बच्चे ने
बेमानी को मानी देकर
रद्दी के काग़ज़ पर कैसा जुल्म किया है!
गुलज़ार
                      
**************



कोनो चीज को देखने के बाद अचानक दू अदमी के मन में एक्के साथ, एक्के तरह का बिचार आये अऊर दुन्नो कोई एक्के साथ बोल पड़े, “खरीद लें?” हो सकता है होता होगा अइसन संजोग, तब्बे तो दू अदमी एक्के साथ एक्के बात बोले तो लोग कहता है कि घर में कोनो मेहमान आने वाला है.



ऊ रोज भी रोड के साइड में एगो आदमी टोकरी में बहुत सा मुर्गी का बच्चा (चूज़ा) बेच रहा था. एकदम खेलौना जइसा मुर्गी का बच्चा देखकर, हम दुन्नू के मुँह से एक्के साथ निकला, “खरीद लें?” “खरीद लें डैडी?” और घर में हमरे दू गो मुर्गी का बच्चा मेहमान बनकर आ गया. दुन्नो को एगो गहरा प्लास्टिक के टब में रखकर उसको दाना डाल दिये. थोड़ा देर बाद जब उसको बालकनी में छोड़कर हमलोग दू मिनट के लिये घर के अंदर गये, त गजब हो गया. कहीं से एगो बाज का नजर पड़ गया था अऊर ऊ बाज एगो चूजा को लेकर भाग गया. बेटी को बहुत अफसोस हुआ. अऊर फिर सुरुआत हुआ बचा हुआ चूजा का हिफाजत करने का.

बड़ा सा डिब्बा, डिब्बा में खिड़की बनाया गया अऊर उसमें उसका रहने का इंतजाम किया गया. देखते देखते डिब्बा का साइज बड़ा होने लगा. बेटी उसका नाम रखी मुर्गी (हमारे पटना वाले घर में जो पालतू कुत्ती थी उसका नाम भी हमलोग डॉगी रखे थे) अऊर हम उसको बुलाने लगे कबूतर के नाम से. कबूतर काहे, सो मत पूछियेगा. बस मन से यही नाम निकला. जबकि बाद में पता चला कि ऊ न मुर्गी था, न कबूतर... ऊ मुर्गा था.


बड़ा होने के साथ-साथ ऊ दिन भर खुल्ला में घर में खेलने लगा. सिरीमती जी बेटी के इस्कूल जाने के बाद अकेले रहती थीं घर में. लेकिन ऊ कबूतर उनको जमीन पर बइठकर तरकारी काटने नहीं देता था. चुपके से आता था अऊर धनिया का पत्ता, पत्ता गोभी अऊर प्याज लेकर भाग जाता था. सिरीमती जी त बस दोबारा से छोटा बच्चा का माँ के अवतार में आ गयी थी. उसको प्यार करना, जब ऊ उनके गोड़ पर चोंच से मारकर खाना माँगता था, त खाना देना अऊर तरकारी लेकर भागने पर गुसियाना.

बेटी के इस्कूल से आ जाने के बाद त बेचैनी देखने लायक होता था उसका. बेटी जऊन बेड पर सोती थी उसके पास बाइठ जाता था. जब बड़ा हो गया था तब उड़कर बेड पर चला जाता था अऊर झूमा के पीठ पर या कंधा पर सो जाता था. बेटी जब पढा‌ई करती त उसके स्टडी टेबुल के कोना में बइठा रहता.


सबसे मजेदार दिरिस होता था जब हमलोग पेप्सी पी रहे होते थे. अगर ऊ अपने डिब्बा में बंद हुआ त खिड़की से झाँककर, बेचैनी में बार बार चोंच मारकर हमलोग को ईबताने का कोसिस करता कि उसको भी चाहिये. उसकोतब तब चैन नहीं आता, जब तक उसके गिलास में उसको पेपेसी नहीं मिल जाता. जेतना देर ऊ खुला रहता हमलोग में से किसी के गोदी में बइठकर टीवी देखना उनका भी काम होता. सिरीमती जी जइसे उठीं, उनसे पहले ऊ हम्रे गोदी से उतरकर किचेन में हाजिर हो जाता.

टैब पर चैट करते समय, हमारे टाइप करने के साथ ऊ भी टाइप करके सेण्ड कर देते थे जनाब. एक बार शिवम बाबू पूछ बइठे कि दादा ये आपने क्या लिखा है, तब बताना पड़ा कि ऊ कबूतर ने लिखा है. लैपटॉप पर काम करते समय जब उसका cursor भागता था, त ऊ बार-बार चोंच मारता था. हमलोग बहुत खेलवाड़ करते थे उसके साथ.

बेटी के हॉस्टल चले जाने के बाद भी ऊ उसको नहीं भूला. एक रोज हमलोग उसको सुताकर, बेटी से स्काइप पर बतिया रहे थे. बेटी का आवाज सुनकर एतना बेचैन हो गया कि का बताएँ. जब उसको निकाले त भागकर बेटी के रूम में गया देखने अऊर जब स्काइप पर देखाई दी, त बेचैन हो गया.

जब बहुत बड़ा हो गया त कुकड़ू कूँ बोलने लगा था. अऊर पटना अऊर दिल्ली जाते समय उसको किसीके पास छोड़कर आना भी समस्या था, इसलिये अपने एगो परिचित के मदद से उसको भावनगर में पक्षीशाला में दे आए. बहुत अफसोस हुआ था उस दिन. सोचे कि कइसे लोग अपना बूढ़ा माँ-बाप को बिर्धास्रम में छोड़ आता है.

बेटी उसके प्यार में चिकेन खाना छोड़ दी (हालाँकि बहुत बाद में फिर से शुरू कर दिया). केतना अच्छा होता कि जीव-हत्या के मनाही का सिच्छा देने से जीव-प्रेम का सिच्छा देते हमलोग.

**************

EPILOGUE

झूमा पिछला दू साल से हमसे जिद कर रही थी कि डैडी मेरी मुर्गी पर आप पोस्ट क्यों नहीं लिखते. मगर उसको अपना परेसानी कहाँ तक बताते. लिखेंगे... लिखेंगे कहकर टालते रहे.

आज झूमा का सालगिरह है, त सोचे कि चलो उसको जन्मदिन का एही तोहफ़ा दे दें. हैप्पी बर्थ डे, बिटिया रानी!

33 टिप्‍पणियां:

  1. केतना अच्छा होता कि जीव-हत्या के मनाही का सिच्छा देने से जीव-प्रेम का सिच्छा देते हमलोग.
    काश की ऐसी सोच बन पाती इंसान की। ..
    वही शानदार अंदाज में सार्थक मर्मस्पर्शी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर. हमारी तरफ से भी हैप्पी बर्थ डे, बिटिया रानी! सदा सुखी रहो.

    उत्तर देंहटाएं
  3. हैप्पी बर्थडे, झूमा और थैंक्स कि इसी बहाने हम सब की भी डिमांड पूरी हुई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. मर्मस्पर्शी पोस्ट .... शिक्षा तो वाकई जीव प्रेम की ही दी जानी चाहिए | शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  5. ढ़ेरों आशीष व अशेष शुभकामनाओं संग बधाई जन्मदिन की
    आपके पोस्ट की बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत प्यारा मासूम संस्मरण झूमा जैसा ही . शब्द-शब्द में आपका स्नेह छलक रहा है . बधाई झूमा को जन्मदिन की और ऐसे स्नेही पिता मिलने की . बधाई आपको भी इस लाड़ली के माता--पिता बनने की .

    उत्तर देंहटाएं
  7. Der aaye durust aaye kehna galat na hoga .... Bada pyara tohfa diya aapne bitiya ko ..... Or kbutar ke jariye vradhha aashram or jeevon ke sanrakshan ki baat pr snka dhyan aakeshit kiya ..... Aapki post ka sb isiliye intzaar krte hain ek sath kitna kuchh le aate hai sn k liye .... Jhooma ko happy wala b'day ..... Aapko shubhkamnayen
    sadar

    उत्तर देंहटाएं
  8. पके सो मीठा होय...दो साल बाद लिखा और क्या खूब लिखा! हमने पालतू कुत्ते, बिल्ली की गाथाएं तो सुनी थी, कुकुडू कू की आज पहली बार सुनी.... झूमा को तो खुश कर ही दिया आज आपने, साथ ही कड़क नाथ को भी अमर कर दिया!

    उत्तर देंहटाएं
  9. कउनो जमाना में जब कबिता के नाम पर खिलबाड़ करने का आदत था तब बच्चा लोग के मन मनसायन खातिर कार्टून बनाये थे ... होटल में जेंटलमैन डरेस में मुर्गा (झूमा वाला नहीं) अउर आरडर जोहता बेटर .... नीचे तुकबंदियो था -
    कुकडू कुं पहुँचे होटल
    पूछ पड़ा उनसे वेटर -
    "क्या लेंगे साहब, मुर्गा ?"
    कुकडू कूं कांपे थर थर "

    खूब सलिल भाई ... बिल्कुल 'हिया कोचिंग' (अगर हार्ट टचिंग का भोजपुरिया वर्जन इहै हो तो ) ...... राजेश राज

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बड़े भाई! आपका बात हिया हुलसावन होता है हमेसा! सनेह बना रहे!!

      हटाएं
  10. बहुते बढियां पोस्टवा लिखले हैं बिहारी बाबू...झूमा बिटिया के लिए ढेर सारा हेप्पी वाला बड्डे...:) :)

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावपूर्ण।रोचक मगर दुखांत दास्तां

    उत्तर देंहटाएं
  12. सबसे पहले तो प्रिय झूमा बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई, स्नेहाशीर्वाद के साथ !
    आपके इस संस्मरण ने हमें भी वर्षों पहले अपने घर पाले हुए doggies और puppies की याद दिला दी! ये पालतू जीव हमारे घर-परिवार का हिस्सा ही बन जाते हैं और जाने के बाद बहुत-बहुत रुलाते हैं ! ये बहुत समझदार होते हैं और कहना अतिश्योक्ति न होगी कि ये इंसानों के मुक़ाबले ज़्यादा वफ़ादारी से अपना रिश्ता निभाते हैं !
    इंसान तो अपने बूढ़े माँ-बाप तक को नहीं बख्शते... :(
    और अंत में गुलज़ार साहब की बात के तो कहने ही क्या ! वो कलम भी फिरा दें तो काग़ज़ बोल उठे ...

    ~सादर
    अनिता ललित

    उत्तर देंहटाएं
  13. मुझे तो याद नहीं, लेकिन अम्मा बताती थीं कि हमारे यहाँ ऐसी ही एक मुर्गी थी, फिर आया उसका बेटा कुकडूकूं ... मुर्गी रेडियो में गाना सुनती, मुर्गा कुत्ते की तरह रखवाली करता ...
    झूमा का प्यार, आपलोगों का ख्याल, रेणु की दिनचर्या , सब मन को छू गए

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपके इस संस्मरण को पढ़कर हमको अपना गोलू कबूतर याद आ गया। बहुत प्यार से लिखा है आपने। बिटिया को बधाई और ढेर सारा आशीर्वाद।

    उत्तर देंहटाएं
  15. आपके इस संस्मरण को पढ़कर हमको अपना गोलू कबूतर याद आ गया। बहुत प्यार से लिखा है आपने। बिटिया को बधाई और ढेर सारा आशीर्वाद।

    उत्तर देंहटाएं
  16. कितना सुन्दर संस्मरण!पढ़ते-पढ़ते आँखोें के सामने नन्हे-से चूज़े को दुलारती प्यारी झूमा घूम गई . यह स्नेहमय मन और चेहरे पर कोमल मुस्कान सदा बनी रहे - तुम सदा प्रसन्न रहो झूमा !

    उत्तर देंहटाएं
  17. एक लम्बे समयान्तराल के बाद की धमाकेदार एंट्री :) बधाई शुभकामनाएं आशीर्वाद जन्मदिन की झूमा के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  18. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति ऋषिकेश मुखर्जी और मुकेश - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

    उत्तर देंहटाएं
  19. इतना प्यारा गिफ्ट मिला है न बिटिया को, कि झूमा भी झूम गयी होगी ख़ुशी से... काहे दे आये पक्षीशाला को? वो वहां कितना उदास होगा... :( ले आओ उसे वापस। पशु पक्षी बोल नहीं पाते लेकिन भावनाएं इंसानों से कहीं ज़्यादा शुद्ध होती हैं उनकी। हमारे एक परिचित अमरीका गए तो अपना दो साल का कुत्ता भाई को सौंप गए। एक साल हो गया,उस खूब चंचल कुत्ते ने भौंकना तक छोड़ दिया है बस एक जगह बैठा रहता है टकटकी लगाये। तुम उसे वापस ले आओ।

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत देर तक चुपचाप बैठे रह गये पोस्ट पढ़ के ..बहुत पहले ऐसे ही पहाडी चूहों का एक जोड़ा लाकर पाल लिए थे ..उनके जाने पर इतना रोई माँ और खुद भी कि फिर इसके बाद हिम्मत ही नहीं हुई ...झूमा को बहुत सारा प्यार और आशीष ..यादगार पोस्ट और यादें

    उत्तर देंहटाएं
  21. झूमा बिटिया को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई !!! इस बर्थडे पर उसकी इच्छा पूरी हो गई। लेकिन अब कबूत्तर मुर्गा हमेशा हमें याद रहेगा। आभार !!

    उत्तर देंहटाएं
  22. सबसे पहले तो प्रिय झूमा बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई, स्नेहाशीर्वाद के साथ !
    आपके इस संस्मरण ने हमें भी वर्षों पहले अपने घर पाले हुए doggies और puppies की याद दिला दी! ये पालतू जीव हमारे घर-परिवार का हिस्सा ही बन जाते हैं और जाने के बाद बहुत-बहुत रुलाते हैं ! ये बहुत समझदार होते हैं और कहना अतिश्योक्ति न होगी कि ये इंसानों के मुक़ाबले ज़्यादा वफ़ादारी से अपना रिश्ता निभाते हैं !
    इंसान तो अपने बूढ़े माँ-बाप तक को नहीं बख्शते... :(
    और अंत में गुलज़ार साहब की बात के तो कहने ही क्या ! वो कलम भी फिरा दें तो काग़ज़ बोल उठे ...

    उत्तर देंहटाएं
  23. जीव प्रेम हो जाये तो मन अपने आप ही पीछे हटने लगता है ... बहुत दिलचस्प और इमोशनल पोस्ट लगाए हैं ... बिटिया को जनम दिन की बधाई हो ... और गुलज़ार साहब को लिख के तो मजा दूना कर दिये हैं आप .... कभी कभार ब्लॉग पर कुछ लिखा जरूर करें ... इसी बहाने सिलसिला बना रहता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  24. इसे पढ़कर तो मन से ‘आह’ भी निकली और ‘वाह’ भी ।
    ऐसा लगता है कि प्रेम की भाषा को मनुष्यों की तुलना में अन्य जीव ज़्यादा गहराई से समझते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  25. झूमा बिटिया को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत बढ़िया संस्मरण। प्यार की भाषा हर कोई समझता है, चाहे वह इंसान हो या पशु पक्षी।

    उत्तर देंहटाएं
  27. @ India Didi दीदी जी, आपको हमारा कमेंट इतना पसंद आ गया कि आपने उसे ही कॉपी/पेस्ट कर दिया यहाँ ! आपके मन की भावनाओं को लेखक तक पहुँचाने के लिए आपका पहला कमेंट ही काफ़ी था वैसे तो ...
    अब आपको क्या समझा जाए ...
    ~अनिता ललित

    उत्तर देंहटाएं