पिछला दू एपिसोड के बाद त हमहीं एतना सेंटीमेंटल हो गए कि पहिला बार लगा कि केतना बड़ा परिवार बना लिए हैं हम. अऊर सीरियसली, ई फैमिली में से कोनो एगो आदमी दू चारो दिन के लिए लापता होता है त हमको खबर लग जाता है. दिव्या बहिनअऊर सुलभ सतरंगी गायबे हैं. सुलभ बाबू त बता दिए कि ब्यस्त हैं, लेकिन दिव्या बहिन लगता है सास के सेवा में लगी है. केतना भुलायल लोग भेंटा गए, अजय झा जी, अबिनास बाचस्पति जी अऊर सानु सुक्ला जी. एही असली बात है, परिवार का लोग केतनो दूर चला जाए, प्यार से बोलाइएगा त खिंचाएल चला आता है. आइए मिलते है कुछ अऊर फैमिली मेम्बर सेः
अभिसेक पटना का बुतरू है. घरेलू, सुसील अऊर गृहकार्य में दक्ष लड़िका है. लिखता है त सब ग्रामर भुला जाता है, काहे कि ऊ प्यार का ग्रामर पढकर लिखता है... दिल से, बिना बनावट के. गाना का सौखीन है अऊर कबिता का भी. क़ैफी आज़मी, गुलज़ार साहब जनाब के फेवरेट हैं. रफ्तार के प्यार में अंगरेजी गाड़ी सब के पीछे लगा रहता है. दोस्ती किसको कहते हैं इसका साच्छात प्रमान. बेंगलुरू में रहने पर भी पटना जिंदा है, इसके मन में अऊर मित्र मण्डली में. तनी मनी पागल है हमरे जईसन.
शैलेंद्र झा हमसे अभी हाल से जुड़े हैं. चंडीगढ में रहा रहे हैं. फोन किए त अईसे बतिया रहे हों जईसे हमरे साईड से आवाज आ रहा हो कि जी मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूँ कौन बनेगा करोड़पति से. जब बात उनके मुँह से निकला त बताए कि ऊ हमरा सभे पोस्ट पढ गए हैं सुरू से अंत तक. झा जी, एतना पेसेंस कहाँ से ले आए भाई.
नीलेस माथुर रेगिस्तान में कबिता का फूल खिलाते हैं.मन में गहरा दर्द छिपाए हैं अऊर ई दर्द को रहस्य में लपेटकर रखे हैं. कुछ है जिसको सबके सात बाँटना नहीं चाहते हैं, बस कबिता के माध्यम से निकल जाने देते हैं. हमको बड़ा भाई मानते हैं अऊर एक बार हमरा किया हुआ टिप्पणी को अपने ब्लॉग का सर्वश्रेष्ठ टिप्पणी बता दिए. इनका प्रेम है, नहीं त अईसा कोई बात नहीं लिखेथे हम.
पंकज मिश्र पत्रकार हैं. खबर के अंदर से खबर निकाल कर सजाते हैं. घाट घाट का पानी पिए हैं,मगर अब सुस्ता रहे हैं, एक जगह रुककर आरम से लेखन को स्मय दे रहे हैं.
त्यागी जी वरिष्ठ है हमरे. सिक्षक हैं अऊर भारत का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेस से हैं. इनके ब्यंग लेखन का धार गजब का है. दिन भर का थकान इनका एगो पोस्ट पढकर दूर हो जाता है. आजकल देखाई नहीं दे रहे हैं.
मुकेस कुमार सिन्हा बैजनाथधाम के बासिंदा हैं… फिलहाल दिल्ली में अपना परिवार अऊर दूगो बच्चा के साथ रहते हैं. दिल्ली को हादसा का सहर बोलते हैं. कबिता बहुत समझदारी का करते हैं... बीच बीच में गायब हो जाते हैं.
अनामिका जी का सदा त पूरा ब्लॉग दुनिया में गूँज रहा है. दिल्ली के पास फरीदाबाद से हैं. इनको हमसे सिकायतहै अऊर हमको इनसे. लेकिन मजबूरी है कि हम दूनो भाई बहन एक दूसरा का सिकायत दूर नहीं कर सकते हैं. इनका उदास कबिता हमको कस्ट पहुँचाता है अऊर हमरा बोली से ई तबाह रहती हैं. न ई खुसी वाला कबिता लिखती हैं, न हम अपना बोली बदल सकते हैं. का करें,एही बोलिए त आत्मा है ई ब्लॉग का, इसके बिना त सरीर चोला माटी का रे!
जय कुमार झा जी का नाम त ऑनेस्टी प्रोजेक्ट डेमोक्रेसी हो गया है. बहुत ऊँचा ऊँचा पद पर काम किए हैं. फिर भी लोकतंत्र का असली मूल्य के लिए समर्पित हैं. जब ई गायब हो जाएँ त समझ लीजिए कि कोनो मिसन पर हैं. सभे ब्लॉग पढते हैं अऊर टिप्पणी देते हैं. बहुत सुलझा हुआ इंसान हैं.
बबली का नाम सुनते के साथ मिष्टि दोई याद आ जाता है. ऊर्मि चक्रबॉर्ती, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में रहती है. इसका कबिता चाहे सायरी पढने के बाद हमको बचपन का याद आ जाता है. जेतना निश्छल लिखती है, ओतने गहरा भाव छिपा रहता है.
भोले बाबा के नगरी कासी के सदस्य हैं हमरे देवेंद्र जी. बेचैन आत्मा के नाम से जादा मसहूर हैं. इनका कबिता में अनुभव झलकता है. बहुत सांत सोभाव के आदमी हैं.
दिगम्बर नासवा जी के साथ त अजीब लुका छिपी वाला रिस्ता बन गया. जब तक हम दुबई में थे, तब तक उनसे भेंटे नहीं था अऊर जब परिचय हुआ त हमरा दुबई छूट गया. लेकिन बिदेस में बसे हुए ई कबि के मन में भी बहुत कोमल सम्बेदना छिपा है.
राज कुमार सोनी पत्रकार हैं. जबर्दस्त लिखते हैं, चाहे पद हो चाहे गद्य. बहुत पारखी नजर है इनका. आस पास फैला हुआ कोई भी घटना इनका नज़र से नहीं बच सकता है. जो भी बोलते हैं बिगुल बजाकर. आजकल अपना पुस्तक का बिमोचन के सिलसिला में राजधानी में ब्यस्त हैं, इसिलिए एहाँ पर लिखना बंद है.
करण समस्तीपुरी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. कबि हैं, समीक्षक हैं, साहित्यकार हैं अऊर इनका कलम का अऊर सब्द जाल का लोहा भले दुनिया मानता हो, हम त सोना मानते हैं. इनका देसिल बयना पढने के बाद त हम इनका जबर्दस्त ए.सी. हो गए (दुनिया फैन हो जाता है). सबसे बड़ा खासियत त एही है कि इनका एक बिधा का असर दोसरा बिधा पर देखाई नहीं पड़ता है.
अविनास चंद्र बहुत सच्चा कबि हैं. इनका एक एक सब्द माणिक के तरह कबिता में जड़ा रहता है. कबिता का अर्थ का गहराई समाधि का अनुभव कराता है. बाबा भोले के तिर्सूल पर बसे हैं कासी नगरिया में. अपने बारे में कहते हैं कि पूरी तरह से बासी हैं लेकिन फिर भी ताजा हैं. भीड़ में से एक चेहरा है, लेकिन अभिमान है कि इनका चेहरा अपना है.
डॉ. दिव्या... बिदेस में डॉक्टरी कर रही हैं. हमरी बहन हैं. एतना गहरा गहरा बात लिखती है कि कह नहीं सकते कुछ. हमरा ज्ञान चुक जाता है. एही से हम कमेंट नहीं करते थे. पट से सिकायत कर दीं कि खाली राखी बाँधने से भाई बहन का रिस्ता होता है. बहन के ब्लॉग पर कमेंटकाहे नहीं करते हो. अब दोसर कोई हो तो बर्दास्त कर लीजिए, बहिन का गोस्सा बर्दास्त करना असम्भव.
अब लगता है कि बसुधैव कुटुम्बकम का मंत्र पूरा हुआ. एसिया से युरोप तक अऊर ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका तक फैल गया है परिवार. ई परिवार में अऊर भी केतना लोग हैं. लोकेन्द्र सिंह राजपूत, सुज्ञ यानि एच. राज जी, राधा रमण, मनीश छाबड़ा, देवेश प्रताप, वाणीगीत, डॉ. अमर, मृदुला जी, अहमद खान अकेला जी अऊर भी बहुत सा लोग. हमरा कोसिस रहा है कि ई पूरा परिवार को समेटकर एक साथ एक जगह लोग से मिलवाएँ. लेकिन जहाँ दू गो बरतन होता है ओहाँ सोर त होबे करता है. हमरा गलती से अगर किसी को भुला गए हों, त जोर से चिल्ला कर याद करा दीजिएगा. हम माफी माँग लेंगे. परिवार को बनाए रहिए, तबे एगो संजुक्त परिवार बन पाएगा.
अब जाकर लग रहा है कि मन हल्का हुआ है. बड़ा लोग से एक बार फिर से आसिर्बाद माँगते हैं चरन स्पर्स करके. हमहूँ अजीबे एमोसनल फूल हैं… आप का समझे अंगरेजी वाला फूल माने बुड़बक..दुर! एमोसनल फूल माने ऊ फूल जिसका इमोसन का महँक सारा दुनिया में फैलता है.
(क्रमशः)









