गुरुवार, 4 नवंबर 2010

प्रकाश पर्व - दीपावली

हमरे बिहार में एगो अजीब तरह का मान्यता है, कहीं अऊर भी हो सकता है, मगर हमको पता नहीं है इसलिए बिहारे का बात करते हैं. हाँ , मान्यता है कि अगर कोनो परब त्यौहार के दिन परिबार में मृत्यु जईसा कोनो असुभ घटना घट जाए, तो त्यौहार नहीं मनाया जाता है. केतना बार तो घटना कई पीढ़ी पहले का होता है , लेकिन उसका पालन पीढ़ी दर पीढ़ी करना पड़ता है. हर पीढ़ी अपने बाद वाला पीढ़ी को इसका सूचना देकर जाता है.  
मगर इसके साथ भी एगो काट है. अगर किसी भी पीढ़ी में उसी त्यौहार के दिन अगर कोई लड़का पैदा हो जाए तो त्यौहार मनाना फिर से सुरू हो जाता है. यहाँ भी बेटी लोग के साथ अन्याय हुआ है कि अगर बेटी पैदा हो तो त्यौहार नहीं मनाया जा सकता. अब मान्यता है ही इसीलिए कि इसको हर कोई मानता है. बिरोध करने का आजादी है, नहीं मानने का भी आजादी है, लेकिन मानने के लिए बस दिल का सुनना पड़ता है.
हमरे परिबार में दीवाली नहीं मनाया जाता था. अब अगर मना लेते तो कौन देखने जा रहा था कि हमरे सात पुस्त पहिले किसका मृत्यु दीवाली के दिन हुआ था. अऊर कौन बुरा मानने जाता. लेकिन परम्परा का बंधन मामूली डोरी जईसा होता है, एतना कमजोर कि एक झटका से  टूट जाए अऊर एतना मजबूत कि बिना किसी बंधन के बाँधे रहता है. इसीलिए हमलोग दीवाली नहीं मनाते थे. बस सब को देखते थे पूजा करते हुए.
दीवाली के दिन घर में बेटी लोग का दिन होता है. दू दिन पहिले से घरौंदा बनकर तैयार. हमरे जमाना में ईंटा जोड़कर घरौंदा बनाया जाता था. फिर उसपर मट्टी थोपकर, गोबर से लीपकर सूखने को छोड़ दिया जाता था. सूखने के बाद घर पर पुताई के बाद बचा हुआ चूना में रंग घोरकर, घरौंदा को रंग बिरंगा रूप में सजाया जाता.
घरौंदा बास्तव में घर का मॉडेल होता है. इसके अंदर पकाया हुआ मट्टी का बना बरतन में खील और फरही (धान और चावल, रेत में भूना हुआ) रखकर, लछमी गनेस को बईठाना और पूजा करना. सब काम घर का बेटी लोग करती है. हमको लगता है कि इसके पीछे एही भावना होगा कि लछमी जी से प्रार्थना करना कि घर को धन धान्य से परिपुर्न रखें. है बिरोधाभास एहाँ पर भी. बेटी, जो आपके घर को धन धान्य से परिपुर्न रखने का बरदान माँग रही है, उसके पैदा होने पर दोस नहीं कटता है, काहे कि पराया घर का अमानत है. खैर, सब सजावट में घर का लड़का लोग भी बहुत मदद करता है. या कहिये कि सजावट का जिम्मा लड़का सब के ऊपर रहता है.
धीरे धीरे ईंटा अऊर मट्टी का जगह पर कागज अऊर कार्डबोर्ड का घरौंदा बनने लगा, सजावट के लिए रंगीन रंगीन चमकीला कागज उसके ऊपर साटा जाने लगा. कुल मिलाकर सब एकदम मॉडर्न हो गया. घर में कब परम्परा फूआ, मौसी से होते हुये, बहिन के मार्फत बेटी लोग तक आता गया अऊर ऐसहीं एक पीढ़ी से दूसरा पीढ़ी तक चलता चला गया, पता नहीं.
हमरा सबसे छोटा भाई राज, जब दीवाली के रोज पैदा हुआ तो उसके पैदा होने से जादा खुसी इस बात का था कि अब हम लोग दीवाली मना सकते हैं. फिर हर साल दीवाली का आनंद दुगुना हो गया.  सब लोग का जईसा हमलोग भी अंग्रेजी कलेंडर के हिसाब से जनमदिन मनाते हैं, लेकिन हमरा छोटा भाई के पैदा होने के बाद उसका जनमदिन हमलोग दीवाली के दिन मनाने लगे. हमलोग के लिये दीवाली सच में प्रकास परब के जईसा है, हमरे परिबार के ऊपर जो अभिसाप का अंधेरा छाया था, हमरे भाई राज के जन्म के प्रकास से मिट गया.
आप सब लोगों को दीवाली का हार्दिक सुभकामना! आपके जीबन में हमेसा सुख अऊर समृद्धि का प्रकास फैलता रहे एही मनाते हैं आज के दिन!!
(दोनों चित्रः मेरे घर के)

50 टिप्‍पणियां:

  1. दीपावली की रौनक बच्चों से ही है। बच्चे ठहरे ईश्वर का ही प्रतिरूप। उनकी उदासी का ठीक ही समाधान निकाला उसने। दीपावली को परिजन के देहान्त का अंधेरा प्रकाश-पर्व पर स्वजन के जन्म से ही छंट सकता था।

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  2. अंधविश्वासों के तम को दूर करता यह ज्योतिर्मय आलेख।

    ज्योति पर्व के बारे में, ज्योति पर्व पर!!

    आपको भी बधाई, दीपोत्सव की शुभकामनाएं।

    और हां राज को भी जन्मदिन की बधाईयां।

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  3. परिवार में किसी के निधन पर त्यौहार न मनाने की परम्परा छत्तीसगढ़ में भी है।
    आपके आलेख से बिहार की संस्कृति के बारे में अच्छी जानकारी मिल जाती है।

    आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं।

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  4. ye parampara rajasthan me bhee hai.Bundelkhand me bhee hai .meree ek sahelee jo punjab kee hai unke yanha rakhee nahee mante use din kisee ka dehavsaan ho gaya tha.......
    deepavalee kee hardik shubhkamnae.......
    chote bhaiya ko janmdin kee shubhkamnae........
    sath hee shubhyatra............

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  5. चलिए अंत भला तो सब भला ! दिवाली मनाई तो जाने लगी !
    आपको और आपके परिवार में सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं !

    राज भाई को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  6. सलिल जी दीवाली पर एक अच्छी पोस्ट पढने मिली

    दीपपर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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  7. सलिल भैया, कहाँ आप पूर्व के खांटी बिहारी और कहाँ हम उत्तर पश्चिम सीमांत (अब पाकिस्तान में) के खांटी खत्री....... और ये हिन्दू हमारे विचारों और परम्पराओं को मज़बूत रखता है... जो परम्परा आपके यहाँ है - व्ही थोड़े बहुत फेरबदल के साथ हमारी भी है..... जब गाँव में रहते थे.... तो ऐसे ही छोटा घरोंदा हम लोग भी बनाते थे... और उस पर चन्ने और चावल के लड्डू द्वारा लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा गेहूं लकड़ी के बारीक सरकंडों को जलाकर करते थे....... और यहाँ दिल्ली में रेडीमेड घरोंदे मिलते हैं...... पर पूजा का इस्टाइल वही है......
    आपके ब्लॉग के माध्यम से सभी ब्लोग्गर बिरादरी को ह्रदय से दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं ..........
    "ह्रदय के अनंत से प्रफुलित प्रकाश आपके चहुँ और आलोकित हो..... "

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  8. Bihari babu.........ek dum aap to pura bihar ka saundha mitti ka mahak la dete hain, blog pe......:)
    aapko dipawali ki bahut bahut subhkamnayen...:)

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  9. सलिल जी सबसे पहले तो आपके छोटकू भाई प्रकाश को जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामना.. सर ये प्रथा हमारे संवेदनशील होने को दर्शाता है.. और आदमी होने के लिए ये जरुरी था और है भी.. आज के समय में हम इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि निजी एकल परिवार में होने वाले किसी अप्रिय घटना के प्रति जरा सी भी संवेदना नहीं जगती.. कुछ वर्जित नहीं करते.. मैंने लोगो को निगम बोध घाट लंच आदि करके जाते हुए देखा है कि वहां बहुत देर हो जायेगी... ईश्वर करे किसी परिवार में ऐसा ना हो लेकिन यदि हो रहा तो संवेदना की उस डोर को जीवित रखने में कोई हर्ज़ नहीं.. सुन्दर चित्रण.. दीपावली की हार्दिक शुभकामना..

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  10. सलिल जी , इस दीपावली के शुभ अवसर पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें

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  12. आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना!

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  13. प्रकाश जी को जन्‍मदिन की शुभकामनाएं। सलिल भाई आपकी इस पोस्‍ट ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। हमने भी बचपन में घर के आंगन में दिवाली पर मिट्टी के घर बनाएं हैं। अब यह बात अलग है कि सचमुच का घर कोशिश करके भी आज तक नहीं बना सके। दिवाली की शुभकामनाएं।

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  14. पाँच साल हुए, दिवाली पर घर जाना नहीं हो पाता है...अच्छा लगा वो सब यहाँ फिर से पढना|
    शुक्रिया सलिल जी इसे लिखने का|
    आपके पूरे परिवार को प्रकाश जी के जन्मदिन और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  15. अपनत्व की शैली में अच्छी जानकारी दी है आपने ! पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनायें सलिल !

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  16. ये परंपरा पूरे हिन्दुस्तान में है शायद या कम से कम उत्तरी भारत में तो है ही .और जब भी ऐसा कहीं सुनती हूँ क्षोभ और क्रोध की मिलीजुली सी अनुभूति होती है :) पर सच कहा आपने परम्परा की डोरी है ऐसे ही तो टूटती नहीं .
    आपके भाई को जन्म दिन की बहुत बधाई
    और इस ज्योति पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये.

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  17. क्या याद दिला दिया ,सलिल जी,
    कॉलेज में आने तक मैं घरौंदा बनाती थी....(छोटी बहनों....और पड़ोस की बच्चियों के लिए.. मेरी बड़ी डिमांड थी.... क्यूंकि मैं बड़े नए डिज़ाईन के घरौंदे बनाया करती थी...अब तो देखती हूँ, लोंग रेडीमेड घरौंदे ले आते हैं...या फिर लकड़ी के और उसे हर साल सजा देते हैं...पर अब बड़े शहरों में संभव भी नही..(फोटो क्या आपकी बिटिया की है..घरौंदा और वे दोनों बड़े प्यारे लग रहें हैं.)

    यह प्रथा थी तो पहले,पर अब टूटती जा रही है...एक तो संयुक्त परिवार नहीं रहें...सब अलग-अलग शहरों में रहते हैं...और एक चीज़ और देखी, पंडितों के विचारों में बदलाव....अगर तीज-त्योहार नहीं होंगे तो उन्हें दान-दक्षिणा कैसे मिलेगा?

    दो साल पहले मेरे ससुराल में तीज के दिन किसी की मृत्यु हो गयी....हम दूर रहने वालों ने यह सोच कि अब तो तीज नहीं होगा....सिर्फ व्रत रखा, नए कपड़े नहीं लाए....मिठाई वगैरह नहीं बनायी....और उसी शहर में रहनेवालों ने पूरे विधि-विधान से तीज मनाई क्यूंकि पंडितों ने ऐसा कहा था.

    आपको दीपावली की असीम शुभकामनाएं

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  18. @रश्मि जीः
    जी हाँ! यह तस्वीर मेरी बिटिया की है... दोनों तस्वीरें घर की ही हैं..
    घरौंदा मैंने बनाया है, आज भी मैं ही बनाता हूँ...
    @ जन्म दिन मेरे भाई का है,जिसका नाम राज है... मैंने दुबारा पढकर देखा, पता नहीं कैसे यह आभास हुआ और सभी प्रकाश जी को जन्मदिन की बधाई कहने लगे..

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  19. पहिलका वाला फोटू तो एकदम वालपेपर जैसा दिख रहा है...कितना सुन्दर फोटो है...वो तो हम लास्ट में लिखा हुआ देखे की दोनों फोटो घर का ही है :)

    चचा मेरा एक दोस्त है प्रकाश वर्मा, नाम तो उसका प्रकाश है लेकिन उसके घर दिवाली नहीं मनाया जाता..यही कुछ कारण था.. :(

    .

    हम बिलकुल भूले हुए थे घरोंदा का बात, अभी एकदम से याद आ गया...घरौंदा बनाना घर में मेरा काम था :(

    हैप्पी दिवाली चचा...

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  20. बहुत बढ़िया और सच्चाई बयान किया है आपने आज भी कम से कम बिहार में इस परम्परा का निर्वाह अब तक की पीढ़ी करती आई है ..आगे पता नहीं..वैसे इसमें से लड़की के जन्म वाला प्रसंग को हटा दें तो मानवीय संवेदना आधारित परम्परा है ये ...

    आप सभी को खासकर इमानदार इंसान बनने के लिए संघर्षरत लोगों को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें....

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  21. अच्छा लगा पढ़कर.



    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

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  22. सलिल जी !!! दीपावली की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    भारत में बहुत सी विविधताएँ हैं, लेकिन वहीं बहुत सी परम्पराएँ संपूर्ण देश में कुछ फेर-बदल के साथ देखने को मिलती हैं ,आपने जिस परम्परा का उल्लेख किया वह राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में भी देखने को मिलती है ।

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  23. एक दम सही पोस्ट है। घरौंदा आप बनाते हैं और वह तो घरे में नहीं इधरो दिख रहा है।
    चिरागों से चिरागों में रोशनी भर दो,
    हरेक के जीवन में हंसी-ख़ुशी भर दो।
    अबके दीवाली पर हो रौशन जहां सारा
    प्रेम-सद्भाव से सबकी ज़िन्दगी भर दो॥
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    सादर,
    मनोज कुमार

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  24. अरे!
    मैंने तो दो बार देखा था...फिर भी गलती हुई??
    माफ़ करेंगे...राज जी को शुभकामनाएँ..

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  25. हाँ यू पी मे भी सेम तू सेम मान्यता है और उसका काट भी डिट्टो इहे है .... आप भी न हर बार भूल हुआ बहुत कुछ याद दिला जाते हैं ...:)

    तीसरी बार बोल रहे हैं ..लेकिन अच्छिये बात है

    हैप्पी दीवाली ...... :)

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  26. सलिल जी, जिस प्रथा का जिक्र आपने किया है कम से कम उत्तर भारत में तो सब तरफ़ यह प्रचलित ही है। बचपन की तो तपती लू भरी दोपहरी नहीं भूलती, त्यौहार कैसे भूल जायेंगे? खत्म हो गया वो सब। उन सस्ते से मिट्टी के दियों की चमक, चीनी के बने हाथी, शेर, बैल में जो आनंद था वो सिर्फ़ याद है।
    बहुत अच्छा लगा कि आप परंपराओं को न सिर्फ़ बचाये हुये हैं, बल्कि अपने बच्चों तक बखूबी पहुंचा भी रहे हैं।
    दीपावली की असीम शुभकामनायें।

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  27. सलिल जी इस तरह की मान्यता मध्यप्रदेश में भी है। मेरे चाचाजी का देहांत देव उठनी ग्यारस पर हो गया जिसके चलते अभी तक हमारे घर में देवउठनी ग्यारस नहीं मनाई जाती। एक और मान्यता है कि पालतू गाय के बछड़ा पैदा हो जाए इस दिन तो फिर से त्योहार मना सकते हैं।
    आपको और आपके परिवार को महापर्व दीपोत्सव की शुभकामनाएं।

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  28. आपको भी दीपावली की शुभकामनायें... सादर

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  29. सलिल जी ,

    घरौंदा बहुत सुन्दर लग रहा है और बेटी बहुत प्यारी ...भाई राज के जन्मदिन की ढेर सी बधाई ...
    और रही मान्यता की बात तो यह हमारे समाज भी मानी जाति है ...कोई दूसरों की भावनाओं को सोच ठेस नहीं लगाना चाहता ..जबकि सच तो यह है कि यह भी नहीं जानते कि किसकी वजह से त्योहार मनाना बंद हुआ ...

    दीपावली की आपको और आपके समस्त परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ

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  30. बधाई।आपको व आपके परिवार को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  31. दीवाली की शुभकामनायें। ईश्वर करे कि आपके सारे त्योहार सदा खुले रहें।

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  32. आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को दीपावली पर्व की ढेरों मंगलकामनाएँ!

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  33. प्रदूषण मुक्त दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  34. दीपावली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं....

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  35. शब्द और भाव की लौ सदा जलती रहे,दीपावली पर यही कामना है।

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  36. ऐसी परम्पराएँ अक्सर देखने को मिल जाती हैं , इनका भी अपना महत्व होता है .......! अपने इसका वर्णन किया अच्छा लगा ...!
    दीवाली की शुभकामना भाई

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  37. राजस्थान में भी ऐसी प्रथा है ...किसी त्यौहार को इस तरह नहीं मनाये जाने को ओक होना कहते हैं ...
    ऐसे छोटे घरोंदे बनाये और सजाये हैं हमने भी ...
    बिटिया बहुत प्यारी है और उसका छोटा सा घर भी ...
    राज जी को जन्मदिन की बहुत शुभकामनायें ..!

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  38. हमें तो ऐसी किसी प्रथा का पता ही नहीं था...ऐसी गलत प्रथा का विरोध होना चाहिए...जन्म मृत्यु किसी के बस में नहीं...ये जब होना हो तभी घटित होता है उसकी वजह से बेक़सूर लोग पर्व न मना सकें, ये गलत बात है...
    आपके यहाँ तो राज भाई पैदा हो गए लेकिन उन घरों परिवारों के बारे में तनिक सोचिये जो अभी भी किसी राज के पैदा होने के इन्तेज़ार में बैठे अँधेरी काली दीपावली मनाने को बाध्य हैं...

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  39. हुज़ूर... मैं फिर आ गया...आपसे बतियाने!

    ई जौन बतिया एगो मान्यता को लेके आप किये हैं न, बिल्कुल सही कहे हैं। ऐसनै मान्यता हमरे कानपुर-कन्नौज-फ़र्रुख़ाबाद-मैनपुरी-इटावा परिक्षेत्र मे भी है।

    ये मान्यताएँ भी तो हमारे अनेकत्व में एकत्व का आभास कराती हैं।

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  40. आपको एवं आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  41. सबसे पहिले तो इस प्रकाशमय पोस्ट शुभ दीपावली की बधाई! अाप हर त्यौहार पूरे उत्साह के साथ मनायें यही कामना है.
    मुझे खेद है कि मै अापको जवाब ससमय नही दे पाया. इन दिनो इंटरनेट से दूरी बनी हुई है. सीमित समय मे प्राथमिकता यही रहती है "कम से कम समय मे ज्यादा से ज्यादा पोस्टें पढुं" इसके बाद जरुरी प्रतिक्रिया कमेंट करुं. अंत मे स्वंय के ब्लोग का ध्यान अाता है. करियर संघर्ष, नौकरी, पढ़ाई अौर घरेलू जिम्मेदारियों के बीच रस्साकस्सी चल रही है. यहाँ क्या क्या बताउं? शायद फोन पर बात हो. बहरहाल अाप जैसे अादरणीय स्नेहीजनों से संदेश के रुप मे उर्जा मिलती है.

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  42. आपका ब्लॉग पढने के बाद बचपन की सारी कारस्तानियाँ याद आ जातीं हैं, कितनी तैयारियां करते थे हम, घरौंदों को बनाने के लिए , उनमे दिए जलाते, अगर थोडा बड़ा होता तो फूलझडियों की छुवन भी उनमे होती. आप सचमुच बधाई के पात्र हैं , दीपावली की ढेरों शुभकामनायें !

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  43. salil ji ,
    aisi paramparayen aaj bhi bahudha kayam hain.aapne bahut hi khoobsurati ke saath bhaut hi gahrai se bahut badhiya baat likhi hai,jo ki beti v-bete ke bhed bhav ko lekarhai.
    umdaa prastutikaran---
    poonam

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  44. कुछ ऐसी परम्पराएं समाज में बनी हुयी हैं जो अब टूटती जा रही हैं समय के साथ साथ .... और जहां हैं ..... वहां परिवार वालों को ऊपर उठ कर तोड़ देनी चाहियें ये परम्पराएं .... खैर ... आपके भाई को जनम दिन की मुबारकबाद .... और आपको और पूरे परिवार को दीपावली की मंगल कामनाएं ...

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  45. हमारे यहाँ भी ऐसी ही प्रथा है और आज तक हमारे घर में काली चोदस मतलब छोटी दिवाली नहीं मनायी जाती और पता भी नहीं है की इस दिन किसका निधन हुआ था बस निभाए जा रहे है ये प्रथा और ये झूमा की रीसेंट फोटो है बड़ी क्यूट लग रही है !

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  46. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  47. आपके घर में दीपावली दोबारा मनाई जाने लगी , खुशी की बात है , हलानी हमारे घर में इस तरह से कोई त्यौहार खंडित तो नही है फिर भी ये रिवाज हमारे यहाँ भी है |

    सादर

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