गुरुवार, 20 मई 2010

धन्यवाद!!

अब का बताएँ, इ पोस्टवा लिखला के बाद तुरते हमको पटना जाना पडेगा मालूमे नहीं था। और आप लोग का इतना प्यार मिलेगा इहो हम नहीं सोचे थे। सबसे पहले एक बार फिर सुमन जी से माफ़ी माँगते हैं की उनको हमारे कारण कोई तकलीफ उठाना पडा हो इसके लिए। काहे से कि कोई भी आदमी कोई व्रत लेता है तो उसको तोड़ना बहुते कठिन काम होता है। लेकिन हमको ख़ुशी है कि सुमन जी हमको इज्जत दिए और हमारे खातिर अपना व्रत तोड़ दिए।
आज एगो बात तो समझ में आइये गया है कि ईमान दारी का बहुते कदर है ज़माना में। हमको बिहारी का नाम से भी कुछ लोग इज्जत देता था, पहचानता था। लेकिन जब से हम अपना असली परिचय दिए तब से त हमारा इमानदारी के कारन भी लोग हमसे जुड़ गया है।
हम पटना में बैठ कर एकदम आदिम जुग में चले गए हैं। गर्मी चरम सीमा पे है, और बिजली नदारद। बस एकदम आदिम जुग का आदमी हो गए हैं। बस इ गर्मी में एक बतिया का ख्याल हमेशा आता है कि हमको तो घरवा में बैठकर भी गर्मी लगता है और हम एयर कंडीशन में आराम कर लेते हैं। का मालूम केतना मजूर रास्ता पर बोझा ढोता है, रिक्सा चलाता है और खेत में काम करता है।
चलिए आते हैं इतवार को तो जम के बतियाएंगे।

8 टिप्‍पणियां:

  1. जी गर्मी तो बहुत है.
    लौटिये तो फिर बात होगी.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हमको तो तब भी था और अब भी है आप पर विश्वास !! जल्दी लौटिये , बहुत छुट्टी माना लिए!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज एगो बात तो समझ में आइये गया है कि ईमान दारी का बहुते कदर है ज़माना में। हमको बिहारी का नाम से भी कुछ लोग इज्जत देता था, पहचानता था। लेकिन जब से हम अपना असली परिचय दिए तब से त हमारा इमानदारी के कारन भी लोग हमसे जुड़ गया है।
    .... bahut khoob! kuch alag tarah ke post....padhna achha laga...
    Haardik shubhkamnayne

    उत्तर देंहटाएं
  4. इन्तजार करते हैं यहीं बैठकर...अब गर्मी में कहाँ जायें. :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. बिजली का तो इ हाल हो गया है की का बताएं. जेकरा घरे फ़ोन करते हैं...उहे रोने लगता है. लाइन अईबो किया तो एतना कम भोल्टेज की ससुरा पंखवो खाली डोलता है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. छुट्टी मनाकर जल्द वापस आ जाइये! आपके नए पोस्ट का इंतज़ार रहेगा!

    उत्तर देंहटाएं