मंगलवार, 24 अगस्त 2010

राखी पर कुछ प्रेमपत्र - बहनों के

सबेरे से माथा में अजीब सा दरद हो रहा था.समझे में नहीं आ रहा था का लिखें.एतना असमर्थ कभी नहीं पाए हम अपने आप को, खास कर लिखने का मामला में. मामला राखी का था अऊर भाई बहिन का,  त तनी होसियारी से लिखना पड़ता है. काहे कि दुनिया में एकबार भगवान भी गुसिया जाए त हम मना लेंगे (हालाँकि उनके साथ त बहुत दिने से लड़ाई चल रहा है) लेकिन अपना एकलौती बहिन को समझाना बहुत मोस्किल है.

पिछला का मालूम केतना साल से राखी बहिन के हाथ से नहीं बँधवाए हैं. कभी ई सहर, कभी ऊ सहर, कभी देस, कभी बिदेस... खानाबदोस का जिन्नगी जी रहे हैं. ई हालत में राखी हमको कोरियर से मिलता है. अऊर राखी के साथ उसका चिट्ठी. बातचीत त होता रहता है, लेकिन बाकायदा चिट्ठी, साल में एक्के बार. अबकी साल का आप भी देखिए,

आदरणीय भईया,
 सादर चरण स्पर्श.

बच्चे जब स्कूल में पत्र लिखते हैं, तो पूछते हैं कि औपचारिक लिखना है या अनौपचारिक लिखना है, क्योंकि दोनों के फॉर्मेट अलग होते हैं. ठीक उसी तरह, चिट्ठी लिखने की आदत ख़त्म होने से समझ में नहीं आता कि कैसे लिखूँ. तब मैं पत्र लेखन की पारम्परिक विधि अपना रही हूँ:

मैं यहाँ ठीक से हूँ और आशा करती हूँ कि तुम लोग भी कुशल पूर्वक होगे. आगे यहाँ का समाचार सब ठीक है. राखी भेज रही हूँ, टीका लगाकर बाँध लेना. भाभी को प्रणाम और झूमा को आशीर्वाद. बच्चों तथा इनके तरफ से प्रणाम.

तुम्हारी

विनी

चार भाई में अकेली बहिन. एकदम पागल, खानदानी बीमारी है.

हमको फोन करके एक बार पूछी, “कैसे हो?”
“ज़िंदा हैं.” ई हमरा तकिया कलाम है, लगभग सब लोग जानता है. बाकी ऊ रोने लगी तुरत. हम पूछे भी कि का हुआ, मगर काहे चुप होये.
बोली, “दूर रहते हो तो ई सब बात काहे बोलते हो.”

अब हमरा बारी था चुप होने का.माता जी भी कहती हैं कि भरली साँझ मुँह से खराब बात नहीं निकालना चाहिए. जीने मरने का बात. मगर हम आदत से बाज नहीं आने वाले थे. इसलिए ऊ अपना सवाल बदल दी. अब पूछती है कि सब ठीक है ना.

जब पढाई करती थी एम.ए. में त हमको बोली कि छुट्टी लेकर हमको पढा दो. अब बताइए, ई त मजाके न हो गया. हम ठहरे एम.एस-सी. केमिस्ट्री अऊर बहिन जी का सब्जेक्ट मनोबिज्ञान. हमको त ई हो नहीं बुझाता था कि ससुरा साइकोलॉजी P से लिखाता है कि S से. मगर बोले कौन. कह दिए कि नहीं पढाएंगे त टप टप लोर चूने लगेगा. छुट्टी लिए, पढे पहिले, फिर पढाए. पता चला कि फस्ट क्लास में पास हो गईं, बहुत बढिया नम्बर से.

हम त अबाक रह गए.मगर उसका कॉन्फिडेंस देखकर लगा कि बहिन का भरोसा भाई का सही साइकोलॉजी समझता है.

दूगो बड़ा बड़ा बच्चा है उसको,मगर हमको इस्टेसन पर,चाहे एयरपोर्ट पर छोड़ने आएगी त बिना बच्चा ऐसन रोले बिदाईये नहीं हो सकता है. बच्चा थी त घर में माता जी के नहीं रहने पर, इस्कूल से आने पर हम उसको खाना निकाल कर देते थे, उसका इस्कूल का युनिफॉर्म प्रेस करते थे. कभी लड़ाई किए होंगे, याद नहीं.

आज भी फोन पर बतियाते बतियाते हम उसका खुसी, दुःख, तकलीफ, उदासी, उमंग सब महसूस कर सकते हैं. बहिन लोग होबे करती हैं अईसने.

आइए अब दू गो अऊर बहिन से मिलिए. पहली हैं बड़की दीदी, सरिता दी. अभी लंदन में हैं. नानी बनने गई थीं, मगर बचिया बहुत इंतजार कराई. नौ तारीख का बोलकर, 20 तारीख को पैदा हुई. उनका मेल हमको मिला. आप भी देखिए. एतना दूर रहकर भी उनका प्यार अऊर स्नेह दिल को छू गया. सरिता दी, प्रणाम है आपको!!

प्रिय सलिल,

मैं भी ना..(चार्ल्स डिकेंस की ग्रेट एक्स्पेक्टेशंस पढते हुए) सोच रही हूँ कि सलिल ने ये किताब पढी होगी या नहीं...? वो भी हस्पताल में… तीन दिन बड़े ख़राब गए...पर बुरा समय भी टिकता थोड़े ही है... अब सब ठीक है. नन्ही परी आ गई एक लम्बे इंतज़ार के बाद..हम एक स्पेशियालिटी हस्पताल में थे, इसलिए कॉम्प्लीकेशंस को दूर कर लिया गया.. अब मैं नन्ही सी जान के साथ प्यारा सा समय बिताना चाह्ती हूँ.

परिवार के लोगों के अतिरिक्त तुम वो पहले व्यक्ति हो जिसको यह ख़बर दी है मैंने...लेकिन तुम भी परिवार ही तो हो..

शुभकामनाओं सहित
सरिता दी.

दूसरी बहन हैं डॉ. दिव्या श्रीवास्तव. बिना बताए बैंकॉक से लखनऊ चली आईं. अऊर हम सारा दुनिया में लोग से पूछते फिर रहे हैं कि ए, भाई!! ए भाई!!! किसी ने देखा है मेरी बहन को. कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया. एगो पता मिला.. ऊ भी डॉक्टर थी, दिव्या भी थी अऊर श्रीवास्तव भी थी. मगर हमरी बहिन वाली दिव्या नहीं थी.

आज अचानक प्रकट हो गई. बोली ज़िंदा हूँ मैं. हवाई जहाज त कोनो कसर नहीं छोड़ा था. लेकिन बच गई. देखिए जरा इनका चिट्ठीः

सलिल भाई ,

रिश्ते या तो बनाती नहीं , बनाती हूँ तो निभाती भी हूँ ! आप जैसे भाई का मिलना , मेरा सौभाग्य है ! इज्ज़त करती हूँ आपकी, प्यार करती हूँ आपसे बेहद।

विमान हादसे में शायद इसीलिए बच गए , क्यूंकि एक भाई की शुभकामनाएं , और प्यार मेरे साथ था ।

माँ को मेरा नमस्ते कहियेगा !

रक्षा- बंधन के इस पावन पर्व पर मेरी तरफ से शुभकामनाएं और मिठाइयाँ ।

मगर असली बात बताएँ... राखी त ई बाद में बाँधेंगी अऊर मिठाई खिलाएँगी, रक्षा हमसे पहिले करवा लीं. बिमान हादसा ई भाई का कारन टल गया.

अब बताइए. राखी का त्यौहार भी गजब का त्यौहार है न! अऊर ई बहिन लोग भी अजीब होती हैं. एगो विनी, जो चिट्ठी लिखने के लिए आज भी पारम्परिक फॉर्मेट ब्यवहार करती है, एगो सरिता दी, लंदन के हस्पताल में चार्ल्स डिकेंस का नॉवल पढकर याद करती हैं कि हम ऊ नॉवल पढे होंगे कि नहीं अऊर एगो दिव्या, जो हमरे हिसाब से दिल का डॉक्टर है, डॉक्टरी चाहे कोनो डिपार्ट्मेंट में करे.

पुनश्चः परिवार का सभी बहनों को राखी के दिन लिए हमारा सुभकामना, आसीस, स्नेह अऊर प्यार... ई पोस्ट कुछ चिट्ठी, जो पिछला दू दिन में हमको मिला, अऊर दिल को छू गया बस उसके लिए था.. अईसा नहीं कि हम अपने बहनों को भुला गए हैं.

33 टिप्‍पणियां:

  1. आपको और परिवार में सभी को राखी के इस पावन पर्व पर बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  2. रक्षा- बंधन के इस पावन पर्व पर शुभकामनाएं ..


    अच्छा लगा सभी बहनों से मिलकर.

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  3. रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.
    हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

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  4. बहुत रोचक अंदाज में लिखते हैं आप। और प्यार बाँट रहे हैं तो प्यार ही तो मिलेगा।
    आभार स्वीकार करें।

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  5. हमेशा की तरह दिल से निकली भावनाएँ ...रक्षा बंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  6. raksha bandhan ka subhkamna

    vini di ko pranam

    aur divya di ko hamara massege de
    ki hamne unke g-mail par kai bar
    awaz lagaya ko jabab kyon nahi....

    bakiya bachha sab thik hai
    babua aur jhuma ko subhkamna....

    prnam.

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  7. बेहद भावुक करती अभिव्यक्तियां.. खासकर मुझे जिसने पूरे बचपन, एक अदद बहन को मिस किया!

    बहन-भाई का यह रिश्ता..इस देश की एक अनमोल विरासत है.बहुत भावुक बात हो गयी है आज, सलिल भाई! आंखे भर आयीं है.

    की-बोर्ड और माउस से चलने वाली इस आभासी दुनिया में यह जो भावुक रिश्तों की गंगा बहा रहे हो आप...जीवन की सारी कठोरता इसमें बह जाये इसी शुभ कामना के साथ...सभी बहनों को मेरी भी हार्दिक शुभकामनाएँ.

    इस ब्लोग परिवार में मेरी बहन सोनी को भी स्नेहाशीष!

    -चैतन्य

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  8. Bihari babu rakhi ki aapko bhi subhkanyane.......achchha laga aapke didiyon ke patra ko padh kar........:)

    ek baar fir se laga aap kitne adhik samvedanshil ho.....:)

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  9. बहुत बढिया .. रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

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  10. रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
    बहुत सुन्दर ! उम्दा प्रस्तुती!

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  11. mera saubhagya hai ki main bihar cadre ka ekmatra bhai hun vini ka. lekin jhanjhat ladai vagairah bhi mere sath hi hoti hai magar jab bhi use kucch zarurat hoti hai mujhe yaad karti hai. shayad ye bhi bahan ka vishvas hai jo rakhsha bandhan ke karan ho. kabhi kabhi mai rakhi ke din use chidhataa bhi hu ki"rang birangi LATHI lekar aayi bahna..."

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  12. सलिल भाई,बहनें ऐसी ही होती हैं। अब देखिए न मैं भी भोपाल में संयोग से हूं। पर संयोग कुछ ऐसा है कि मेरी ममता बहन हर साल राखी बांधने आती थी,वह इस साल अस्‍वस्‍थ्‍य होने के कारण खंडवा से नहीं आ पाई। पर भोपाल में भी मौसेरी बहनें हैं। पिछले साल किसी कारण से वे नहीं आईं पाई थीं। पर आज आरती सुबह सुबह ही वह आ पहुंची। पहले तो गले लगकर रोई कि आप पन्‍द्रह दिन से भोपाल में हो और एक फोन तक नहीं किया। सचमुच शर्म आ रही थी। पर भाई बहन का प्‍यार ही ऐसा है सो उसने भी माफ कर दिया। राखी बंध गई। वह फिर उड़ गई यानी चली गई।
    और कविता छोड़ गई-
    बहनें
    घर आंगन की चिडि़या
    जा जाकर आती
    बार बार ।

    सलिल भाई,अन्‍यथा न लें। विनी ने आपको सादर चरण स्‍पर्श लिखा है। यह बात कुछ समझ नहीं आई। मेरी समझ से उत्‍तर भारत या यों कहें कि पूरी हिन्‍दी पट्टी में बहन,बेटी और मां किसी भी उम्र की हों हमेशा भाई,पिता या बेटे को उनके पैर छूने होते हैं। वे अपने पैर छुवाते नहीं हैं। हां दक्षिण भारत में मैंने देखा कि वहां आयु के मान से छोटे बड़ों के पैर छूते हैं। क्‍या इस पर कुछ प्रकाश डालेंगे।

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  13. बहुत भावनाप्रधान पोस्ट ....रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

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  14. सलिल जी किस्मत वाले हैं बहनों ने आज की दिन राखी का बंधन निभाया .... बहने भी किस्मत वाली हैं जिन्हे आप जैसा भाई मिला ...चिट्ठियाँ मर्मस्पर्शीय हैं .... आज का दिन बहुत पावन है ... सब को मुबारक ....

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  15. @राजेश उत्साहीः
    लिखते समय भावनाओं में बहकर लिख गई है...

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  16. बहुत ही प्यारी सी पोस्ट...बहनों के प्यार में पगी.
    चिट्ठी लिखने और पोस्टल एड्रेस की याद , सचमुच अब बस राखी के समय ही पड़ती है...पर यह भी शायद हमारी पीढ़ी तक ही है... बाद वाली पीढ़ी तो हर काम नेट के थ्रू ही करनेवाली है...

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  17. पढ त भोरे में लिए थे लेकिन एतना रुला दिए कि कुच्छो लिखने का मने नहीं किया। एतना भावुक कर देते हैं, कि आपके ब्लोग पर आने का मने नहीं करता है। लगता है रुलाने का ठीका लिए हुए हैं। लेकिन जो लिखते हैं उसको पढले बिना रहलो त नहीं जाता है। आज के दिन भी रुलाने-धुलाने का इंतज़ाम ईहां किए बैठे हैं और हम लोग परदेस बासी बहिन से खाली फोने पर त बात कर पाते है।
    चलिए ईहे बहाने आप सब बहन को इयाद त कर लिए।
    सुभकामना और बधाई।

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  18. सलिल जी आपकी अभिव्यक्ति के प्रवाह में जो सहजता व आत्मीयता है वह अनूठी है । पाठक उसमें स्वतः वह जाता है । रक्षा -बन्धन वाली यह रचना पढ कर कोई भी ,वाह, किये बिना नहीं रह सकता ।

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  19. हे भाई, टिम्बकटू में ई कवन लरकी आपका पँखी बन गयी..?

    @ राजेश उत्‍साही
    सलिल बाबू त लटपटिया गये, मुला हम बताता हूँ, आपको सही जवाब । मिथिलाँचल में विशेष करके तिरहुत में ई सामान्य बात है । बड़ा भाई को पिता का पद हुआ.. सो उस नाते छोटकी बहिन सब का चरण स्पर्श ई मान को बढ़ाता है । ईहाँ तक कि छोटका बहनोईयो भी जहाँ मिलेगा, गोड़ छूयेगा ! अब पूछिये कि जिसका गोड़ पूजें हैं, उससे अपना गोड़ कईसे छुआयेंगे.. त इसमें ई बात है कि अपना दरवज़्ज़ा पर दुआरचार के नाते गोड़ पखारे हैं । खास मौका के ई हुआ खास बिध, इसका मानता जिनगी भर थोड़े नू चलायेगा ? राजेश जी ई बात आप बँगाल में उड़ीसा में भी देखीयेगा । हालाकि हम ई सब टिटिम्हा में वीस्बास नहीं करते हैं, मुला जे जहाँ का रीत है, आपको ऊहे बताते हैं ।


    @ बिहारी बाबू
    हमरा एक फुफुआउत बहिन तोतराती थी, ऊ राखी पर एगो गाना गाती थी, " भाईया मेले लाठी से बँदल को भगाना "

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  20. .
    भाई सलिल ,

    बहुत सुन्दर पोस्ट लिखी है आपने । भाई-बहेन का सुन्दर रिश्ता हमेशा फले-फूले । विनी और सरिता जी से मिलकर बहुत अच्छा लगा। आपने सही कहा, राखी तो बाद में बंधेगी , लेकिन रक्षा पहले करवा ली। आपकी दिल से आभारी हूँ ।
    .

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  21. @-aur divya di ko hamara massege de
    ki hamne unke g-mail par kai bar
    awaz lagaya ko jabab kyon nahi....


    Dear Shailendra,

    I am yet to read many mails. I am extremely sorry for any kind of delay in replying your mail . Hope you will understand.

    Regards,

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  22. बहुत प्यारी सी पोस्ट है चचा जी,
    हम भी सोचे थे की राखी के दिन कुछ लिखेंगे लेकिन अभी पटना में इतना व्यस्त हो गए हैं घर के कुछ कामों में की सही से कुछ लिख पाने का वक्त नहीं मिल रहा..

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  23. बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुती ,रक्षाबंधन पर बहनों को याद करने का आपका ये निराला अंदाज पसंद आया ,शानदार ,सभी बहनों को हमारी ओर से भी बधाई और शुभकामनायें ...

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  24. "बहिन का भरोसा भाई का सही साइकोलॉजी समझता है"

    सच..और सच पर प्रशंसा नहीं होती, नत हुआ जाता है.

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  25. चैतन्य की कही बात अक्षरशः मेरी भी मान लें ...शुभकामनायें !

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  26. बहुत अच्छा लगा आपकी बहनों से मिलकर ..हम भी न जाने कितने सालों से यूँ ही चिट्ठियों में ही रखी बांध रहे हैं .क्या करें खानाबदोश जो हैं :)
    शुभकामनायें

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  27. बहिन लोग से मिलके आज बहुत ख़ुशी लागल.
    हमरो पास रक्षा बंधन, छोटकी बहन और चिट्ठी के महिमा.. ई सब के ख़ास अनुभव बा.

    बधाई!!

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  28. हमारी तरफ ( मुज़फ्फर नगर )गाँव देहात में राखी को पहुंची कहते हैं....यानि हे बहिन, राखी पहुँच गयी. राखी का मतलब भी यही है कि आपकी भेजी, हमने रख ली. सो यह त्यौहार भारतीय डाक और मनी आर्डर सेवा के बिना संपन्न नहीं होता. एक बेहद भावप्रद आलेख.

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  29. दिलों को जोड़ने वाली पोस्ट.
    राखी मिले न मिले मगर राखी के दिन बहन की बोली भी सुनने को मिलती है तो मन हर्षित हो जाता है.
    ...देर से आया.

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  30. आप बहुते किस्मत वाले हो चचा कि ऐसा एगो परिवार मिला , नहीं तो कितने होते हैं जो हर साल राखी खुद खरीद कर खुद बाँध लेते हैं :(
    आइन्दा बहन के ऊपर कौनो पोस्ट डालियेगा तो पहिले बता दीजियेगा , हम नहीं पढेंगे | काहे कि फिर हम सेंटिया जायेंगे और (बुरा मत मानियेगा) आपसे जलने भी लगेंगे |
    खाली-पीली आधी रात का आंखन मा लोर भरवा दिए |
    इश्वर से आपकी और आपके खूबसूरत परिवार की भलाई की कामना करता हूँ |

    सादर

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