शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

नींद क्यूँ रात भर नहीं आती

चार दिन का जिनगानी में साढ़े तीन दिन त दुनिया भर के लिए चला जाता है, बस ससुरा आधा दिन हाथ में आता है, हमरे अपने लिए. आधा दिन जबर्दस्त गम और दुःख, बाकी का साढ़े तीन दिन जबर्दस्ती का हँसी. हर आदमी एही जुगत में लगा हुआ है कि कईसे ऊ चार दिन का खेला में आधा दिन का दुःख भुलाकर, उसको साढे तीन का खुसी के साथ मिला दे. अब चाहे ऊ खुसी खरीदने से मिले, भीख में मिले, उधार मिले, चाहे चोरी से मिले. एही जुगाड़ में दिन रात एक किए रहता है आदमी.

दिन रात नहीं, खाली दिन, काहे कि रात में त सोना भी जरुरिए है. अब सब आदमी हमरे जईसा निसाचर त नहीं है ना. का करें एतना उमर हो गया, लेकिन अपने लिए कभी टाईम नहीं मिला. सारा दिन ऑफिस, परिवार, बच्चा, पढाई, इम्तिहान, आना जाना, एही में निकल जाता है, अपने लिए कभी टाईमे नहीं मिला.

तब हम चोरी सुरु किए, अपने घर में अपना समय चोराना. जब सब लोग सो जाता, तब हम पढाई करते. जो भी तनी मनी हम पढ़े हैं, रात में पढे हैं, सब के सो जाने के बाद, इत्मिनान से. इसी कारन हमको भोरे जल्दी उठने का बीमारी कभी नहीं लगा. आप लोग भी देखे होंगे कि हमरा सारा टीका टिप्पनी देर रात में होता है. इसी पर एक बार सरिता जी (अपनत्व) हमको समझाईं भी थीं कि एतना देर तक जागना ठीक नहीं है. दू दिन ठीक रहे, बाद में फिर चालू. का करें, अपने आप से मिले बिना रहिओ त नहीं पाते हैं.

अब देरी से सोने के कारन जल्दी उठने का त सवाले पैदा नहीं होता है. सच पूछिए त एही हमरा चिर युवा इमेज का राज है. बच्चे से एगो कहावत सुने थे कि जल्दी सोवो, जल्दी जागो, उठकर माखन मिस्री मांगो. न हम जल्दी सोए, न जल्दी जागे, न हमको माखन मिस्री मिला. न माखन मिस्री मिला, न कॉलेस्ट्रोल अऊर डायबिटीज का समस्या हुआ.

धीरे धीरे ई भेद हमरा सारा दोस्त लोग को पता चल गया. हम भी तब एलानिया डिक्लेयर कर दिए कि हमको रात में दू बजे तक कोई भी आराम से फोन कर सकता है, मिल सकता है, बतिया सकता है, लेकिन सुबह एकदम नहीं. इसीलिए जादातर लोग हमसे राते को मिलता, बतियाता है. एगो बात अऊर, एतवार को एगारह बजे से पहले कोई स्कोप नहीं. एक रोज सिवम मिश्र जी का फोन आ गया, एतवार को भोरे भोरे, हमरा कोनो पोस्ट पर इंस्टेंट ऑडियो टिप्पणी देने के लिए. तकिया से फोन तोप कर सो गए हम. बाद में एगारह बजे फोन किए अऊर छमा मांगकर बतियाए.

ई चक्कर में बहुत नोकसान हुआ है नींद का. लेकिन माँ बाप का आसिर्बाद रहा कि बीमार कहिओ नहीं पड़े, अऊर ऑफिस में कभी नहीं ऊँघे ( ऊ का कहती है हमरी बेटी टच वुड). हमरे एगो सीनियर कहते थे कि ऊ आदमी सुखी है जिसको नींद आ जाता है, ऊ आदमी उससे भी सुखी है जिसको जब चाहे तब नींद आ जाता है, लेकिन दुनिया में सबसे सुखी ऊ आदमी है, जिसको जहाँ चाहे, जब चाहे तब नींद आ जाता है. हम ई सुख से बंचित रहे. का मालूम केतना नींद का बलि चढाए हैं हम.

सोचते हैं, जाते समय डॉ. बच्चन जो बात कहे थे, ऊ सबको बोल जाएंगे कि मरने के बाद हमरा सरीर को 10 – 15 दिन अईसहीं छोड़ देना. ईहो कहेंगे कि कोनो हल्ला गुल्ला, रोना धोना, सोर सराबा मत करना. आराम से सोने देना, ताकि जो नींद हम अपना जिन्नगी में पूरा नहीं कर सके ऊ पूरा हो जाए. उसके बाद हमको धरती माँ के गोदी में सोला देना, काहे कि माँ के गोद से बढिया नींद त कहीं आइए नहीं सकता है. अऊर ई अनिद्रा का रोग भी त माँ का गोदी छोड़ने के बादे लगा है. एगो अऊर बात, भूल से भी आग में मत जलाना. हमको आग से बहुत डर लगता है. गरम रोटियो से हाथ जर जाता है, त बेचैन हो जाते हैं हम.

नाम ऊम का त कोनो चाह है नहीं हमको, न अईसन कोई नामवर आदमी हैं हम, इसलिए जहाँ हमको सो जाएँ, ओहीं एगो पत्थर पर लिखवा देनाः

सिरहाने सलिल के आहिस्ता बोलो
ई बकबक करके, अबके सो गया है.

25 टिप्‍पणियां:

  1. एक दिन त सबको सोना ही है,फेर काहे नहीं जाग कर आपकी तरह कुछ करने में ही समय का उपयोग किया जाए। वैसे,वास्तुशास्त्र भले कहे कि रात में केवल उल्लू जगते हैं,मगर व्यावहारिक पक्ष यही है कि हममें से अधिकतर रात के वक्त ही पढ पाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस पोस्ट में जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा व्यक्त हुआ है। जो आदमी अपने जीवन के बाद की योजना बना ले,इतना विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि उसने जीवन को पूरी रवानगी से जिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुते जानदार पोस्ट ,वाह भाई वाह मजा आ गया आपके जीवन और मृत्यु के प्रति नजरिये को जानकर |

    उत्तर देंहटाएं
  4. सिरहाने सलिल के आहिस्ता बोलो
    ई बकबक करके, अबके सो गया है.
    कुच्छो मन में आया बोल देते हैं। हम त ज़ोर से चिलाएंगे और आपका बकबके सुनेंगे। सोने नहीं देंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  5. @मनोज कुमारः
    आपका आसिर्बाद अऊर मोहब्बत हमको सोने देगा तब ना...स्नेह बनाए रखिए, बकबक करके उबिया देंगे आपको!!तब मत कहिएगा...

    उत्तर देंहटाएं
  6. इसी कारन हमको भोरे जल्दी उठने का बीमारी कभी नहीं लगा.

    :)

    सिरहाने सलिल के आहिस्ता बोलो
    ई बकबक करके, अबके सो गया है.

    अच्छा है ना..:)

    उत्तर देंहटाएं
  7. सृजनशील व्यक्ति अपना संविधान खुद रचते हैं । ईमानदारीपूर्ण उम्दा रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. भैया हमें भी आप वाली बिमारी है, सो कर समय की बर्बादी क्यों करें, आपका फोन न. बताइयेगा कभी कभी रात १, २ बजे आप से बतिया लिया करेंगे, चिंता ना करे भोरे भोरे फोन नहीं करेंगे!

    उत्तर देंहटाएं
  9. आप बकबकाते रहिये ...............हम भी सुनबे को तैयार है ताउम्र !
    सलिल भाई ...........बहुत बहुत धन्यवाद ..........आपके फ़ोन के बाद अब काफी अच्छा महसूस कर रहा हूँ और ऊपर से आपका यह लेख .............और उस में भी मेरा जिक्र ..............क्या कहने !! बस ऐसे ही स्नेह बनाये रखें !

    उत्तर देंहटाएं
  10. हम समझ सकता हूं, काहे कि हमारी भी यही स्थिति है... काहे की एक ही पेशे के हैं न। बहुत ही बढिय़ा लिखे हो जमा-जमा के। बाकि का बताएं फुल मजा लिए हैं आपकी इस पोस्ट के हमने।

    उत्तर देंहटाएं
  11. हँसते हँसते बड़ी गंभीर बाते कह देते हैं आप ! अंतिम लाइने हर किसी को याद करने लायक है , कम से कम मैं नहीं भुला सकता ! शुभकामनायें बिहारी बाबू !

    उत्तर देंहटाएं
  12. आहिस्ता से बोल रहा हूँ ...क्योंकि अभी साढ़े नौ बजे हैं और आज शनिवार की छुट्टी का दिन है।
    गजब करते हैं आप भी ...रात के अँधेरे में जमाने की निगाहों से छुप-छुप कर मिलना...
    वह भी अपने आप से!

    उत्तर देंहटाएं
  13. रहीम ने अपने एक दोहे में कहा था,
    रात गवाई सोये के दिवस गवाया खाए !
    हीरा तन अमोल था कोडी बदला जाए !!
    इसलिए जो जीवन हमें मिला है क्यों ना उसका भरपूर इस्तेमाल किया जाए ! बाकि सोना तो सबको ही है !

    उत्तर देंहटाएं
  14. mujhe lagta tha yeh bimari mujhe hi hai per aaj jaana ki bhagwan ne hamare jaise aur log bhi banaye hain.
    jagte raho:)

    उत्तर देंहटाएं
  15. सलिल जी बहुत मजा आया पढ़कर। हमारी सच्चाई ये है की उगता सूरज हमने भी कभी नहीं देखा।

    उत्तर देंहटाएं
  16. सिरहाने सलिल के आहिस्ता बोलो
    ई बकबक करके, अबके सो गया है.
    ......एक उम्दा पोस्ट के लिए शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  17. सिरहाने सलिल के आहिस्ता बोलो
    ई बकबक करके, अबके सो गया है...

    हंसते हंसते इस पोस्ट में आप रुलाने की स्थिति में ले आए सलिल जी ....
    बहुत गहरी बात ... बहुत ही सहज से कह गये आप ... धरती माता की गोद में तो सभी को चिर निंद्रा में जाना है इक दिन ....

    उत्तर देंहटाएं
  18. अच्‍छा तो खडगसिंह सो रहे थे। तभी तो हम कहें कि वे बाबाभारती की कविताएं पढ़ने काहे नहीं आए साखी पर। खैर नींद बहुत काम की चीज है। तो सो लिए हों तो जरा इधर टहल आइए ब्‍लाग पर। और न सोएं हों तो भी टहल आइए ताकि थककर नींद आ जाए।

    उत्तर देंहटाएं
  19. बस अभी पढ़ें हैं आपका ये पोस्ट चचा...और क्या कहें....बाद में कभी कहेंगे...:) हर बार आपसे कुछ नया सीखते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  20. aaj mai London pahuch gayee bitiya ke paas mere blog se mere bacche jude hai kahee bhee ho padte hai aur personally phone par batate hai apanee pratikriya.........
    aapkee tippanee padkar aapkee shailee bahut acchee lagee. ( S F O se phone par bolee badee betee ) mamma uncle apane lagte hai...........
    ise blog jagat se parivar jan saa sukh milta hai.....comments kee gintee mai nahee kartee par haa apanapan jaroor toul letee hoo .
    bitiya ne yanhaa aate hee sabse pahile mera laptop activate kar diya.......

    उत्तर देंहटाएं
  21. apka post hothon pe hansi
    aur
    dil me dard daita hai
    aap se baten karne ka
    bahut man karta hai
    mobile ka number dene me
    gar koi dikkat mahsoosh ho
    tippani pe apna jabab jaroor de

    hamari bhi raat bahut der se hoti hai, phir bhi subah se kuch pahle
    jaroor hoti hai.

    blogging ke ekta karmath pathak

    ......sk jha, chd.

    उत्तर देंहटाएं
  22. जिंदगी भर दौडता रहा जिंदगी के पीछे ,
    बस अनजान चेहरों की दौडती हुयी भीड़ मिली ,
    मेरी आँखों में चुभन बहुत तेज की है ,
    बड़ी किस्मत थी जो अब जा के मुझे नींद मिली |

    सादर

    उत्तर देंहटाएं