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शनिवार, 20 अगस्त 2011

बुड्ढा होगा तेरा बाप!!


पीछे एतना बिजी रहे कि ब्लॉग पर आने का समय बहुत कम मिला. मगर फेसबुक पर तनी जादा समय बीता. फेसबुक पर जेतना लोग देखाई देता है उसमें बहुत सा लोग हमारे उमर का है अउर बहुत सा नबजुबक है. हमारे लिए ऊ लोग बच्चा है. मगर हमरा इंटरैक्शन बच्चा लोग के साथ बहुत सुखद रहा है. कभी-कभी ई लोग का सोच, बिचार, लेखन देखकर ताज्जुब होता है. ई लोग के साथ मिलकर अपना समय भी याद आता है अउर अपने बड़प्पन का भी एहसास होता है. मन भर जाता है जब कोइ चचा, कोइ चाचू कहता है. कभीकभी त हमरे साथी लोग कह देते हैं हमको कि तुम कहाँ बच्चा सब के बीच फंसे हो, बुड्ढे हो रहे हो, इस सच्चाई को तो समझो. अब साथी को तो नहीं कह सकते कि बुड्ढा होगा तेरा बाप!
अमिताभ बच्चन जी का सिनेमा देखे बुड्ढा होगा तेरा बाप. सिनेमा त जो था सो था. लेकिन अमित जी एकदम सत्तर के दसक वाला बिजय बने हुए थे. कोइ कहेगा कि उमर के ई पड़ाव पर आकर अपने बेटा से मुकाबला कर रहे हैं अउर खाली मुकाबला नहीं जबरदस्त कम्पीटीसन दे रहे हैं. सत्तर साल होने को आया, दिन में फाइटिंग करते हैं अउर रात में कौन बनेगा करोड़पति खेलाते हैं. दुनो रोल में फिट. बहुत प्रेम अउर बड़प्पन के साथ खेलने वाले को बोलाते हैं, उनसे घुलमिलकर बतियाते हैं. लगबे नहीं करता है कि कहाँ इतना बड़ा सुपर-स्टार अउर कहाँ एगो साधारन आदमी. खाली एही नहीं, सत्तर साल का उमर में भी सब जवान लोग दीवाना है उनका. जब फोन लगाकर बोलते हैं जी मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूँ, कौन बनेगा करोड़पति से तो अच्छा-अच्छा लोग घबरा जाता है. अब आप ही बताइये अइसा आदमी को कोइ बुड्ढा बोलेगा त एही जवाब मिलेगा सुनने को कि बुड्ढा होगा तेरा बाप!
एगो अउर बुढऊ हैं, हमारे चचा गुलज़ार. अभी १८ तारीख को पछत्तर साल के हो गए. एगो टाइम था कि हम जवान थे अउर कोनों आदमी इनका कविता को बकवास बोलता था त भिड़ जाते थे उससे. हमरे पिताजी के साथ भी केतना बार बहस हुआ, मगर बाद में ऊ भी फैन हो गए गुलज़ार साहब के. कमाल का सेन्स ऑफ ह्यूमर, कमाल का रोमांटिसिज्म, कमाल का बचपना. सबसे बड़ा खासियत त हमको ई लगता था कि कहाँ कहाँ से बिम्ब लेकर आ जाते हैं और सम्बेदना को ऐसा ऊंचाई पर ले जाते हैं कि लगता है कि मोक्ष मिल गया. उनको पढ़ना अउर उनके आवाज़ के गहराई को मन में उतारना कोनो समाधि से कम नहीं है. आजकल फेसबुक अउर ब्लॉग पर नया उम्र का बच्चा लोग को जब लिखते देखते हैं अउर उसपर गुलज़ार साहब का परभाव देखते हैं तो आस्चर्ज होता है. मगर का किया जाए गुलज़ार साहब का रोमांटिसिज्म देखकर हर कोइ को अपना भावना का अभिब्यक्ति मिल जाता है.
आओ तुमको उठा लूं कंधे पर,
तुम उचककर शरीर होठों से,
चूम लेना ये चाँद का माथा.
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुका-झुक के कुहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है!
अब बताइये भला, ई रोमांस कहीं उम्र का मोहताज है. तीस साल पहिले हम ई पढकर सातवाँ आसमान पर होते थे अउर तीस साल बाद नोएडा के मॉल में एगो जवान लड़का अपनी महबूबा का हाथ अपना हाथ में लेकर एही नज़्म सुना रहा था. अब इसके बाद भी कोइ गुलज़ार साहब को ७५ साल का बुड्ढा बोले तब तो एही जवाब दिया जा सकता है कि बुड्ढा होगा तेरा बाप!!
७४ साल के अन्ना हजारे. बैठ गए हैं अनसन करने. पकड़कर जेल में डाल दिया गया, कोइ बात नहीं, अनसन करना है त ओहीं कर लेंगे. मगर टस-से-मस नहीं होंगे. राजनीति है ई सब, ब्लैकमेल कर रहा है, बरगला रहा है लोग को, खुद भ्रस्टाचार में लिप्त है... बोलने दीजिए. ई बूढ़ा आदमी बस एही बता रहा है कि भ्रस्टाचार को खतम करना है अउर इसके लिए कोनों बिल पास करना जरूरी है. मगर बहस ई है कि ई वाला बिल से भी भ्रस्टाचार नहीं खतम होगा, फलाना को इसके दायरा से बाहर रखो, का गारंटी है कि इसमें भी लोग छेद नहीं करेगा. अरे भाई जब कोनों गारंटी नहीं है तो पास कर दो, काहे झंझट कर रहे हो. मुर्दा पर जैसे आठ मन वैसे दस मन. सैकड़ों साल पहिले का अंग्रेज का बनाया हुआ एक हज़ार क़ानून हइये है त एगो अउर क़ानून सही. मगर एक तरफ बिरोध है दोसरा तरफ नौजवान लोग का जूनून. दिल्ली, नोएडा, चेन्नई, बेंगलुरु, सब जगह नौजवान लोग का जोस देखने वाला है. कोइ सोच भी नहीं सकता है कि नौजवान लोग का सुपर हीरो एगो ७४ साल का बुड्ढा बना हुआ है आजकल. माफी चाहते हैं ई बात कहने के लिए. कहीं सबलोग मिलकर हमरे खिलाफ नारा न लगाने लगे कि बुड्ढा होगा तेरा बाप!!

शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

ब्लॉग - जात्रा

बहुते पानी बह गया गंगा जी में, हमरा परिचय के बाद से। लेकिन का करें टाईमे नहीं मिल रहा था। उमीद है माफ कीजिएगा. हाँ त हम का कह रहे थे... याद आया, ब्लोग लिखने के पहिले, अपना एक महीना का तैयारी का बारे में बोले थे कि बताएंगे. अब ई समस्या हो गया है कि कहाँ से सुरू करें.
त चलिए सबसे पहले ब्लोग शिरोमणी अमिताभ बच्चन जी का बात बताते हैं। कुछ दिन तक त हम पढे, लेकिन बाद में लगा कि टाइम बरबाद हो रहा है। पहिला बात त ऊ जो लिखते हैं सब एकदम से उनका खास बात होता है, अब हमको कोनो सरोकारे नहीं है ऊ सब बात से। हमको का, किसी को नहीं है. दोसरा बात जो हमको खराब लगा ऊ ई था कि उनके ब्लोग पर आप कुछो कहिए उनको सुनाइए नहीं देता है. एकदम कान में रुई डालकर और कोल्हू का बैल जइसन नाक का सोझे चले जा रहे हैं. ए भाई! तनी एन्ने ओन्ने भी देखिए. बहुत लोग आपका बात हमसे जादा ध्यान लगा कर पढता है.
एक दिन अइसहीं ब्लोगस्पॉट पर आए, त मन हरियर हो गया। लोग लिखता है, उसका फोलोअर भी बनता है, उसको कमेंटो करता है और कमेंट का जवाबो लोग देता है. एकदम घरे जैसा. सबसे अच्छा बात त ई लगा कि ई जगह सही माने में स्वर्ग है. जिसको जो बुझाया,जैसा बुझाया लिख दिया. मतलब एके बात से है कि मन का बात कहने के लिए किसी को ऊ नाई के जइसा जंगल में जाकर पेड़ से कहने का जरूरत नहीं है कि राजा के माथा पर दू गो सिंग है. कोई पद लिखता है कोई गद. बाकी लिखता है मन लगाकर, अऊर मानकर कि दुनिया का सबसे अच्छा लेखक ओही है.
एहाँ सोचने वाला बात एक्के गो है कि पाँचो उँगरी एक समान त नहिंए न हो सकता है. बाकी उँगरी त उँगरिए है, काट के बराबरो नहीं किया जा सकता है. काटिएगा त खूनो बहेगा अऊर दरद भी होगा. खैर, ई सब डाइलोग जाने दीजिए. हम देखे कि कुछ लोग बहुत अच्छा और कुछ लोग ठीक ठाक लिखने में लगा है. लेकिन निमन बात एही लगा कि परेसानी में भी लोग बोलता है और लिखता है.
मगर पढने वाला लोग का प्रतिक्रिया के बारे में हमरा सपना बहुत जल्दिए टूट गया. आधा से जादा लोग कमेंट के नाम पर बिना पढे तारिफ लिख देता है, कोई कोई त सन 1857 से एक्के कमेंटवा छापे जा रहा है. लोग कमेंट के नाम पर टीका टिप्पनी से भी घबराता है. अऊर बेजोड़ बात त ई है सब लोग आपसे में एक दूसरा का ब्लोग पढता है और तर्रीफ करता है. किसी को फुर्सते नहीं है कि देखे उनका दायरा के बाहर का हो रहा है. कोई गुस्सा हो रहा है कि ब्लोग लिखना बंद कर देगा, काहे कि बहुत बेकार टाईप का लिखने वाला लोग आ गया है, त कुछ लोग मनाने में लगा है कि अइसा मत कीजिए बहुत छती हो जायेगा ब्लोग जगत का, कोई धमकी दे रहा है कि कानून का हाथ बहुत लम्बा होता है, त कुछ लोग समझाया कि जाने दीजिए बच्चा है.
एही सब देखकर मन खराब हो जाता है। गलत लिखता है त बताइए, नहीं सुधार होता है त मत पढिए. लेकिन दुसरा पढनेवाला पर अपना राय काहे थोपते हैं. किसी को अपने से आप काहे खराब बोलते हैं. लोग जब एहाँ है त एतना त समझ ही सकता है कि अच्छा का है अऊर खराब का है. बाकी त आप अपने समझदार हैं. अब जो बुझाया सो लिख दिए, गलत बोलें त हमरा कान ऐंठिए.